Advocate Chandrashekhar Azad : मायावती की दलित पॉलिटिक्स के लिए चुनौती बने चंद्रशेखर आज़ाद? उपचुनाव से परहेज करने वाली बसपा ने उतारे प्रत्याशी….

Advocate Chandrashekhar Azad बसपा ने मुजफ्फरनगर की मीरपुर विधानसभा सीट से शाह आलम को उपचुनाव का टिकट दिया है। शाह आलम नगीना सांसद एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी से जुड़े रहे हैं। मायावती ने आजाद के करीबी को तोड़ लिया है। दरअसल, एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद ने धीरे-धीरे दलित समाज में अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है।

Advocate Chandrashekhar Azad उत्तरर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक समय उपचुनावों से परहेज करने वाली बसपा ने इस बार गजब की तेजी दिखाई है। पार्टी ने अपने उम्मीादवारों के नाम का ऐलान करना भी शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बसपा ने मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से शाह आलम को अपना प्रत्याशशी बनाया है। शाह आलम चंद्रेशखर आजाद के करीबी माने जो हैं। वह उनकी आजाद समाज पार्टी से जुड़े रहे हैं।

Advocate Chandrashekhar Azad माना जा रहा है कि मायावती की दलित पॉलिटिक्सड के लिए चुनौती बन रहे चंद्रशेखर आजाद को बसपा ने चोट पहुंचाने की कोशिश की है।आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 में बसपा के हाथ एक भी सीट नहीं आई। दूसरी तरफ, चंद्रशेखर आजाद नगीना सीट से जीतकर संसद पहुंच चुके हैं।

एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद ने जब बिजनौर की नगीना सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, तब मायावती ने अपना पूरा ध्या न इस सीट पर फोकस कर लिया था। यह सीट बसपा का गढ़ मानी जाती थी। मायावती ने नगीना लोकसभा क्षेत्र में अपने भतीजे आकाश आनंद को स्टाबर प्रचारक बनाकर भेजा।

आकाश ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत ही यहां से की। मायावती भी एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद के विरोध में सभा करने नगीना आईं पर सारे प्रयास विफल गए और आजाद समाज पार्टी के मुखिया जीतने में सफल हो गए।

एडवोकेट आज़ाद को 51.19 तो बसपा प्रत्याशी को सिर्फ 1.33% वोट

मायावती की तरह ही एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद पिछले कुछ सालों से दलित और मुस्लिमों की आवाज लगातार उठा रहे हैं। एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद ने मीरपुर सीट से जाहिद हुसैन को अपना प्रत्याउशी बनाया है। गौरतलब है कि मीरपुर के रालोद विधायक चंदन चौहान बिजनौर लोकसभा चुनाव में जीतकर सांसद बन चुके हैं। इसलिए यह सीट रिक्तल हो गई है।

यूपी की राजनीति में जिस तेजी के साथ एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद उभरे हैं, उतनी ही तेजी से मायावती का राजनीतिक करियर ढलान पर है। 2022 विधानसभा चुनाव में बसपा के खाते में सिर्फ एक विधायक आया। लोकसभा चुनाव 2024 में तो एक भी सीट नहीं मिली। जिस नगीना सीट से एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद जीते हैं, वहां उनको 51.19 फीसदी वोट मिले, जबकि बसपा के उम्मी दवार सुरेंद्र पाल के खाते में सिर्फ 1.33 फीसदी ही वोट पड़े थे।

एडवोकेट आज़ाद की पूरे दलित समाज पर नजर

इस उपचुनाव में मायावती और एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद की रणनीति में एक कॉमन बात है। दोनों ही नेताओं ने अपने दम पर उपचुनाव लड़ने का फैसला लिया है। बसपा और आजाद समाज पार्टी दोनों ही दल किसी अन्यु पार्टी से गठबंधन नहीं करेंगे। एक समय था जब मायावती को पूरे दलित समाज का समर्थन प्राप्ता था। अब जैसे-जैसे बसपा का प्रभाव कम होता जा रहा है, मायावती के साथ सिर्फ उनकी जाटव बिरादरी के ही लोग रह गए हैं। एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद भी जाटव हैं पर उनको अब गैर जाटव वोटरों का सहारा मिलने लगा है।

? सोशल मीडिया

फेसबुक पेज में जुड़ने के लिए क्लिक करें

https://www.facebook.com/onlinebulletindotin

व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें

https://chat.whatsapp.com/Cj1zs5ocireHsUffFGTSld

 

ONLINE bulletin dot ।n में प्रतिदिन सरकारी नौकरी, सरकारी योजनाएं, परीक्षा पाठ्यक्रम, समय सारिणी, परीक्षा परिणाम, सम-सामयिक विषयों और कई अन्य के लिए onlinebulletin.in का अनुसरण करते रहें.

 

? अगर आपका कोई भाई, दोस्त या रिलेटिव ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन में प्रकाशित किए जाने वाले सरकारी भर्तियों के लिए एलिजिबल है तो उन तक onlinebulletin.in को जरूर पहुंचाएं।


Back to top button