Amroha Shadi Controversy- “मंडप से उठाकर ले गए दुल्हन!”
Amroha Shadi Controversy- ?
? एक ओर शहनाई बज रही थी, दूसरी ओर मंडप से उठा ली गई दुल्हन…
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक शादी समारोह उस वक्त मातम में बदल गया, जब मंडप से ही दुल्हन को उठाकर सरकारी अफसर ले गए। दुल्हन बालिग थी या नाबालिग, इसका फैसला कोर्ट करेगा, लेकिन परिवार के मुताबिक ये पूरा मामला सिर्फ रिश्वत ना देने की वजह से हुआ।
घटना ने पूरे प्रदेश में प्रशासनिक संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
? मंडप सजा था, बारात आई थी… लेकिन दुल्हन उठ गई
Amroha Shadi Controversy- ? 5 मार्च 2025 को अमरोहा के हसनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में किसान की बहन की शादी हो रही थी। बारात घर पहुंच चुकी थी, रस्में शुरू हो चुकी थीं और मंडप भी सजा था। तभी जिला प्रोबेशन अधिकारी के निर्देश पर आठ सरकारी कर्मचारी वहां पहुंचे और अचानक कहने लगे कि “दुल्हन नाबालिग है, शादी रोकी जाती है!”
परिवार का कहना है कि वे घबरा गए, इसके बाद परिवार वालों ने आरोप लगाते हुए कहा कि फिर असली ड्रामा शुरू हुआ — अधिकारियों ने 50,000 रुपये रिश्वत की मांग की।
? “रिश्वत दो वरना जेल भेज देंगे” — किसान का आरोप
किसान का आरोप है कि अधिकारियों ने साफ कहा,
“अगर शादी करनी है तो 50 हजार दो, नहीं तो लड़की को उठा ले जाएंगे और तुम्हारे परिवार को जेल में डाल देंगे।”
Amroha Shadi Controversy- ? जब परिवार ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया, तो सरकारी कर्मचारी दुल्हन को मंडप से ही उठाकर वन स्टॉप सेंटर ले गए, वो भी बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के।
⚖️ कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी? कोर्ट ने लिया संज्ञान
परिवार का आरोप है कि लड़की को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किए बिना ही सीधे वन स्टॉप सेंटर भेजा गया। बाद में लड़की तो लौट आई, लेकिन शादी टूट चुकी थी, बारात बिना दुल्हन के लौट चुकी थी।
इस पूरी घटना को लेकर परिवार ने जब पुलिस से गुहार लगाई, तो वहां से भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः किसान ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमपाल सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम को जांच के आदेश दिए हैं, और 5 मई 2025 तक रिपोर्ट मांगी है।

? “बदनामी हो जाएगी साहब!” — गिड़गिड़ाता रहा परिवार
परिवार ने अफसरों से बार-बार कहा कि लड़की बालिग है, शादी में कोई अवैध बात नहीं है। “बदनामी हो जाएगी साहब, हमारी इज्जत मत लीजिए” — ये गुहार लगाते रहे लेकिन अधिकारी टस से मस नहीं हुए।
लड़की और परिवार इस घटना के बाद गहरे सदमे में हैं और सामाजिक रूप से भी टूट चुके हैं।
? प्रशासनिक भ्रष्टाचार या बाल विवाह की सच्चाई?
अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई लड़की नाबालिग थी? अगर थी, तो कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ?
और अगर अधिकारियों की मंशा रिश्वत वसूलने की थी, तो यह बेहद शर्मनाक और दंडनीय कृत्य है।
?⚖️ अब क्या होगा आगे?
अब पूरे जिले की निगाहें डीएम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो प्रोबेशन विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
ये केस अब केवल एक शादी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों से जुड़ा मसला बन चुका है।

? निष्कर्ष: शादी की खुशियों में कड़वाहट और अफसरशाही का डर
अमरोहा की यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, हजारों आम नागरिकों के मन में बैठे डर की तस्वीर है। जब शादी जैसा पवित्र अवसर भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने लगे, तो समाज में भरोसा कैसे कायम रहेगा?
अब ये देखना बाकी है कि 5 मई को डीएम की रिपोर्ट क्या कहती है, और क्या उस रिपोर्ट के बाद दोषियों को सज़ा मिलेगी — या फिर ये मामला भी एक और ‘रिपोर्ट पेंडिंग’ बनकर रह जाएगा?

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