Dalit Atrocity Chhattisgarh -“दलित ने जब मजदूरी मांगी तो मिली दरिंदगी की सजा!” करंट, प्लायर से नाखून उखाड़े, प्राइवेट पार्ट खींचा, अम्बेडकर जयंती पर इंसानियत शर्मसार

Dalit Atrocity Chhattisgarh -?

? स्थान: कोरबा, छत्तीसगढ़
? पीड़ित: अभिषेक भांबी, विनोद कुमार भांबी (राजस्थान के दलित मजदूर)
? तारीख: 14 अप्रैल 2025 (अम्बेडकर जयंती)


? मजदूरी मांगना बन गया ‘गुनाह’ – दलित युवकों को गोदाम में बंद कर तड़पाया गया

Dalit Atrocity Chhattisgarh -? देश में जहां एक ओर डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर समाज में बराबरी और न्याय की बात हो रही थी, वहीं दूसरी ओर दलित समाज के दो युवकों के साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गईं।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में मजदूरी करने गए दो दलित युवक – अभिषेक भांबी और विनोद कुमार भांबी – जब अपना मेहनताना मांगने पहुंचे, तो उन्हें चोरी के झूठे आरोप में फंसाकर अमानवीय अत्याचार का शिकार बनाया गया।


? क्या हुआ दलित युवकों के साथ?

? निर्वस्त्र कर गोदाम में बंद किया गया

? बिजली के करंट से तड़पाया गया

? प्लायर से नाखून उखाड़े गए

? प्राइवेट पार्ट को बेरहमी से खींचा गया

? पूरे कृत्य का वीडियो खुद बनाया और वायरल किया गया


? वीडियो देख हर किसी की रुह कांपी, मां बोली – “मुझे इंसाफ चाहिए”

Dalit Atrocity Chhattisgarh -? पीड़ित अभिषेक की मां लीला देवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा –

“मेरे बेटे को निर्वस्त्र कर करंट दिया गया, उसके नाखून प्लायर से उखाड़े गए, और प्राइवेट पार्ट पर हमला किया गया। यह किसी भी मां के लिए असहनीय है। मुझे इंसाफ चाहिए।”


? FIR से भी डरती पुलिस? परिवार का आरोप – “समझौते का दबाव बनाया जा रहा है”

घायल अवस्था में किसी तरह गांव लौटे दोनों युवकों ने गुलाबपुरा थाने में शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन वहां पुलिस ने पहले उन्हें भगा दिया और फिर समझौता करने का दबाव बनाया।

पीड़ित के परिजन शंकरलाल मेघवंशी ने कहा –

“हम थाने पर बार-बार गए, लेकिन हमारी सुनवाई नहीं हुई। उल्टा हमें धमकाया गया और कहा गया कि समझौता कर लो।”


? पुलिस की सफाई – “0 एफआईआर दर्ज कर कोरबा भेजा मामला”

थाना प्रभारी हनुमान चौधरी के अनुसार –

“चूंकि मामला दूसरे राज्य से जुड़ा है, हमने 0 एफआईआर दर्ज कर कोरबा पुलिस को भेज दिया है। पीड़ितों को मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया है, और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”


⚖️ यह सिर्फ दलितों पर नहीं, मानवता पर हमला है

इस घिनौने कृत्य ने न केवल दलितों की गरिमा को रौंदा, बल्कि अम्बेडकर के संविधान में लिखे समानता और न्याय के मूल्यों को भी चीर कर रख दिया है।

? सोचिए –

  • क्या मजदूरी मांगना अपराध है?

  • क्या जाति आज भी हमारे समाज में न्याय से बड़ी है?

  • क्या पुलिस की निष्क्रियता अपराधियों को बढ़ावा नहीं दे रही?


? सोशल मीडिया पर उठी इंसाफ की मांग

वीडियो वायरल होते ही ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #JusticeForDalitLabourers और #कोरबा_हिंसा ट्रेंड करने लगा। आम जनता, सामाजिक कार्यकर्ता और कई दलित संगठनों ने इस घटना पर गंभीर कार्रवाई और सख्त सजा की मांग की है।

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? निष्कर्ष: अब खामोश रहना अपराध है

यह घटना कोई पहली नहीं है, लेकिन अगर अब भी हम चुप रहे, तो अगला निशाना कोई और हो सकता है।
हमें चाहिए –
✅ तेज़ न्यायिक कार्रवाई
✅ पीड़ितों को मुआवज़ा और सुरक्षा
✅ आरोपियों को कड़ी सजा
✅ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय हो


? आप क्या कर सकते हैं?

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  • #JusticeForAbhishekAndVinod ट्रेंड में शामिल हों

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