CG News- केले के तने से बनेगी टिकाऊ ईंटें- जानें कैसे यह आविष्कार बदल सकता है घर निर्माण का तरीका

CG News-  छत्तीसगढ़ के कैमिकल इंजीनियर करण चंद्राकर ने केले के अनुपयोगी तने का नया इस्तेमाल खोज निकाला है, जिससे अब ईंटें भी बनाई जा सकेंगी। यह ईंट न केवल मजबूत होगी, बल्कि इसे बनाने में पारंपरिक भट्ठे की जरूरत भी नहीं होगी। इस अनोखे प्रयोग को स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी (सीएसवीटीयू) के स्टार्टअप के तहत छह लाख रुपये की ग्रांट भी मिली है, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

केले के तने से ईंट बनाने की प्रक्रिया

CG News-  करण चंद्राकर का यह प्रयोग पूरी तरह से टिकाऊ है। केले के तने से 20 ईंटें बनती हैं, जिन्हें भट्ठे में पकाने की जगह पानी में भिगोकर तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में केले के तने से रेशा निकालने के बाद, बचे हुए पानी और अपशिष्ट में मिट्टी, चूना और गोबर मिलाकर एक पेस्ट तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को मशीन के माध्यम से ईंट का आकार देकर पानी में डुबो दिया जाता है, जिससे वह मजबूत हो जाती है। ईंट को 21, 51, और 81 दिनों तक पानी में रखा जाता है, जो इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाता है।

केला तने की ईंट: सस्ती और टिकाऊ

CG News- यह ईंट पारंपरिक लाल ईंट की तरह ही 10 रुपये में बाजार में उपलब्ध होगी। हालांकि, भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन के बाद कीमतें कम होने की भी उम्मीद है। यह ईंट 60 साल तक टिकाऊ होगी, जिससे घर की लंबी उम्र बढ़ेगी। चंद्राकर के अनुसार, केले के तने में प्राकृतिक कैल्शियम, पोटेशियम, सिलिका, मैग्नीशियम, फास्फोरस और क्लोराइड जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो इसे मजबूत बनाते हैं।

मजबूत ईंट के पीछे का विज्ञान

CG News- साधारण ईंट हवा और पानी में कमजोर पड़ जाती है, पर केले के तने से बनी ईंट वातावरण की कार्बन डाइऑक्साइड के संपर्क में आते ही और मजबूत हो जाती है। वातावरण की कार्बन डाइऑक्साइड से प्रतिक्रिया करके केले के तने की ईंट में कैल्शियम कार्बोनेट बनता है, जिससे उसकी मजबूती और बढ़ जाती है।

टिकाऊ और इको-फ्रेंडली निर्माण की ओर कदम

CG News- छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में तीन हजार एकड़ क्षेत्र में केले की खेती होती है। फसल कटने के बाद तना किसानों के लिए अनुपयोगी हो जाता है, इसलिए वे इसे निशुल्क दे रहे हैं। इस अनोखे प्रयोग से न केवल केले के तनों का सही इस्तेमाल हो सकेगा, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ सकती है।

इस प्रोजेक्ट को मिली है विज्ञान मंत्रालय की मंजूरी

CG News- करण चंद्राकर की इस खोज को विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय की निधि आईटीबीआई योजना के तहत मंजूरी मिली है। इसे स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाने के लिए सीएसवीटीयू ने छह लाख रुपये की ग्रांट दी है। स्टार्टअप शुरू होने के बाद, इस प्रोजेक्ट से होने वाले लाभ का 7.5% हिस्सा सीएसवीटीयू को मिलेगा, जिससे विश्वविद्यालय को भी फायदा होगा।

निष्कर्ष

CG News- यह ईको-फ्रेंडली आविष्कार न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा, बल्कि निर्माण के क्षेत्र में भी एक नई दिशा प्रदान करेगा। केले के तने से ईंट बनाने का यह सस्ता, टिकाऊ, और विज्ञान सम्मत समाधान हमें प्रकृति के संसाधनों का बेहतर उपयोग करना सिखाता है। आने वाले समय में, इस तरह की टिकाऊ ईंटों के निर्माण से घर बनाने की लागत कम होगी और पर्यावरण का भी संतुलन बना रहेगा।

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