SEMICON India : एक मुस्लिम वैज्ञानिक के Idea ने बदल दी सेमीकंडक्टर की दुनिया, छोटी सी चिप में समाया गीजा का पिरामिड, यहां समझिए क्या होता है सेमीकंडक्टर…
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SEMICON India ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित एक्सपोमार्ट में सेमीकॉन इंडिया-2024 का आखिरकार शुभारंभ हो ही गया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “आज का युग सिलिकॉन डिप्लोमेसी का युग है। हम सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में कई देशों से सहयोग बढ़ा रहे हैं। हम सेमीकंडक्टर से जुड़े ढांचे पर भी फोकस कर रहे हैं। यह थ्री डायमेंशनल है। इसमें सुधारवादी सरकार, बढ़ता मैन्यूफैक्चिंग बेस और तीसरा उभरता बाजार है।“ ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन अपने पाठकों के लिए लेकर आया है सेमीकंडक्टर की विस्तृत जानकारी। इस लेखक को पूरा पढ़ें, समझें और दूसरों को भी शेयर करें ताकि दूसरों को भी सेमीकंडक्टर की पूरी जानकारी मिल सके। आइए-समझते हैं कि क्या है सेमीकंडक्टर ?, इसे क्यों माना जा रहा है भविष्य की क्रांतिकारी तकनीक ?। भारत का इस पर जोर क्यों है।
SEMICON India 1956 की बात है, जब भौतिकी के नोबेल पुरस्कारों का ऐलान हुआ। उस वक्त तीन अमेरिकी वैज्ञानिकों विलियम शॉकली, वॉल्टर ब्रैटन और जॉन बार्डीन को ट्रांजिस्टर के आविष्कार के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, तब जाकर दुनिया को पता चला कि यह ट्रांजिस्टर कितनी बड़ी खोज साबित होने वाली है। जॉन बार्डीन को तो 1972 में एक बार फिर भौतिकी का नोबेल अमेरिकी वैज्ञानिकों लियोन ए कूपर और जॉन रॉबर्ट श्नेफर के साथ मिला। इन तीनों ने सुपरकंडक्टिविटी का क्रांतिकारी सिद्धांत दिया, जिसे बीसीएस थ्योरी भी कहा जाता है और जो 21वीं सदी के लिए क्रांतिकारी चीज मानी जाती है। विलियम शॉकली, वॉल्टर ब्रैटन और जॉन बार्डीन ने बेल लैब में 1947 में ही ट्रांजिस्टर बना लिया था। उस वक्त यह ज्यादा पावर लेता था। बाद में मोहम्मद अटाला नाम के एक इंजीनियर ने सिलिकॉन सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया, जिसे शुरुआत में तो नहीं माना गया, मगर आखिर में दुनिया को उनकी बात माननी पड़ी। आइए-समझते हैं सेमीकंडक्टर की कहानी और उसके बारे में सबकुछ।
सेमीकंडक्टर सोने जैसा खास और सीसे जैसा तुच्छ है
SEMICON India एक सेमीकंडक्टर सोने या तांबे जैसा खास होता है, क्योंकि यह भी पदार्थ के सबसे छोटे कण यानी इलेक्ट्रॉन को अपने से होकर गुजरने देता है। मगर यह सीसे जैसा तुच्छ भी है, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन के प्रवाह पर बंदिशें भी लगाता है। इसे ऐसे समझिए कि किसी सेमीकंडक्टर से बिजली दौड़ती तो है, मगर वह कॉपर या गोल्ड जैसे फुल कंडक्टर की तरह तेजी से नहीं दौड़ पाती है। यह सीसे, रबर या सूखी लकड़ी जैसे कुचालकों से थोड़ा ज्यादा होता है, जो बिजली के प्रवाह पर कुछ अंकुश लगाता है। सेमीकंडक्टर की कंडक्टिविटी तापमान बढ़ने के साथ बढ़ती है। यानी यह कभी कंडक्टर के रूप में और कभी इन्सुलेटर के रूप में काम करता है। आमतौर पर सिलिकॉन , जर्मेनियम और गैलियम आर्सेनाइड से बने सेमीकंडक्टर हार्डवेयर या तो मुक्त प्रवाह की अनुमति देते हैं या इसे पूरी तरह से रोक देते हैं।
कैसे करता है काम सेमीकंडक्टर, कैसे यह बनता है सुपर
SEMICON India सेमीकंडक्टर को हिंदी में अर्धचालक कहा जाता है, जिन्हें इंटीग्रेटेड सर्किट (IC), ट्रांजिस्टर या माइक्रोचिप्स के रूप में जाना जाता है। यह शुद्ध तत्वों जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम या गैलियम आर्सेनाइड जैसे कंपाउंड से बने होते हैं। सेमीकंडक्टर बनाने की डोपिंग प्रक्रिया के दौरान इन शुद्ध तत्वों में थोड़ी मात्रा में अशुद्धियां मिलाई जाती हैं, जिससे उसकी कंडक्टिविटी यानी चालकता में बड़े बदलाव होते हैं। मोहम्मद अटाला मिस्र के वैज्ञानिक थे, जिन्होंने सिलिकॉन के सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।
गीजा के विशाल पिरामिड जितने ट्रांजिस्टर एक चिप में
एक सेमीकंडक्टर चिप में गीजा के महान पिरामिड में लगे सभी पत्थरों जितने ट्रांजिस्टर होते हैं। आज दुनिया भर में रोजाना के इस्तेमाल में 100 अरब से ज्यादा आईसी हैं, जो हमारी आकाशगंगा के किसी एक कोने में बसे तारों की संख्या के बराबर है। इसी सेमीकंडक्टर के बाजार पर नियंत्रण करने के लिए अमेरिका और चीन में होड़ मची हुई है।
सेमीकंडक्टर्स नैनो फैब्रिकेशन सीरीज से बनते हैं
SEMICON India हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे दीवार में लगे प्लग या बैटरी में सेमीकंडक्टर होते हैं। डायोड, चिप्स और ट्रांजिस्टर सभी डिवाइस इन्हीं से बने होते हैं। सेमीकंडक्टर डिवाइस एकदम शुद्ध सिंगल क्रिस्टल सिलिकॉन से बने सब्सट्रैक्ट की सतह पर की जाने वाली नैनोफैब्रिकेशन प्रॉसेस की एक सीरीज में बनते हैं। इन सब्सट्रैक्ट को आमतौर पर वेफर्स के रूप में जाना जाता है।
बेहद सावधानी बरतते हैं सेमीकंडक्टर बनाने के इस प्रॉसेस में
सेमीकंडक्टर बनाने की प्रक्रिया जटिल होती है। इसमें रेत से पहले सिलिकॉन तत्व निकाला जाता है। इसके बाद सबसे पहले वेफर फैब्रिकेशन होता है। जिसमें सिलिकॉन से वेफर तैयार किए जाते हैं। फिर पैटर्न ट्रांसफर होता है। इसके बाद इसकी डोपिंग की जाती है। फिर इसमें डिपॉजिशन, ईचिंग और पैकेजिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह वास्तव में एक आधुनिक चमत्कार और इंजीनियरिंग की उपलब्धि है। इस प्रॉसेस में बेहद सावधानी बरतनी होती है।
चिप बनाने में बादशाहत इन 3 कंपोनेंट से ही मिलती है
SEMICON India सिलिकॉन चिप बनाने में तीन अहम कंपोनेंट होते हैं। पहला-कच्चा माल यानी हार्डवेयर, डिजाइन और फैब्रिकेशन। सेमीकंडक्टर की दुनिया में डिजाइन ऐसा कंपोनेंट है, जिस वजह से कोई देश आगे निकल सकता है। अगर भारत इस क्षमता का इस्तेमाल करने में सक्षम हो तो फिर दुनिया का कोई भी देश उसे पीछे नहीं छोड़ सकता। दरअसल, भारत के पास दुनिया का बड़ा सिलिकॉन भंडार है।
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सेमीकंडक्टर आज की दुनिया में कितना जरूरी है?
सेमीकंडक्टर्स आज हमारे चारों ओर हैं। वे उन कंप्यूटरों और फोन को कंट्रोल करते हैं, जिनका इस्तेमाल हम कारोबार या प्रशासन में करते हैं। जिन फोन, मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटरों का इस्तेमाल हम कारों और विमानों को कंट्रोल करने में करते हैं, वो सेमीकंडक्टर्स पर ही आधारित होते हैं। यहां तक कि ईसीजी या दिमाग को पढ़ने वाली एमआरआई मशीनें और बीमारियों का निदान करने वाली और इलाज करने वाली मशीनों और डिफेंस तकनीक में सेमीकंडक्टर्स छाया हुआ है। आज घरों में टीवी, म्यूजिक सिस्टम, वीडियो गेम, वेब सीरीज देखने में जिन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का हम इस्तेमाल करते हैं, यह आनंद भी हमें एक छोटी सी चिप यानी सेमीकंडक्टर ही दिलाता है।
एक किलोग्राम का मोबाइल 30 मिनट बात करने में ही डिस्चार्ज
SEMICON India सेमीकंडक्टर तकनीक न केवल इन उपकरणों को संभव बनाती है, बल्कि यह उन्हें अधिक कॉम्पैक्ट, ज्यादा सस्ता और अधिक शक्तिशाली भी बनाती है। 1984 में एक मोबाइल फोन का वजन 1 ईंट के बराबर यानी करीब 1 किलो था। कीमत लगभग तब करीब 3.5 लाख रुपए हुआ करती थी। खास बात यह है कि इतने वजनी मोबाइल से महज 30 मिनट तक बात करने में यह डिस्चार्ज हो जाता था। छोटी सी सेमीकंडक्टर चिप की बदौलत ही आज दुनिया में किसी भी मोबाइल का वजन औसतन 150 से 170 ग्राम का होता है।
फाउंड्रीज या फेबलेस फर्म क्या होती हैं?
SEMICON India सेमीकंडक्टर कंपनियां आम तौर पर सेमीकंडक्टर प्रोडॅक्शन में दो मुख्य चरण पर फोकस करती हैं। ये हैं डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग। जो कंपनियां केवल डिजाइन पर फोकस करती हैं, उन्हें फेबलेस फर्म कहा जाता है। वहीं, जो कंपनियां केवल विनिर्माण करती हैं, उन्हें फाउंड्रीज कहा जाता है। सेमीकंडक्टर फर्म जो दोनों काम करती हैं उन्हें इंटीग्रेटेड डिवाइस मैन्युफैक्चरर्स यानी IDM कहा जाता है।
सेमीकंडक्टर 100 बिलियन डॉलर के पार हो जाएगा मार्केट भारत में
SEMICON India फॉर्चून बिजनेस इनसाइट्स के अनुसार, पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर का मार्केट 2024 के आखिर तक 681.05 बिलियन डॉलर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। यह मार्केट तेजी से बढ़ते हुए 2032 तक 2062.59 बिलियन डॉलर हो जाएगा। इस मार्केट में सबसे खास मेमोरी डिवाइसेज, लॉजिक डिवाइसेज और एनालॉग आईसी चिप होती हैं। वहीं, भारत में 2026 तक इसका बाजार 35 बिलियन डॉलर से बढ़कर 63 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। माना जा रहा है कि 2032 तक इसके 100.2 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है।
भारत में हो रहा मंगल ऑर्बिटर मिशन में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल
SEMICON India कार्ल फर्डिनेंड ब्राउन ने 1874 में पहला सेमीकंडक्टर डिवाइस यानी क्रिस्टल डिटेक्टर बनाया था। सेमीकंडक्टर की खोज 19वीं सदी में ही हो गई थी। वहीं, 1940 के दशक में ट्रांजिस्टर का आविष्कार हुआ। 1955 में जापान का पहला ट्रांजिस्टर रेडियो आया। 1959 में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के किल्बी और अमेरिका में फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर के नोयस ने द्विध्रुवीय एकीकृत सर्किट (IC) का आविष्कार किया।
1931 में ‘इलेक्ट्रॉनिक सेमी-कंडक्टर का सिद्धांत’ नाम से दो रिसर्च प्रकाशित हुए। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) बनाई है। इससे बनाए गए सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल मंगल ऑर्बिटर मिशन में किया गया था।
देश का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर पार्क यमुना अथॉरिटी क्षेत्र में बनेगा
SEMICON India यमुना अथॉरिटी क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए जमीन की भी व्यवस्था की गई है। तीन कंपनियों ने अब तक सेमीकंडक्टर पार्क में अपनी इकाई लगाने का प्रस्ताव दिया है। पीएम मोदी ने कार्यक्रम में भाग लेकर यूपी को सेमीकंडक्टर निर्माण का हब बनाने की मुहिम को आगे बढ़ाया। इस मौके पर उन्होंने केंद्र सरकार की इस दिशा में निर्धारित नीति का भी जिक्र किया। पीएम ने कहा कि उन्हें डिजिटल इंडिया मिशन के बारे में पढ़ना चाहिए। सेमीकॉन इंडिया 2024 में 26 देशों के 836 एक्जीबिटर और 50 हजार से अधिक विजिटर भाग ले रहे हैं।
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