उत्तर प्रदेश में तीन महीने में 550 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी, निवेश बढ़ेगा

 लखनऊ
 प्रदेश में छह लाख करोड़ रुपये निवेश लागत वाली इकाइयां भूमि पूजन के लिए तैयार हैं। अगले तीन माह में 500 करोड़ की लागत वाली 50 और 100 करोड़ की लागत वाली 500 इकाइयां राज्य के विभिन्न शहरों में स्थापित होंगी। इससे प्रदेश को वन ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाना संभव होगा। टेक्सटाइल और फुटवियर इंडस्ट्री को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसके माध्यम से मानव संसाधन को दूसरे राज्यों में जाने रोका जाएगा।

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने शुक्रवार को पिकअप भवन में अधिकारियों के साथ निवेश की वर्तमान स्थिति और लक्ष्य की दिशा में उठाये जा रहे कदमों की समीक्षा की। प्रस्तावित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 (जीबीसी) की तैयारियों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में छह लाख करोड़ रूपए का निवेश धरातल पर है। यह आंकड़ा जल्द ही आठ लाख करोड़ रूपए तक पहुंचने की संभावना है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में सकल मूल्यवर्धन लक्ष्य पांच लाख करोड़ था, जिसके सापेक्ष 3.61 लाख करोड़ मूल्य वर्धन रिकार्ड किया गया। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 में 5.25 लाख करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 4500 फैक्ट्री स्थापित करने का लक्ष्य है। 20 जुलाई तक 1017 इकाइयां आ चुकी हैं।

मंत्री को बताया गया कि भू-भाग आवंटन के बाद फैक्ट्री स्थापित न करने पर 514 प्लाट आवंटन रद हुए हैं। इनमें से 95 दोबारा आवंटित हो चुके हैं। 419 प्लाट उपलब्ध हैं। यूपीडा, बीडा, यूपीसीडा, यीडा के साथ ही अन्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में उद्योगों के लिए लैंड बैंक की स्थिति की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15,610 एकड़ भूमि अधिग्रहीत और 10678 एकड़ भूमि विकसित की गई, जिनमें से 2671 एकड़ भूमि औद्योगिक इकाइयों को आवंटित की गयी हैं।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में कारखाना अधिनियम में 1591 नई इकाइयों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक महीने 15 कम्पनियों को एलओसी (लेटर ऑफ कम्फर्ट) जारी किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


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