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बिलासपुर में हर दिन 25 बच्चे संक्रमित: पैरेंट्स के टेस्ट नहीं कराने पर आंकड़ा कम l ऑनलाइन बुलेटिन

बिलासपुर l (छत्तीसगढ़ बुलेटिन) l कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। ठंड में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैलता है और एक से दूसरे तक पहुंच जाता है। बच्चों को ठंड से बचाना बहुत जरूरी है। उनकी श्वांस नली है वह नेरो रहती है और लड़ने की क्षमता भी कम रहती है तो जल्दी से बीमार पड़ जाते हैं। छोटे बच्चों में पैरेट्स को खुद लक्षण पहचानना है। बुखार आने, दूध नहीं पीने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें।

 

बुधवार को एक ही दिन में 22 बच्चे पॉजिटिव मिले हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पैरेंट्स जांच कराने रुचि नहीं ले रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि जांच कराने पर संक्रमित बच्चों की संख्या चौंकाने वाली हो सकती है। बताया जा रहा है कि वास्तविक केस इससे कहीं ज्यादा है। इन्हें फिलहाल औसतन 25 रोज माना जा रहा है।

 

वर्तमान में सर्दी, खांसी बुखार जैसे सामान्य लक्षण दिख रहे हैं। ऐसे में कोरोना के संदेह को बहुत ही सावधानी से ध्यान रखना चाहिए। अगर पैरेंट्स को बच्चों के कोरोना टेस्ट कराने के लिए सलाह डॉक्टर दे रहे हैं, तो उसे मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पैरेंट्स बच्चों के संक्रमण को लेकर असावधानी देखा जा रहा है। बच्चों की जांच कराने पर पैरेंट्स परहेज कर रहे हैं। उनका मानना है कि परिवार के सदस्यों में संक्रमण नहीं है तो बच्चों में कहां से आएगा।

 

बच्चों में बताए यह लक्षण

 

बच्चों में कोरोना के सामान्य लक्षण सर्दी, खांसी व बुखार के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही उल्टी होना, पतले दस्त आना और कमजोरी होना भी कोरोना के लक्षण के रूप में सामने आ रहे हैं। बच्चों में यह राहत है कि कोरोना के संक्रमण से ज्यादा स्थिति गंभीर नहीं हो रही है लेकिन, संक्रमित बच्चों की पहचान कर इसे फैलने से रोका जा सकता है।

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घर में एंटीबायोटिक्स व नेबुलाइजर का उपयोग न करें

 

आजकल आमतौर पर पैरेंट‌स घर में एंटीबायोटिक्स दवाइयां रखते हैं और नेबुलाइजर भी रखते हैं और नेबुलाइजेशन करते हैं। नेबुलाइजेशन के बजाए बच्चों को पानी से भाप देना चाहिए। श्वांस की गति ज्यादा होने पर बच्चों को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाएं।

 

25 फीसदी बच्चों में है कोरोना के लक्षण

 

इन दिनों औसतन रोज 50 बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें 25 फीसदी बच्चों में कोरोना के लक्षण देखने को मिल रहा है। अगर 25 बच्चों का टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है तो 10 फीसदी पैरेंट्स ही बच्चों का टेस्ट करा रहे हैं। इनमें 5 फीसदी बच्चे पॉजिटिव मिल रहे हैं। जो बच्चे टेस्ट नहीं करा रहे हैं और इधर-उधर घूम रहे हैं, उनसे संक्रमण का फैलने का खतरा बढ़ जाता है। टेस्ट कराने का मतलब कोरोना मरीजों की पहचान कर उन्हें आइसोलेट रखना है।

 

वैक्सीन के चलते बड़ों में नहीं दिखता लक्षण

 

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि परिवार के बड़े सदस्यों ने वैक्सीन लगवा ली है, तो कोरोना के सामान्य लक्षण उनमें नहीं दिख रहे हों लेकिन, बच्चों के वैक्सीनेशन नहीं होने के कारण उनमें कोरोना के लक्षण सीधे तौर पर नजर आ रहे हैं। इस स्थिति में डॉक्टर सलाह दे रहे हैं तो मानना चाहिए और टेस्ट कराना चाहिए।

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