BOLLYWOOD : ‘जिहल-ए-मिस्किन मकुन बरंजीश’ बहुत गहरा है, 80 के दशक के इस गाने का मतलब, बोल किसने लिखे हैं?

BOLLYWOOD अगर आप उन लोगों में से एक हैं जो सुरों की रानी लता मंगेशकर के गायन के दीवाने हैं तो आपने उन्हें ‘जिहल-ए-मिस्किन मकून बारंजीश’ गाते हुए सुना होगा। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों को छूता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस प्रसिद्ध गीत को किसने लिखा और इसके बोलों का क्या अर्थ है?

BOLLYWOOD स्वर्गीय महान गायिका लता मंगेशकर को संगीत समरागनी, स्वर कोकिला सहित कई नामों से जाना जाता था। इसका कारण यह था कि उन्होंने जो भी गीत छुआ वह सोने में बदल गया। ऐसा ही एक गीत है ‘जिहल-ए-मिस्किन मकून बरंजीश’। यह गाना आपने जरूर सुना होगा। यह गीत 1985 में जे. पी. दत्ता द्वारा निर्देशित ‘गुलामी’ का है, जिसमें मिथुन चक्रवर्ती, धर्मेंद्र, अनीता राज, नसीरुद्दीन शाह, स्मिता पाटिल और रीना रॉय जैसे दिग्गज अभिनेता मुख्य भूमिकाओं में थे।

BOLLYWOOD  यह गीत मिथुन चक्रवर्ती और अनीता राज पर फिल्माया गया था, जो आज भी दिल को खुश करता है। इस गाने को लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार ने गाया था। गाने का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था। आपने इस गाने को बहुत सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके बोल किसने लिखे हैं और इस गाने का अर्थ क्या है?

1985 में रिलीज हुई स्लेव फिल्म

आज भी जब फिल्म ‘ग़ुलामी’ का ये गाना कहीं सुनाई देता है, तो एक अलग ही एहसास होता है। इस गीत की रचना गुलजार साहब ने की थी, जो साहित्य प्रेमियों के लिए एक अमूल्य खजाना है। इस गीत का अर्थ भी बहुत गहरा है। सबसे पहले आपको बता दूं कि इस गाने के बोल गुलजार साहब के दिमाग में कैसे आए। दरअसल, गुलजार साहब ने यह गीत अमीर खुसरो की एक प्रसिद्ध गजल से प्रेरित होकर लिखा था, जो रिलीज होने के वर्षों बाद भी लोकप्रिय है।

फिल्म के प्रसिद्ध गाने

अब बात करते हैं इस गाने के बोलों की। यह गीत, जो वर्षों से लोगों के दिमाग में है, फारसी और ब्रज भाषा के संयोजन के साथ गुलजार साहब द्वारा रचित किया गया था। अमीर खुसरो की कविता की पंक्तियाँ इस प्रकार हैंः

अमीर खुसरो द्वारा लिखी गई पंक्तियाँ

‘जिहल-ए मिस्किन मकुन तगफुल, दूरए नैना बने बटियां… की तब-ए-हिजरान नादरम आए जान, न लेहो कहे लगे छतियां…’ जिसका अर्थ है-आंखें चुराकर, चीजें बनाकर मुझे नजरअंदाज न करें। मेरा जीवन ईंधन से बाहर चल रहा है। तुम मुझे अपनी बाहों में क्यों नहीं लेते?

गुलजार के बोल

‘जिहल-ए-मिस्की मुकून बरंजीश, बेहल-ए-हिजरा बेचारा दिल है…। यह आपके दिल या हमारे दिल की तरह लगता है।और गुलजार साहब द्वारा लिखे गए गीत के बोल का मतलब है-‘मेरे दिल का ख्याल रखो, इसे नाराज मत करो> इस गरीब दिल ने हाल ही में अलगाव का दर्द झेला है।”हालांकि, 90 प्रतिशत लोग होंगे जो इस गाने को बहुत पसंद करेंगे, इसके बोल भी दिल को छू लेंगे, लेकिन उन्हें इस गाने के बोल का अर्थ नहीं पता होगा।


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