BALAGHAT DEODONGRI STONE SCULPTURES- बालाघाट की श्रापित बारात: गोंड राजाओं के साम्राज्य की रहस्यमयी कहानी!
BALAGHAT DEODONGRI STONE SCULPTURES-

BALAGHAT DEODONGRI STONE SCULPTURES- क्या आपने कभी ऐसी बारात के बारे में सुना है जो पत्थर में तब्दील हो गई? मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्थित देवडोंगरी एक ऐसा रहस्यमयी स्थल है, जहां घोड़े पर सवार दूल्हा, पालकी में बैठी दुल्हन, हाथी, घोड़े, ढोल-शहनाई वादकों सहित पूरी बारात पत्थर की मूर्तियों में बदल गई। यह अनोखा और रहस्यमयी स्थान इतिहास, आस्था और पौराणिक कथाओं का संगम है।
देवडोंगरी: रहस्यों से भरा ऐतिहासिक स्थल
BALAGHAT DEODONGRI STONE SCULPTURES- बालाघाट मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित देवडोंगरी गोंड राजाओं के काल से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थल है। घने जंगलों के बीच 18 सौ फीट की ऊंचाई पर स्थित इस स्थान पर 53 पाषाण प्रतिमाएं मौजूद हैं, जो रहस्यमयी तरीके से एक पूरी बारात का दृश्य प्रस्तुत करती हैं। यह स्थल बालाघाट-नैनपुर मार्ग पर ग्राम सोनखार के समीप स्थित है।
कैसे श्रापित हुई बारात?
स्थानीय कथाओं के अनुसार, इस क्षेत्र में मामा-भांजे की एक पौराणिक कथा प्रचलित है। मान्यता है कि एक समय मामा की शादी हो रही थी और भांजे ने पूरी तैयारी की थी। लेकिन जब बारात निकली, तो मामा ने अपने भांजे को ही निमंत्रण नहीं दिया। इससे क्रोधित होकर भांजे ने पूरी बारात को श्राप दे दिया और सभी बाराती पत्थर की मूर्तियों में बदल गए।

स्थानीय मान्यताएँ और आस्था
- ऐसा माना जाता है कि जब इस क्षेत्र में सूखा पड़ता था, तो ग्रामीण यहां आकर पूजा-अर्चना करते थे, जिसके बाद बारिश होने लगती थी।
- श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत यहां जरूर पूरी होती है।
गोंड राजाओं की ऐतिहासिक धरोहर
पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह स्थल गोंड साम्राज्य का एक हिस्सा था। इस क्षेत्र में कभी गोंड राजाओं का शासन हुआ करता था, और यही कारण है कि यहां कई पुरातात्विक अवशेष देखने को मिलते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र के शासक सदा-भदा थे और उनकी बारात ही श्रापित होकर पत्थर में तब्दील हो गई।
यहाँ की अनोखी पाषाण प्रतिमाएं
- यहाँ स्थित 53 प्रतिमाएँ गोंड कालीन हैं।
- मूर्तियों में घुड़सवार योद्धा, पालकी में बैठी दुल्हन, हाथी, ढोल-नगाड़े और बाराती नजर आते हैं।
- हर मूर्ति का शीर्ष छत्र से ढका हुआ है, जिससे पता चलता है कि वे राजसी परिवार से जुड़े थे।
- पीले पत्थर पर बनी ये मूर्तियां “भदिया सदा” के नाम से जानी जाती हैं।

रास्ते में मिलती हैं ये चुनौतियाँ
यह ऐतिहासिक स्थल आज भी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। यहाँ तक पहुँचने के लिए 3 किमी तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जिसमें ऊँची-नीची पहाड़ियाँ और घने जंगल आते हैं। इस वजह से पर्यटकों की संख्या बहुत कम है। जंगली जानवरों का खतरा भी यहाँ बना रहता है।
सरकार और प्रशासन से उम्मीदें
स्थानीय लोग लगातार इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की माँग कर रहे हैं। यदि सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएँ मुहैया कराई जाएं, तो यह जगह एक बेहतरीन पर्यटन स्थल बन सकती है।
क्या आप इस रहस्यमयी बारात को देखना चाहेंगे?
अगर आप इतिहास, रहस्य और रोमांच के शौकीन हैं, तो देवडोंगरी की श्रापित बारात जरूर देखें। यह स्थान न सिर्फ पौराणिक कथाओं से जुड़ा है, बल्कि पुरातत्व प्रेमियों के लिए भी बेहद खास है।

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