Dalit Adivasi Atrocities in India- “जब CJI तक सुरक्षित नहीं रहे, तो आम दलित-आदिवासी का क्या होगा?” – परिवर्तन संस्था भारत का राष्ट्रपति के नाम खुला पत्र देशभर में मचा रहा भूचाल
CJI BR Gavai Shoe Attack Incident
Dalit Adivasi Atrocities in India-

Dalit Adivasi Atrocities in India- CJI BR Gavai Shoe Attack Incident
Dalit Adivasi Atrocities in India- देश में दलित-आदिवासी समाज की सुरक्षा पर बड़ा सवाल — राष्ट्रपति को लिखा गया पत्र बना राष्ट्रीय बहस का विषय
Dalit Adivasi Atrocities in India- नई दिल्ली।
Dalit Adivasi Atrocities in India- देशभर में दलित और आदिवासी समाज पर बढ़ रहे अत्याचारों के खिलाफ परिवर्तन संस्था भारत ने महामहिम राष्ट्रपति महोदय को संबोधित एक भावनात्मक मगर तीखा पत्र भेजा है, जिसने पूरे देश में इंसाफ और संवैधानिक मर्यादा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
Dalit Adivasi Atrocities in India- इस पत्र में संगठन के संभाग अध्यक्ष संदीप डागर ने लिखा है कि “आज हालत यह हो गई है कि अगर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) तक अदालत में सुरक्षित नहीं हैं, तो एक गरीब दलित-आदिवासी कैसे सुरक्षित रह सकता है?”
CJI BR Gavai पर जूता फेंके जाने का मामला बना प्रतीकात्मक प्रश्न
Dalit Adivasi Atrocities in India- पत्र में उल्लेख किया गया कि हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति बी. आर. गवई पर अदालत में एक वकील द्वारा खुलेआम जूता फेंका गया और बाद में उस आरोपी ने इसे मीडिया के सामने सही करार दिया।
“जब संविधान के सबसे बड़े रक्षक को ही अपमान झेलना पड़ रहा है, तो फिर समाज के सबसे वंचित तबके की क्या स्थिति होगी?” – परिवर्तन संस्था भारत
हरियाणा में IPS वाई पूरण कुमार की संदिग्ध आत्महत्या — जातिगत उत्पीड़न का गंभीर आरोप
Dalit Adivasi Atrocities in India- इस पत्र में दूसरा बड़ा मुद्दा IPS वाई पूरण कुमार का है, जिन्होंने कथित रूप से विभागीय अधिकारियों द्वारा जातिगत उत्पीड़न के चलते आत्महत्या कर ली। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने के कारण सात दिन तक अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया गया।
उत्तर प्रदेश में हरिओम वाल्मीकि को नग्न कर पीट-पीटकर मार डाला गया
तीसरी घटना जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया — बरेली के हरिओम वाल्मीकि को सड़क पर कपड़े उतरवाकर लाठियों से इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गई। विडंबना यह कि आरोपी खुले घूम रहे हैं।
“क्या दलित-आदिवासी इस देश में दोयम दर्जे के नागरिक हैं?”
Dalit Adivasi Atrocities in India- परिवर्तन संस्था भारत ने पत्र में साफ लिखा —
“ऐसा प्रतीत होता है कि दलित-आदिवासी इस देश में आज भी दूसरे दर्जे के नागरिक हैं, चाहे वे कितने भी बड़े पद पर क्यों न पहुंच जाएं।”
राष्ट्रपति से चार बड़ी मांगें
| मांग | विवरण |
|---|---|
| 1 | दोषियों पर तत्काल कठोर कार्यवाही |
| 2 | जातिगत उत्पीड़न मामलों के लिए विशेष न्यायिक सेल |
| 3 | SC/ST Atrocity कानून को और अधिक कड़ा बनाया जाए |
| 4 | हर जिले में ‘दलित सुरक्षा आयोग’ की स्थापना |
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सड़क से संसद तक न्याय की आवाज उठाने की तैयारी
Dalit Adivasi Atrocities in India- ज्ञापन सौंपते समय संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारी सूरज डागर, दिलीप कुमार, संदीप डागर, अमर, अनूप कुमार, राधे घेंघट, राजीव कुमार, गौरव, विशाल हल्दिया, विक्की, ग्यासी हल्दिया, राहुल, दौलत और मनीष उपस्थित रहे।
? निष्कर्ष
Dalit Adivasi Atrocities in India- यह सिर्फ एक ज्ञापन नहीं — यह भारत के संविधान, न्याय और समानता के मूल प्रश्नों पर सीधा प्रहार है। यदि अब भी तंत्र नहीं जागा, तो आने वाले समय में यह आवाज एक राष्ट्रीय जनांदोलन का रूप ले सकती है।
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