Ambedkar statue damaged- अंबेडकर की मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने पर भड़के चंद्रशेखर, कहा- जातिवाद केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि एक जिंदा चुनौती है

 

Ambedkar statue damaged-

Ambedkar statue damaged- हाल ही में अमृतसर के सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के पास स्थित हेरिटेज स्ट्रीट पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने और संविधान की प्रति जलाने की घटना ने देश में एक बार फिर जातिवाद की कड़ी मानसिकता को उजागर किया है। इस घटना पर आजाद समाज पार्टी के सांसद और नगीना से विधायक चंद्रशेखर आजाद ने कड़ी आपत्ति जताई और सरकार से दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की।

Ambedkar statue damaged- चंद्रशेखर आजाद ने इसे केवल एक प्रतीकात्मक हमला नहीं, बल्कि समाज के दबे-कुचले वर्गों को उनके अधिकारों और सम्मान से वंचित रखने की घृणित मानसिकता का प्रतीक करार दिया। उन्होंने इस घटना को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि जातिवाद अब सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक जिंदा चुनौती बनकर सामने आ रही है, जिसका सामना समाज को एकजुट होकर करना होगा।

जातिवादी मानसिकता का नंगा सच

चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना के संदर्भ में कहा कि “जातिवादी ताकतें, जो सदियों से अपने विशेषाधिकारों को बनाए रखने के लिए षडयंत्र करती रही हैं, आज भी बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा स्थापित समानता और न्याय की व्यवस्था से डरती हैं।” उनका मानना था कि इस प्रकार की घटनाएं यह साबित करती हैं कि जातिवाद की मानसिकता अब भी कुछ वर्गों में विद्यमान है, जो संविधान द्वारा दिए गए एकता और बंधुत्व के संदेश को अस्वीकार करते हैं।

चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि यह घटना संविधान के उन मूल्यों पर हमला है, जो भारत को जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर एक समान और न्यायपूर्ण समाज बनाने की दिशा में प्रेरित करते हैं। उन्होंने यह चेतावनी दी कि संविधान पर हमले करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि “समाज को यह संदेश मिले कि संविधान की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों को कानून का सामना करना पड़ेगा।”

संविधान और बाबा साहेब के आदर्शों की रक्षा

चंद्रशेखर आजाद ने संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशवासियों को याद दिलाया कि “यह समय है जब हम बाबा साहेब अंबेडकर के सपनों के भारत को साकार करें।” उन्होंने कहा कि जातिवाद का यह चुनौतीपूर्ण रूप समाज के सामने है, और इसके खिलाफ लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि समाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी जरूरी है।

उन्होंने संविधान की रक्षा को हर नागरिक का कर्तव्य बताया और कहा कि यह सामूहिक दायित्व है कि हम संविधान के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद समाज को एकजुट होकर जातिवाद और नफरत की जड़ों को उखाड़ फेंकने के लिए कदम उठाने होंगे।

दोषियों पर त्वरित कार्रवाई की मांग

चंद्रशेखर आजाद ने पंजाब पुलिस से इस मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई करने की अपील की, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि “संविधान और बाबा साहेब के आदर्शों के खिलाफ जाने वाले किसी भी व्यक्ति को सजा से बचने का कोई मौका नहीं मिलेगा।” उन्होंने इस घटना को समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में लिया और कहा कि अब समय आ गया है कि हम जातिवाद और नफरत को जड़ से समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प लें।

निष्कर्ष

यह घटना सिर्फ एक मूर्ति को नुकसान पहुँचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की जातिवादी मानसिकता और उसके द्वारा किए गए प्रयासों की ओर इशारा करती है। जातिवाद केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक जीवित चुनौती है, जिसका सामना करने के लिए हमें एकजुट होकर बाबा साहेब अंबेडकर के आदर्शों को मजबूती से अपनाना होगा। चंद्रशेखर आजाद की अपील ने यह साबित कर दिया है कि संविधान और उसके मूल्यों की रक्षा के लिए हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह जातिवाद के खिलाफ संघर्ष करे और समाज को समानता और बंधुत्व की दिशा में आगे बढ़ाए।

 

“अंबेडकर की मूर्ति क्षतिग्रस्त करने पर भड़के चंद्रशेखर आजाद, जातिवाद की जिंदा चुनौती का दिया अलर्ट”


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