Nomadic Communities Karnataka Reservation Protest-? “कर्नाटक के खानाबदोश समुदाय का 2 अक्टूबर को दिल्ली मार्च: 1% अलग आरक्षण की मांग!”
Nomadic Communities Karnataka Reservation Protest-?
कर्नाटक के खानाबदोश और अछूत समुदाय दिल्ली में करेंगे विरोध प्रदर्शन
नई दिल्ली: कर्नाटक के सबसे वंचित और ग्राम्य खानाबदोश समुदायों के हजारों सदस्य 2 अक्टूबर को दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे। इस प्रदर्शन का उद्देश्य कर्नाटक सरकार द्वारा लागू हाल की आंतरिक आरक्षण नीति में 1% अलग कोटा लागू करने की मांग है।
यह आयोजन कर्नाटक की अस्पृश्य खानाबदोश समुदायों के महासंघ (Confederation of Untouchable Nomadic Communities of Karnataka) द्वारा किया जा रहा है, जो कुल 59 ऐसे समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनकी पारंपरिक आजीविका अक्सर भीख मांगने, सड़क कलाओं और घुमंतू श्रम पर आधारित है।
विवाद का केंद्र: कर्नाटक सरकार की आंतरिक आरक्षण नीति
19 अगस्त 2025 को कर्नाटक सरकार ने अपनी आंतरिक आरक्षण नीति लागू की, जिसमें एससी कोटा को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया:
-
श्रेणी ए (एससी लेफ्ट): 6%
-
श्रेणी बी (एससी राइट): 6%
-
श्रेणी सी (स्पर्शयोग्य एससी): 5%
खानाबदोश समुदायों को श्रेणी सी (5%) में रखा गया, जबकि जस्टिस नागमोहन दास समिति की सिफारिश थी कि उन्हें श्रेणी ए में 1% अलग आरक्षण दिया जाए, जिससे सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक प्रवेश में उनकी प्राथमिकता सुनिश्चित हो।
समुदाय का कहना है कि उन्हें श्रेणी सी में रखकर प्रभावी रूप से उनके वैध हिस्से और प्राथमिकता से वंचित किया गया, और अब उन्हें बड़े और अधिक प्रभावशाली समूहों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है।
गांधी जयंती पर दिल्ली मार्च: उद्देश्य और रणनीति
महासंघ ने इस विरोध को “राष्ट्रीय स्तर पर अंतिम अपील” करार दिया है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा, और इसमें समुदाय के हजारों सदस्य शामिल होंगे।
प्रतिनिधिमंडल ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) कार्यालय पर राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में समुदाय के 1% अलग आरक्षण की सिफारिश लागू करने में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया जाएगा।
समुदाय की दलील और सामाजिक प्रभाव
समुदाय का तर्क है कि उनकी आजीविका और सामाजिक स्थिति अभी भी कमजोर है। खानाबदोश और अछूत समूहों के सदस्यों के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करना समानता और सामाजिक न्याय का मामला है।
महासंघ के अध्यक्ष ने कहा:
“यह मार्च हमारी आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का प्रयास है। हम अपनी स्थिति सुधारने और 1% आरक्षण को लागू कराने के लिए शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक कदम उठा रहे हैं।”
राज्य सरकार और राजनीतिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार पर महासंघ का आरोप है कि उसने समुदाय की मांगों को नजरअंदाज किया और उनके लिए अलग आरक्षण को लागू नहीं किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन कर्नाटक में अनुसूचित जाति श्रेणी के भीतर आरक्षण की लड़ाई का नवीनतम अध्याय है और राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे देखा जाएगा।
शांतिपूर्ण मार्च और विधिक प्रक्रिया
महासंघ ने पुष्टि की है कि प्रदर्शन पूर्णतः शांतिपूर्ण रहेगा। पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर मार्च का आयोजन किया जाएगा।
कर्नाटक के खानाबदोश समुदायों के प्रतिनिधि, ज्ञापन सौंपने के बाद, राष्ट्रीय मीडिया और लोकल संगठनों के माध्यम से अपनी मांगों को उजागर करेंगे।
JOIN ON WHATSAPP
निष्कर्ष
कर्नाटक के खानाबदोश और अछूत समुदायों की यह पहल समाज में समान अवसर और न्याय के महत्व को उजागर करती है। 2 अक्टूबर का यह मार्च न केवल 1% आरक्षण लागू करने की मांग करेगा, बल्कि यह वंचित और ग्रामीण समुदायों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने का अवसर भी है।
इस आंदोलन से स्पष्ट होता है कि भारत में अनुसूचित जातियों और घुमंतू समुदायों के लिए समान अधिकार और सरकारी समर्थन की आवश्यकता अभी भी गंभीर मुद्दा है।
#KarnatakaNews #NomadicCommunitiesProtest #1PercentReservation #SCSTAct #DelhiMarch2025 #SocialJusticeIndia #ReservationProtest #ViralNewsIndia #UntouchableCommunities #onlinebulletin










