124 साल पुराने नक्शे से खुलेगा सीमा विवाद का राज, मध्यप्रदेश-राजस्थान आमने-सामने

मंदसौर
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की सुवासरा तहसील का धनवाड़ा गांव एक बार फिर मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सीमा विवाद का केंद्र बन गया है। राजस्थान का वन विभाग कई वर्षों से गांव की कुछ जमीन पर दावा करता आ रहा है। यही भूमि मध्य प्रदेश सरकार की सौर ऊर्जा परियोजना के लिए आवंटित है।
परियोजना शुरू होते ही राजस्थान के वन विभाग ने इसे अपना बताकर काम रुकवा दिया है। विवाद सुलझाने के लिए मंदसौर प्रशासन ने 1902-03 की ग्वालियर रियासत का मूल नक्शा, 1938-39 का राजस्व नक्शा और वर्तमान रिकार्ड के आधार पर संयुक्त सीमांकन कराया।
धनवाड़ा की जमीन पर सीमा विवाद
अधिकारियों के अनुसार, तीनों रिकार्ड में धनवाड़ा की सीमा समान मिली। नक्शों में दर्ज कुएं, रास्ते और अन्य स्थायी चिह्न आज भी उसी स्थान पर मौजूद हैं। संयुक्त सीमांकन में भी स्पष्ट हुआ कि सौर ऊर्जा परियोजना की प्रस्तावित भूमि मध्य प्रदेश की राजस्व सीमा में है।
अब इससे राजस्थान को अवगत कराया जाएगा। धनवाड़ा मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का राजस्व ग्राम है। भारत सरकार की लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी (एलजीडी) में भी दर्ज है। यहां की पंचायत, स्कूल, आंगनबाड़ी, सड़क, पानी की टंकी सहित सभी शासकीय सुविधाएं मध्य प्रदेश सरकार ने विकसित की हैं।
1902 के नक्शें में सीमांकन एमपी के पक्ष में
धनवाड़ा और रामनगर में 130 हेक्टेयर से अधिक भूमि सौर परियोजना के लिए आवंटित की जा चुकी है। फिर पहुंचे अधिकारी, नहीं हो सका समाधानसंयुक्त जांच में राजस्थान के सिंहपुर गांव के राजस्व नक्शे में भी विसंगति सामने आई। प्रशासन का दावा है कि संबंधित सर्वे नंबर का क्षेत्रफल नक्शे से मेल नहीं खाता और मौके पर वन विभाग के स्थायी सीमा चिह्न भी नहीं मिले।
मंदसौर कलेक्टर दस्तावेज सहित रिपोर्ट झालावाड़ कलेक्टर को भेज चुके हैं। इसके बावजूद राजस्थान का वन विभाग दावा नहीं छोड़ रहा। सोमवार को दोनों राज्यों के अधिकारी फिर मौके पर पहुंचे, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका।
1902 से अब तक के सभी राजस्व रिकार्ड धनवाड़ा को मध्य प्रदेश का हिस्सा बताते हैं। संयुक्त सीमांकन में भी इसकी पुष्टि हो चुकी है, लेकिन राजस्थान का वन विभाग अब भी दावा कर सौर ऊर्जा परियोजना में बाधा डाल रहा है।











