Caste Census 2027- ?2027 की जनगणना में नहीं गिने जाएंगे OBC? सरकार की इस “तैँयारी” से मच सकता है बड़ा बवाल!
Caste Census 2027- ?

? OBC की असल संख्या अब भी रहेगी रहस्य?
Caste Census 2027- ? 2027 में देशभर में डिजिटल जातिगत जनगणना की तैयारी जोरों पर है। मोदी सरकार ने 30 अप्रैल को इस जनगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया था। पहली बार डिजिटल तकनीक से जनगणना होगी और इस बार जाति का कॉलम भी शामिल रहेगा। लेकिन एक अहम जानकारी सामने आई है—OBC वर्ग की कुल संख्या अब भी सामने नहीं आएगी। सवाल उठता है कि आखिर क्यों?
? सिर्फ जाति गिनी जाएगी, वर्ग नहीं!
Caste Census 2027- ? सूत्रों के अनुसार, 2027 की जनगणना में “जाति” पूछी जाएगी लेकिन “वर्ग” यानी OBC, SC, ST, General की कुल संख्या नहीं बताई जाएगी। इसका मतलब है कि भले ही आपकी जाति दर्ज हो जाए, लेकिन यह नहीं बताया जाएगा कि OBC की कुल संख्या कितनी है।
इस फैसले से कई सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर तब जब OBC आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे तेजी से उभर रहे हैं।
⚠️ OBC वर्ग की अनदेखी क्यों?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार OBC की असल संख्या उजागर करने से कतरा रही है, क्योंकि इससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा उलटफेर हो सकता है।
▶ कुछ राज्यों में एक जाति OBC मानी जाती है तो वहीं, दूसरे राज्यों में वही जाति सामान्य वर्ग में आती है।
▶ इसी कारण सरकार वर्ग आधारित आंकड़े नहीं जुटा रही है, सिर्फ जातिगत डाटा लिया जाएगा।
? क्या होंगे जनगणना के सवाल?
2027 की जनगणना में लगभग 30 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
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नाम
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जेंडर
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माता-पिता का नाम
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जन्मतिथि
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वैवाहिक स्थिति
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स्थायी और वर्तमान पता
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जाति का नाम
ध्यान देने वाली बात ये है कि मुस्लिम, ईसाई, सिख जैसे धर्मों के अनुयायियों को भी अपनी जाति लिखनी होगी। लेकिन अगर कोई गलत जाति बताता है, तो उसे सत्यापित करने का कोई तरीका नहीं होगा।
? OBC का डाटा क्यों जरूरी है?
OBC को शिक्षा, नौकरी और राजनीति में आरक्षण का लाभ मिलता है। लेकिन आरक्षण सिर्फ जाति प्रमाणपत्र के आधार पर मिलता है, न कि उस जाति के कुल जनसंख्या आंकड़े पर।
अगर OBC की संख्या का पता ही नहीं चलेगा, तो उनके हक की लड़ाई कौन लड़ेगा?
क्या इससे OBC समाज के साथ भेदभाव नहीं होगा?
?️ जनगणना में देरी क्यों?
पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड के चलते टाल दी गई। अब 2027 में जब यह डिजिटल होगी, तब भी इसके पूरा होने में 3 साल लग सकते हैं।
हालांकि, आमतौर पर जनगणना में 5 साल लगते हैं, लेकिन डिजिटल प्रक्रिया से समय कम होगा।
? राजनीति और जनगणना का गणित
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार का ये फैसला—“जाति तो पूछेंगे, पर OBC की गिनती नहीं करेंगे”, कहीं न कहीं जातिगत राजनीति को और ज्यादा भड़का सकता है।
क्या यह आंकड़े छुपाने की साजिश है?
क्या OBC की असल ताकत सामने आने से राजनीतिक जमीन हिलने का डर है?
? जनगणना का इतिहास भी है गवाह
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1931 में आखिरी बार पूर्ण जातिगत जनगणना हुई थी।
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1941 में हुई जनगणना के आंकड़े कभी सार्वजनिक नहीं हुए।
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1951 से 2001 तक जातियों को गिना ही नहीं गया।
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2011 में सामाजिक-आर्थिक जातिगत आंकड़े तो जुटाए गए, लेकिन उन्हें आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया।
अब 2027 में फिर से जातिगत जनगणना होने जा रही है—लेकिन OBC की संख्या फिर भी अंधेरे में रहेगी।
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? निष्कर्ष: जनगणना या आंकड़ों की राजनीति?
Caste Census 2027- ? जातिगत जनगणना एक ऐतिहासिक कदम हो सकता है, लेकिन OBC की संख्या को न गिनने का फैसला बेहद विवादास्पद है। इससे न सिर्फ सामाजिक न्याय के सवाल उठेंगे, बल्कि आने वाले चुनावों में यह बड़ा चुनावी मुद्दा भी बन सकता है।














