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सपनों की उड़ान | ऑनलाइन बुलेटिन

©अशोक कुमार यादव

परिचय- मुंगेली, छत्तीसगढ़.


 

लघुकथा

 

मोहन पी.एस.सी. की तैयारी करने गांव से शहर आया। वह सबसे पहले रूम किराया ढूंढा और कोचिंग क्लास का पता लगाया। किराया और कोचिंग क्लास के फीस के लिए उसके पास पैसा नहीं था। मोहन बहुत गरीब परिवार से था।

 

वह दिनभर काम करता और शाम को कोचिंग क्लास में पढ़ने के लिए जाता था। पी.एस.सी. की सिलेबस बहुत ज्यादा था, इसलिए उसे एक वर्ष समझने में लगा। उस वर्ष वह परीक्षा नहीं निकाल पाया। दूसरे वर्ष में पांच प्रतिशत के लिए चूक गया।

 

तीसरे वर्ष आउट आफ सिलेबस प्रश्न पूछने के कारण नहीं निकाल पाया। चौथे वर्ष सभी प्रश्नों को हल करके आ गया जिसके कारण निगेटिव मार्क में बहुत सारा गलत हो गया। पांचवें वर्ष में प्रतिशत अधिक चला गया जिसके कारण फिर नहीं निकाल पाया।

 

मोहन बहुत उदास और परेशान रहने लगा। एक दिन कोचिंग क्लास में एक अतिथि आया। उसने कहा- ‘यदि तुम सफल नहीं हो पा रहे हो तो, पढ़ने का तरीका बदलो, रास्ते नहीं। मंजिल तुम्हें अवश्य मिलेगी।’ मोहन, अतिथि के प्रेरणाप्रद बातों से बहुत प्रभावित हुआ।

 

अब वह कोचिंग क्लास से, यूट्यूब के माध्यम से, गूगल के माध्यम से और स्वाध्याय के माध्यम से पढ़ाई करने लगा। मोहन ने तन्मयता से पढ़ाई की। प्री परीक्षा और मेंस परीक्षा में पास हो गया। वह इंटरव्यू दिलाकर गांव लौट आया।

 

एक दिन वह खेत में काम कर रहा था, तभी उसका दोस्त आया और कहा- ‘तुम डिप्टी कलेक्टर बन गए हो। तुम्हारे वर्षों के सपनें सकार हो गए हैं।’ मोहन अपने दोस्त की बात को सुनकर खुशी से रोने लगा।

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वह तुरंत जाकर पदभार ग्रहण किया और सुखीपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा। मोहन ने आखिर अपने सपनों की उड़ान भर ही लिया।

 

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