Chhoti Kashi Bikaner- बीकानेर बना ‘छोटी काशी’: जब संतों की वाणी गूंजी और ओमप्रकाश घारू के भजनों से झूम उठा गुलाब कुंज!

Chhoti Kashi Bikaner- ?

? “लोक संत हमारी सामाजिक धरोहर” व्याख्यानमाला में शिक्षा, संस्कार और संतवाणी से रोशन हुआ बीकानेर


बीकानेर में संत समागम का अद्भुत दृश्य

Chhoti Kashi Bikaner- ? बीकानेर का गुलाब कुंज रविवार को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया, जब प्रकाश पुंज फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘लोक संत: हमारी सामाजिक धरोहर’ व्याख्यानमाला (भाग-द्वितीय) के अंतर्गत संतों, विद्वानों और समाजसेवियों की प्रेरणादायक उपस्थिति में संत परंपरा की गरिमा का उत्सव मनाया गया।

Chhoti Kashi Bikaner- ? इस अवसर पर विशेष चर्चा हुई—“लोक संतों की वाणी से संस्कारित एवं समृद्ध समाज का निर्माण कैसे हो?” इस विषय ने बीकानेरवासियों को भक्ति, विचार और सामाजिक चेतना के एक मंच पर जोड़ दिया।


?️ दीप प्रज्ज्वलन से आरंभ, संतों की वाणी से जीवन प्रेरित

कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ महर्षि नवल गुरु गाद्धीपति आचार्य चरणदास जी महाराज, स्वामी विमर्शानंद जी महाराज, जयकिशन महाराज रोड़ा, महंत रमेश चौहान, नवलरत्न श्री राजकुमार सरसिया और आचार्य ओमप्रकाश घारू के करकमलों से।

गुरु परंपरा के प्रतीक सतगुरु महर्षि नवल साहेब के तेलचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर आध्यात्मिक ऊर्जा की स्थापना की गई।


? संतों के विचार: शिक्षा, संस्कार और समाज

? आचार्य चरणदास जी महाराज ने कहा:

“समाज का उत्थान शिक्षा, दीक्षा और संस्कारों से ही संभव है।
बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने कहा था—‘शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा।’”

? स्वामी विमर्शानंद जी महाराज बोले:

“बदलते समय में जीवन-मूल्यों की पुनः स्थापना जरूरी है। संतों की वाणी ही समाज को नई दिशा देने की शक्ति है।”

? महंत रमेश चौहान ने कहा:

“संत केवल उपदेशक नहीं, मन के चिकित्सक होते हैं। वे मानवता के असली चिकित्सक हैं।”

? नवलरत्न श्री राजकुमार सरसिया ने संत परंपरा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा:

“कबीर, महर्षि नवल और हणुत साहेब जैसे संतों की वाणी आज भी समाज को उजाला दे रही है।”


?️ डॉ. ब्रजरतन जोशी का विश्लेषण: संत, लोक और धरोहर

मुख्य वक्ता डॉ. ब्रजरतन जोशी ने संत परंपरा, लोक-संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि—

“संतों की वाणी केवल भक्ति नहीं, एक सामाजिक क्रांति का घोष है।”


? ओमप्रकाश घारू के स्वरबद्ध संतवाणी भजनों का लोकार्पण

इस ऐतिहासिक अवसर पर आचार्य ओमप्रकाश घारू के स्वरबद्ध संतवाणी भजनों का वर्चुअल लोकार्पण भी किया गया। इन भजनों को संगीतबद्ध करने वाले संगीतकार सुजीत जावा का विशेष सम्मान किया गया।

यह भजन केवल संगीत नहीं, आत्मा को छू लेने वाली संतवाणी है, जिसे जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी सुना जा सकेगा।


? संगठक व प्रतिनिधियों का योगदान

  • स्वागत भाषण: पूनमचंद कंडारा

  • प्रस्तावना: डॉ. सुभाष प्रज्ञ

  • सारगर्भित वक्तव्य: श्याम निर्मोही

  • परिचय: अमित तेजी, त्रिलोक बारासा, विनोद शागिर्द, डॉ. सुभाष चंद्र, दीनदयाल घारू

  • संचालन: नेमीचंद बारासा

  • धन्यवाद ज्ञापन: डॉ. खुशबू घारू (अध्यक्षा, प्रकाश पुंज फाउंडेशन)


? गरिमामयी उपस्थिति

संतोषानंद सरस्वती, शिवलाल तेजी, ओमप्रकाश लोहिया, चंद्रशेखर चांवरिया, दिलीप पांडे, आचार्य मंगलाराम पंडित, महंत त्रिलोक पंडित, माणक गुजराती, शिक्षाविद् सरोज तेजी, सी.डी. सिसोदिया, श्याम लाल तेजी, बलवेश चांवरिया, बाबूलाल घारू, थानमल पंडित सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक इस कार्यक्रम के साक्षी बने।

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? बीकानेर: नई आध्यात्मिक दिशा में अग्रसर

यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, समाज को दिशा देने वाला आंदोलन है। संतों की वाणी, शिक्षा का महत्व और भक्ति से भरपूर भजनों का संगम बीकानेर को सच में ‘छोटी काशी’ बना गया।

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