FPI outflow India- ट्रंप के एक ऐलान से बाजार में ‘भूचाल’, 10 दिन में ₹18,000 करोड़ लेकर भागे विदेशी, अब आगे क्या?

विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा क्यों निकाल रहे हैं (Why are foreign investors withdrawing money from the Indian market?)

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विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा क्यों निकाल रहे हैं (Why are foreign investors withdrawing money from the Indian market?)

 

मुख्य बिंदु:

  • भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव से शेयर बाजार में भारी गिरावट।

  • विदेशी निवेशकों (FPIs) ने अगस्त के शुरुआती 10 दिनों में ही 18,000 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिकवाली की।

  • ट्रंप द्वारा लगाए गए नए टैरिफ और कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने बिगाड़ा माहौल।

  • इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 1.13 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।

FPI outflow India-  नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ’ वाले डंडे ने भारतीय शेयर बाजार में भूचाल ला दिया है। भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव का डर इस कदर हावी है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) दनादन अपना पैसा निकाल रहे हैं। हालात ये हैं कि अगस्त महीने के शुरुआती 10 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 18,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम निकाल ली है।

FPI outflow India-  इस भारी बिकवाली का सीधा असर बाजार पर दिख रहा है और लगातार छठे हफ्ते सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। निवेशकों के मन में अब एक ही सवाल है – क्या बाजार और गिरेगा?

क्यों मची है बिकवाली की ये होड़?

FPI outflow India-  विदेशी निवेशकों की इस बेरुखी के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन बड़े कारण हैं:

1. ट्रंप टैरिफ का डर: यह बिकवाली की सबसे बड़ी वजह है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही भारत पर 25% टैरिफ लगाया हुआ है। अब रूस से तेल खरीदने को लेकर नाराजगी जताते हुए 25% का अतिरिक्त टैरिफ भी लगा दिया है, जो 27 अगस्त से लागू हो जाएगा। पहले जिस भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक माहौल था, वह अब पूरी तरह से बिगड़ चुका है, जिससे निवेशक घबराए हुए हैं।

2. कमजोर तिमाही नतीजे: बिकवाली की आग में घी का काम भारतीय कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने किया है। कई बड़ी कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

FPI outflow India- ट्रंप के एक ऐलान से बाजार में ‘भूचाल’, 10 दिन में ₹18,000 करोड़ लेकर भागे विदेशी, अब आगे क्या?

3. रुपये में गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी गिरावट भी विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का सबब है। रुपये के कमजोर होने से उनका मुनाफा कम हो जाता है, इसलिए वे अपना निवेश निकालकर सुरक्षित जगहों पर ले जा रहे हैं।

इस साल टूटा बिकवाली का रिकॉर्ड

यह साल 2025 विदेशी निवेशकों के लिहाज से बेहद खराब साबित हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक FPIs भारतीय बाजार से कुल 1.13 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। चिंता की बात यह है कि जितनी बिकवाली पूरे जुलाई महीने (₹17,741 करोड़) में हुई थी, उससे ज्यादा बिकवाली अगस्त के सिर्फ 10 दिनों में हो गई है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले हफ्ते में भी बाजार की चाल इन्हीं फैक्टर्स, महंगाई के आंकड़ों और FPIs के रुख से ही तय होगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

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FPI outflow India- (अस्वीकरण: यह लेख गूगल और अन्य न्यूज वेबसाइट उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।)


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