Manual Scavenging in India 2026: सागर में गूंजी बाबासाहेब की हुंकार: “गटर में मौतें बंद करो वरना…” सफाई कर्मचारियों ने सरकार को दी बड़ी चेतावनी!
Why are sanitation workers still dying in Indian sewers despite the 2013 Act?

Manual Scavenging in India 2026:

Why are sanitation workers still dying in Indian sewers despite the 2013 Act?
Manual Scavenging in India 2026: सागर, मध्य प्रदेश: 14 अप्रैल 2026 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक संकल्प दिवस के रूप में दर्ज हो गया। जहाँ पूरा देश बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती के जश्न में डूबा था, वहीं मध्य प्रदेश के सागर (भगवानगंज) में ‘सफाई कर्मचारी आंदोलन’ ने उत्सव के साथ-साथ एक ऐसे दर्द को आवाज दी, जिसे आधुनिक भारत अक्सर नजरअंदाज कर देता है।
Manual Scavenging in India 2026: जश्न नहीं, यह हक की लड़ाई है!
सफाई कर्मचारी आंदोलन, मध्य प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल फूल-मालाएं चढ़ाई गईं, बल्कि उन बेड़ियों को तोड़ने का संकल्प लिया गया जो आज भी हजारों परिवारों को “मैला ढोने” और “सीवर की जहरीली गैस” के साये में जीने को मजबूर कर रही हैं।
राज्य संयोजक पवन वाल्मीकि के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों सफाई कर्मचारियों, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आंखों में बाबासाहेब के लिए सम्मान तो था, लेकिन व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश भी था।

Manual Scavenging in India 2026: सीवर में मौतें: ‘मानवता पर एक काला कलंक’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पवन वाल्मीकि ने रोंगटे खड़े कर देने वाला सच सामने रखा। उन्होंने कहा, “बाबासाहेब ने हमें संविधान दिया ताकि हम गरिमा के साथ जी सकें, लेकिन आज भी हमारे भाई बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जहरीले गटर में उतरने को मजबूर हैं। ‘Prohibition of Employment as Manual Scavengers Act, 2013’ होने के बावजूद ये मौतें हत्याएं हैं।”
उन्होंने सीधे तौर पर मांग की कि:
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सीवर सफाई का 100% मशीनीकरण किया जाए।
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गटर में होने वाली हर मौत के लिए दोषी ठेकेदारों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
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सरकार कागजी दावों के बजाय जमीन पर सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित करे।
Manual Scavenging in India 2026: जातिगत सफाई प्रथा: मानसिक गुलामी की जंजीरें
भारत के डिजिटल इंडिया और 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनने के दावों के बीच, पवन वाल्मीकि ने एक कड़वा सवाल दागा— “सफाई का काम केवल एक खास जाति के हिस्से ही क्यों?”
उन्होंने बाबासाहेब के उद्धरण को याद दिलाते हुए कहा कि गुलामी की सबसे बड़ी जंजीर ‘मानसिक गुलामी’ है। जब तक सफाई के पेशे को जन्म और जाति से जोड़कर देखा जाएगा, तब तक भारत सही मायनों में आजाद नहीं कहलाएगा। सफाई का काम ठेका प्रथा से मुक्त होना चाहिए और इसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी होनी चाहिए ताकि गरिमा बनी रहे।
Manual Scavenging in India 2026: हिंदू कोड बिल और महिला अधिकारों की गूंज
इस आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को एक नई ऊर्जा दी। ज्योति वाल्मीकि ने बाबासाहेब के उस पहलू पर बात की जिसे अक्सर कमतर आंका जाता है— ‘महिला अधिकार’।
ज्योति वाल्मीकि ने कहा, “आज जो महिलाएं संपत्ति में हक मांग रही हैं, तलाक या गोद लेने का अधिकार रखती हैं, वह डॉ. अम्बेडकर के ‘हिंदू कोड बिल’ की देन है। बाबासाहेब ने केवल दलितों के लिए नहीं, बल्कि पूरी नारी जाति के लिए संघर्ष किया था।”
सपना वाल्मीकि, आरती वाल्मीकि और तमन्ना करोसिया ने भी मंच से हुंकार भरी कि शिक्षित बनकर ही सफाई कर्मचारी समाज अपनी अगली पीढ़ी को इन ‘खतरनाक गड्ढों’ से बाहर निकाल सकता है।
Manual Scavenging in India 2026: संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन: एक नया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान केवल भाषण ही नहीं हुए, बल्कि क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता शंकर गंगा पारीक और श्री राम करोसिया की उपस्थिति में सभी ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया। यह केवल शब्दों का दोहराव नहीं था, बल्कि समता, बंधुत्व और न्याय के रास्ते पर चलने का एक जीवित वादा था।
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निष्कर्ष: Manual Scavenging in India 2026: क्या 2026 में खत्म होगा यह भेदभाव?
सागर का यह आंदोलन एक बड़ा संकेत है कि अब सफाई कर्मचारी समाज चुप बैठने वाला नहीं है। बाबासाहेब का नारा “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 90 साल पहले था।
जब तक एक भी इंसान को अपनी आजीविका के लिए दूसरे का मैला साफ करना पड़ेगा या सीवर की जहरीली गैस में दम तोड़ना पड़ेगा, तब तक बाबासाहेब का ‘समानता का सपना’ अधूरा ही रहेगा। सागर से उठी यह आवाज अब भोपाल और दिल्ली के गलियारों तक पहुंचने के लिए तैयार है।
लेखक की राय:
सफाई कर्मचारी आंदोलन का यह प्रयास सराहनीय है। सरकार को चाहिए कि वह मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट को सख्ती से लागू करे और सफाई कर्मचारियों के पुनर्वास के लिए ठोस योजनाएं बनाए।
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Disclaimer: This article is based on the event information provided for April 14, 2026. It reflects the social and legal context of manual scavenging laws and Dalit rights movements in India.













