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पति की हैसियत के अनुसार रहना पत्नी का अधिकार, ₹2 लाख गुजारा भत्ता किया तय pati kee haisiyat ke anusaar rahana patnee ka adhikaar, ₹2 laakh gujaara bhatta kiya tay

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | अदालत ने घरेलू हिंसा के एक मामले में कहा है कि पति के रुतबे, हैसियत के अनुसार रहना पत्नी का अधिकार है। उसे इससे वंचित नहीं किया जा सकता। इसी के साथ अदालत ने कारोबारी पति की मासिक आय के हिसाब से पत्नी का गुजाराभत्ता 2 लाख रुपए महीना तय किया है। हालांकि, महिला ने प्रतिमाह 25 लाख रुपए के गुजाराभत्ते की मांग की थी।

 

रोहिणी स्थित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कनिका जैन की अदालत ने महिला के वकील प्रदीप राणा की दलील को मंजूर करते हुए कहा कि पति की मासिक आय करीब 12 लाख रुपए है। ऐसे में पत्नी को पति की हैसियत के हिसाब से 2 लाख रुपये महीना गुजाराभत्ता देने का आदेश देना न्यायसंगत है।

 

पति की 3 दवा कंपनियां

 

अदालत में जमा कराए गए हलफनामे में बताया गया कि महिला के पति की 3 दवा कंपनियां चल रही हैं, जिनसे अच्छी-खासी आमदनी होती है। हालांकि, महिला ने प्रतिमाह 25 लाख रुपए के गुजाराभत्ते की मांग की थी, लेकिन अदालत ने कहा कि प्रतिवादी पति की ओर से पेश आयकर दस्तावेजों के अनुसार, उसकी मासिक आय 11 लाख 53 हजार 40 रुपये है। ऐसे में अदालत उतना ही गुजाराभत्ता देने का आदेश दे सकती है, जो कानूनी व व्यावहारिक तौर पर सही हो।

 

पिता के साथ रहती हैं 2 बेटियां

 

इस दंपती की 2 बेटियां हैं, जो पिता के साथ ही रहती हैं। बड़ी बेटी पिता की कंपनियों में हिस्सेदार है, इसलिए अदालत ने मुआवजा रकम तय करते समय बड़ी बेटी को आत्मनिर्भर माना है। वहीं, छोटी बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी पिता पर होने के चलते उसकी गुजाराभत्ता रकम पिता के हिस्से में ही रहने दी गई है।

 

अदालत ने इस मामले में प्रतिवादी की 11 लाख 53 लाख रुपए की आय को 4 भागों में विभाजित किया है। 2 हिस्से पति के रखे गए हैं। 1 हिस्सा छोटी बेटी और चौथा हिस्सा पत्नी को दिया गया है, क्योंकि छोटी बेटी पिता के साथ ही रह रही है। ऐसे में तीसरा हिस्सा भी पिता के पास ही रहेगा।

 

पति की आय से तय होता है गुजाराभत्ता : कोर्ट

 

अदालत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की आय के हिसाब से पत्नी का गुजाराभत्ता तय किया जाता है। इस मामले में स्पष्ट तौर पर पति की मासिक आमदनी 11 लाख 53 हजार रुपए सामने आई है। ऐसे में महिला को 2 लाख रुपए का गुजाराभत्ता देना सही होगा। अदालत ने यह भी कहा कि 2 लाख रुपए महज घर खर्च चलाने के लिए हैं, जबकि महिला पहले से ही पति के एक अलग घर में रह रही है।

 

 

Right of wife to live according to husband’s status, fixed Rs 2 lakh alimony

 

 

New Delhi | [Court Bulletin] | The court has said in a case of domestic violence that it is the right of the wife to live according to the status, status of the husband. He cannot be denied it. With this, the court has fixed the maintenance allowance of the wife at Rs 2 lakh per month according to the monthly income of the business husband. However, the woman had demanded maintenance of Rs 25 lakh per month.

 

The court of Metropolitan Magistrate, Rohini, Kanika Jain, while accepting the argument of the woman’s lawyer Pradeep Rana, said that the monthly income of the husband is around Rs 12 lakh. In such a situation, it is justified to order the wife to pay maintenance of Rs 2 lakh per month according to the status of the husband.

 

 Husband’s 3 pharmaceutical companies

 

In the affidavit submitted in the court, it was told that the woman’s husband is running three pharmaceutical companies, from which there is a substantial income. Though the woman had demanded maintenance of Rs 25 lakh per month, the court observed that as per the income tax documents produced by the respondent husband, her monthly income is Rs 11 lakh 53 thousand 40. In such a situation, the court can order to pay the same amount of maintenance, which is legally and practically right.

 

 2 daughters live with father

 

The couple has 2 daughters, who live with their father. The eldest daughter is a shareholder in the father’s companies, so the court has considered the eldest daughter to be self-sufficient while fixing the compensation amount. At the same time, due to the responsibility of raising the younger daughter on the father, her alimony amount has been allowed to remain in the share of the father.

 

In this case, the court has divided the income of the respondent Rs 11 lakh 53 lakh into 4 parts. 2 parts are kept by the husband. One part has been given to the younger daughter and the fourth part to the wife, as the younger daughter is living with the father. In such a situation, the third part will also remain with the father.

 

 Maintenance allowance is determined by husband’s income: Court

 

The court said that the maintenance of the wife is decided on the basis of the income of each person. In this case, clearly the monthly income of the husband has come out to be Rs 11 lakh 53 thousand. In such a situation, it would be right to give maintenance of Rs 2 lakh to the woman. The court also said that Rs 2 lakh is only for running the household expenses, while the woman is already living in a separate house of her husband.

 

 

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