Devi Shankar Murder -【प्रयागराज दलित हत्या मामला】35 वर्षीय मजदूर देवी शंकर की दर्दनाक मौत से गांव में हड़कंप | जानिए गेहूं का बोझा न उठाने की क्या थी कीमत?
Devi Shankar Murder -❗

Devi Shankar Murder -❗ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। इसौटा गांव में 13 अप्रैल को एक दलित युवक देवी शंकर (35 वर्ष) की अधजली लाश मिलने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई।
इस हत्या ने जातिगत भेदभाव, सामाजिक अन्याय और दलित उत्पीड़न जैसे मुद्दों को फिर से समाज के सामने ला खड़ा किया है।
? हत्या क्यों हुई? गेहूं उठाने से किया इनकार और खत्म हो गई जिंदगी!
Devi Shankar Murder -❗ परिवार का आरोप है कि देवी शंकर ने ठाकुर समुदाय के खेत में गेहूं का बोझा उठाने से मना कर दिया था। यही “ना” उसकी आखिरी “ना” बन गई।
परिवार वालों का कहना है कि 12 अप्रैल की रात को ठाकुर समुदाय के दिलीप सिंह ने कई बार फोन कर देवी शंकर को खेत पर बुलाया।
रात को जब देवी शंकर अपने घर पर खाना खाने बैठे, तो दिलीप सिंह ने उन्हें कहा,
“खेत पर आओ, सबके लिए खाना है।”
Devi Shankar Murder -❗ देवी शंकर ने मां से कहा, “मैं खेत पर खा कर आता हूं।” और इसके बाद वो कभी वापस नहीं लौटे।
?️ अगली सुबह खेत में मिली अधजली लाश
13 अप्रैल की सुबह जब गांव में एक अधजली लाश मिलने की खबर फैली तो अफरातफरी मच गई। बेटी काजल ने लाश की पहचान की—यह उनके पिता थे।
मां कलावती की आंखों में आंसू हैं और लफ्ज़ हैं:
“मेरे बेटे के बदन पर कपड़े तक नहीं थे, मैं धोती लेकर दौड़ी थी, पर वो भी नसीब नहीं हुई।”
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार देवी शंकर की मौत गला दबाकर की गई, जबकि जलाना मौत के बाद किया गया।
???? अब कौन भरेगा इन अनाथ बच्चों का पेट?
देवी शंकर की मौत के बाद उनके तीन छोटे बच्चे—काजल, सूरज और आकाश अब अनाथ हो चुके हैं।
घर में कमाने वाला कोई नहीं।
दादी कलावती की चिंता है,
“अब बेटी की शादी कैसे होगी? और पोते क्या भीख मांगकर जिएंगे?”
? क्या कहती है पुलिस और प्रशासन?
पुलिस ने आठ अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है।
एएसपी के अनुसार,
“शराब पीने के बाद महिला को लेकर झगड़ा हुआ, वही हत्या का कारण बना।”
लेकिन परिवार इस थ्योरी को खारिज करता है। उनका कहना है कि यह हत्या केवल जातीय घृणा और मजदूरी से इनकार करने के कारण हुई है।
? मिलेगा न्याय या फिर एक और ‘दलित हत्या’ बनकर रह जाएगी यह कहानी?
सरकारी सहायता के तौर पर:
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₹45,000 की आर्थिक सहायता
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वृद्धावस्था पेंशन
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200 वर्ग मीटर आवासीय ज़मीन
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ग्रामसभा की ज़मीन से खेती योग्य भूमि (जो अभी तय नहीं)
परिवार का कहना है,
“दिलीप सिंह को फांसी होनी चाहिए, घरों पर बुलडोज़र चलना चाहिए।”
? दलितों में उबाल: मौन क्रांति या आंदोलन?
इस घटना के बाद प्रयागराज और पूरे यूपी में दलित समाज आक्रोशित है।
वरिष्ठ रिटायर्ड आईपीएस एसआर दारापुरी का कहना है कि
“दलितों पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं।”
? राजनीतिक प्रतिक्रिया: संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष एक्टिव
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कांग्रेस और बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष परिवार से मिलने पहुंचे
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अखिलेश यादव और चंद्रशेखर ने भी सोशल मीडिया पर जताया विरोध

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स्त्रोत- बीबीसी हिंदी
? निष्कर्ष: देवी शंकर की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि व्यवस्था की हत्या है
“जब समाज चुप हो जाए, तो अन्याय आवाज़ बन जाता है।”
प्रयागराज की घटना बताती है कि एक ‘ना’ कहने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ सकती है, अगर आप हाशिए पर खड़े हैं।

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