Literacy Assessment Program:? “75 साल की मां और बेटी ने साथ दी परीक्षा! बिलासपुर में ‘उल्लास’ ने रच दिया इतिहास ??”
बिलासपुर उल्लास साक्षरता आकलन परीक्षा में महिलाओं की भागीदारी

Literacy Assessment Program:?

Literacy Assessment Program:? बिलासपुर उल्लास साक्षरता आकलन परीक्षा में महिलाओं की भागीदारी
Literacy Assessment Program:? ? बिलासपुर में साक्षरता का महाकुंभ—40 हजार से ज्यादा लोगों ने रचा इतिहास
Literacy Assessment Program:? छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने पूरे राज्य ही नहीं बल्कि देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ‘उल्लास’ योजना के तहत आयोजित साक्षरता आकलन परीक्षा में 40,777 से अधिक असाक्षरों ने भाग लेकर एक नया इतिहास रच दिया।
सबसे खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं अधिक रही—जो समाज में बदलती सोच और जागरूकता का स्पष्ट संकेत है।
? 961 परीक्षा केंद्रों पर दिखा अभूतपूर्व उत्साह
जिले के चारों विकासखंड—बिलासपुर, बेलतरा रोड, मस्तूरी और कोटा—सहित 961 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की गई। इतना बड़ा आयोजन अपने आप में एक मिसाल है।
परीक्षा में:
- ? 10,943 पुरुष
- ? 29,822 महिलाएं
ने हिस्सा लिया। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि अब ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में भी शिक्षा को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।
Literacy Assessment Program:? ?? मां-बेटी, सास-बहू और तीन पीढ़ियां—जब शिक्षा बनी उत्सव
इस परीक्षा का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पहलू था—संबंधों का साथ में सीखने का सफर।
- 75 वर्षीय कौशल्या और उनकी 36 वर्षीय बेटी पुष्पा सूर्यवंशी ने एक साथ परीक्षा दी
- सास-बहू, ननद-भौजाई ने मिलकर भाग लिया
- तीन पीढ़ियों के लोग एक साथ परीक्षा केंद्र पहुंचे
- नवविवाहित दंपति और बुजुर्ग पति-पत्नी भी पीछे नहीं रहे
यह दृश्य किसी फिल्म से कम नहीं था—जहां शिक्षा एक उत्सव बन गई।
? गोद में बच्चा और हाथ में कलम—महिलाओं का जज्बा
कई महिलाएं अपने दूधमुंहे बच्चों के साथ परीक्षा देने पहुंचीं। यह बताता है कि अगर इच्छा हो, तो कोई भी बाधा शिक्षा के रास्ते में नहीं आ सकती।
स्व-सहायता समूह की महिलाएं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और रसोइया बहनों की भागीदारी ने इस अभियान को और मजबूत बनाया।
Literacy Assessment Program:? ? केंद्रीय जेल बना प्रेरणा का केंद्र
केंद्रीय जेल बिलासपुर में भी इस परीक्षा का आयोजन किया गया, जहां:
- 100 पुरुष बंदी
- 33 महिला बंदी
ने परीक्षा दी।
एक बंदी ने कहा—
? “साक्षरता ने हमें नई जिंदगी दी।”
यह उदाहरण बताता है कि शिक्षा केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन को बदलने का माध्यम भी है।
? क्या सिखाया गया ‘उल्लास’ केंद्रों में?
‘उल्लास’ योजना के तहत शिक्षार्थियों को केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि जीवन के लिए जरूरी कई कौशल सिखाए गए:
- ✍️ स्थानीय भाषा में पढ़ना और लिखना
- ➗ गणितीय आधार
- ? डिजिटल साक्षरता
- ? जीवन उपयोगी ज्ञान
यही कारण है कि यह योजना केवल साक्षरता तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र विकास का माध्यम बन गई है।
Literacy Assessment Program:? ? 20% बढ़ी साक्षरता दर—सरकार भी हुई प्रभावित
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, इस योजना के चलते जिले में साक्षरता दर में 20% की वृद्धि हुई है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे राज्य सरकार ने भी सराहा है।
?️ प्रशासन की मजबूत तैयारी
इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां कीं:
- सभी केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं
- केंद्राध्यक्ष और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई
- ब्लॉक और ग्राम स्तर पर समन्वय समितियां सक्रिय रहीं
- निरीक्षण दलों द्वारा लगातार निगरानी की गई
जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा:
? “उल्लास से बिलासपुर पूर्ण साक्षर जिला बनेगा। 40 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी प्रेरणादायक है।”
? ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा भागीदारी
कोटा विकासखंड और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग परीक्षा देने पहुंचे। खासकर आदिवासी क्षेत्रों की भागीदारी ने यह साबित किया कि अब शिक्षा हर वर्ग तक पहुंच रही है।
Literacy Assessment Program:? ? क्यों बन रहा है यह अभियान वायरल?
यह खबर सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही है क्योंकि:
- यह प्रेरणा और बदलाव की कहानी है
- इसमें महिलाओं की बड़ी भूमिका है
- यह दिखाता है कि सरकारी योजनाएं सही तरीके से लागू हों तो चमत्कार कर सकती हैं
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Literacy Assessment Program:? ? निष्कर्ष: क्या यह भारत की साक्षरता क्रांति की शुरुआत है?
बिलासपुर में ‘उल्लास’ योजना का यह आयोजन केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत है।
जब 75 साल की मां और उनकी बेटी एक साथ परीक्षा दे सकती हैं, तो यह साफ है कि अब शिक्षा की कोई उम्र नहीं रही।
? अगर यही प्रयास जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरा भारत पूर्ण साक्षर बन जाएगा।
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