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अविवाहित महिला को भी है गर्भपात का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट avivaahit mahila ko bhee hai garbhapaat ka adhikaar : supreem kort

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | सहमति से बने यौन संबंधों के कारण गर्भवती हुई अविवाहित महिला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला देते हुए 24 हफ्ते की गर्भवती अविवाहित महिला को गर्भपात की इजाजत दे दी। महिला सहमति से बने यौन संबंधों के कारण गर्भवती हो गई थी।

 

शीर्ष अदालत ने एम्स के निदेशक को निर्देश दिया कि एमटीपी अधिनियम की धारा 3 के प्रावधानों के तहत शुक्रवार तक एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए। बोर्ड इस बात को देखेगा कि गर्भपात से याचिकाकर्ता के जीवन को कोई खतरा तो नहीं है। मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष में यह पाया जाता है कि कोई खतरा नहीं है तो गर्भपात कराया जाएगा।

 

दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को पलटा

 

जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 15 जुलाई को दिए गए उस फैसले को पलट दिया, जिसमें गर्भपात की अनुमति से इनकार किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि गर्भावस्था की अवधि 20 हफ्ते से अधिक हो गई थी जो कि एमटीपी एक्ट और एमटीपी नियमों द्वारा सहमति से यौन संबंधों से उत्पन्न होने वाली गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए निर्धारित अधिकतम सीमा है।

 

अदालत ने कहा कि अधिनियम की धारा 3 (2) (बी) इस मामले के तथ्यों पर लागू नहीं हैं क्योंकि एक अविवाहित महिला जिसकी गर्भावस्था सहमति से उत्पन्न होती है, स्पष्ट रूप से 20 सप्ताह से अधिक के मामले उसके दायरे में नहीं आते। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून की व्यापक व्याख्या की जानी चाहिए और संसद की मंशा की जांच की जानी चाहिए।

 

अविवाहित लड़कियों को भी गर्भपात का समान अधिकार

 

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि कानून विवाहित महिलाओं की तरह अविवाहित लड़कियों को भी गर्भपात का समान अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में महिला के विवाहित और अविवाहित होने का मुद्दा उठाया था। याचिका में कहा गया था कि कानून अविवाहित महिला के मामले में कुछ नहीं कहता है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कानून अविवाहित महिलाओं को मेडिकल प्रक्रिया के जरिए गर्भपात के लिए समय देता है।

 

अदालत ने कहा कि संसद का इरादा अधिनियम के लाभकारी प्रावधान को केवल वैवाहिक संबंधों तक सीमित रखने का नहीं है। अनुच्छेद 21 के अनुरूप महिला की व्यापक शारीरिक स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए संसद द्वारा व्यापक अर्थ निर्धारित किया गया है।

 

इसलिए याचिकाकर्ता को अवांछित गर्भधारण की अनुमति देना संसदीय मंशा के खिलाफ होगा। केवल उसके विवाहित या अविवाहित होने के आधार पर इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। युवती मणिपुर की रहने वाली है और अपनी गर्भावस्था के बारे में पता चलने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था।

 

 

 

Unmarried women also have the right to abortion: Supreme Court

 

New Delhi | [Court Bulletin] | The Supreme Court on Thursday gave an important decision regarding an unmarried woman who became pregnant due to consensual sex, allowing an abortion to a 24-week pregnant unmarried woman. The woman had become pregnant due to consensual sex.

 

The top court directed the Director of AIIMS to constitute a medical board by Friday under the provisions of Section 3 of the MTP Act. The Board will see whether there is any threat to the life of the petitioner due to abortion. In the conclusion of the medical board, if it is found that there is no danger, then abortion will be done.

 

 Delhi High Court’s decision reversed

 

A bench of Justice D.Y. Chandrachud overturned the July 15 judgment of the Delhi High Court which had denied abortion permission. The High Court had held that the gestation period had exceeded 20 weeks which is the maximum limit prescribed by the MTP Act and the MTP Rules for termination of pregnancy arising out of consensual sex.

 

The court held that Section 3(2)(b) of the Act is not applicable to the facts of the case as an unmarried woman whose pregnancy arises out of consent, clearly beyond 20 weeks does not fall within its purview. The top court, however, said the law should be interpreted comprehensively and the intent of Parliament should be examined.

 

Unmarried girls also have equal right to abortion

 

The Supreme Court clearly said that the law gives equal right to abortion to unmarried girls like married women. In the petition filed in the Supreme Court, the issue of the woman being married and unmarried was raised. It was said in the petition that the law does not say anything in the case of an unmarried woman. The High Court in its judgment had said that the law gives time to unmarried women to have an abortion through a medical procedure.

 

The court observed that Parliament does not intend to restrict the beneficial provision of the Act to matrimonial relations only. According to Article 21, the broader meaning has been determined by the Parliament keeping in view the wide bodily autonomy of the woman.

 

Therefore, allowing the petitioner to have unwanted pregnancies would be against the parliamentary intent. It cannot be denied merely on the ground that he is married or unmarried. The girl hails from Manipur and had moved the Delhi High Court after learning about her pregnancy.

 

 

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