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श्याम कुंवर भारती की कहानी ‘जूही की महक’ का पढ़ें अंतिम 23 वां भाग | ऑनलाइन बुलेटिन

©श्याम कुंवर भारती

परिचय- बोकारो, झारखंड


 

होली की शांति समिति की बैठक शाम के चार बजे जूही के ऑफिस में रखी गई थी। जिसमें उस क्षेत्र से संबंधित सभी थाना प्रभारी, वीडियो, सीओ, समाज सेवी, राजनीतिक दल के प्रतिनिधि, ब्यवसायिक गण, सभी धर्मों के धर्म गुरु और डीएसपी सुधीर भी उपस्थित था। जूही ने कहा कुछ ही दिनों में होली आने वाली है। यह त्योहार रंगों का त्योहार तो है ही साथ ही मिलने मिलाने और खुशियों का त्योहार है। आज की बैठक इसलिए रखी गई है ताकि होली के अवसर पर कही भी कोई अप्रिय घटना न घटे, सब लोग निडर और निश्चिंत होकर होली खेलें। इस विषय पर आप सभी का सहयोग चाहिए।

 

हालांकि पुलिस अपने स्तर पर विधि व्यवस्था को दुरुस्त करने में पूरा प्रवास करेगी लेकिन आप सबका सहयोग भी प्रशासन को चाहिए। माहौल खराब न हो और किसी भी तरह की अफवाह न फैले इसके लिए जरूरी है कि आप सब अपने अपने लोगों को जागरूक करें कि वो शांति भंग न होने दें।

 

सभी वीडियो और थाना प्रभारी अपने अपने क्षेत्र में शांति समिति की बैठक कर विधि व्यवस्था बनाने की तैयारी करें। इस कार्य में पुलिस दल का नेतृत्व डीएसपी सुधीर साहब संभालेंगे। और सभी सतर्क और सावधान रहेंगे इसके बाद बैठक खत्म हो गई।

 

होली के दिन जूही ने सुधीर के परिवार को अपने घर पर ही बुला लिया। जूही ने नेहा और गुड़िया के साथ मिलकर सबके लिए खूब पुआ पकवान बनाया। सबलोगों ने एक साथ मिलकर खाना खाया और जूही ने सबके साथ खूब जम कर होली खेली।

 

सुधीर ने पूरे क्षेत्र में पुलिस के जवान तैनात कर रखे थे। जहा ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र लगा वहा पुलिस बल बढ़ा दिया था।

 

वो फोन पर क्षेत्र की जानकारी अपने पदाधिकारियों से लेता रहा। अचानक शाम को उसे खबर मिली दो समुदायों में रंग लगाने को लेकर जबरदस्त मार पीट और हंगामा हो गया है। लाठी डंडों के अलावा तलवार, भाला, गड़ासा भी निकल चुका है। अगर जल्दी कंट्रोल नहीं किया गया तो दंगा भड़क सकता है। सुधीर ने तुरंत उस क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल भेजा और खुद अपने कुछ जवानों को लेकर जाने लगा, तभी जूही ने पूछा क्या हुआ कहा जा रहे हो? सुधीर ने उसे सारी जानकारी दिया। जूही भी उसके साथ जाने लगी लेकिन सुधीर ने उसे रोकते हुए कहा मैडम मैं सब संभाल लुंगा आप चिंता न करें। सुधीर के जाते ही जूही ने जिला मुख्यालय से संपर्क कर सारी जानकारी दिया और अगल- बगल के थानों को तैयार रहने को कहा।

 

सुधीर जैसे ही घटना स्थल के करीब पहुंचा उसने देखा हालत काफी बिगड़ चुका है। हर तरफ मार पीट मची हुई थी। काफी लोग घायल हो चुके थे। पुलिस बल नाकाम हो रही थी। सुधीर ने तुरत सशस्त्र पुलिस बल को चारों तरफ घेराबंदी करने का हुक्म दिया और लॉउडस्पीकर से घोषणा किया सभी लोग यहां से चुपचाप अपने घरों में लौट जाएं अन्यथा हमें बल का प्रयोग करना पड़ेगा। फिर भी लोग आपस में भिड़ते रहे। उसने कुछ पुलिस ऑफिसर से दोनों समुदायों के नेताओं की जानकारी लिया जो सबको भड़का कर लड़ा रहे थे। उसने उनको लक्ष्य कर उनको घायल करने का आदेश दिया।

 

सभी नेताओं के घायल होते ही और गोलियां चलने से वहां सभी सहम गए। इस मौके का फायदा उठाते हुए सुधीर ने लाठियां चलाने का आदेश दिया। पुलिस तुरंत हरकत में आई और उपद्रवियों पर लाठियां बरसाने लगी और भीड़ तितर बितर होने लगी। घायल नेताओें को गिरफ्तार कर उन्हें अस्पताल भिजवाया और 40- 50 उपद्रवियों को भी गिरफ्तार करने में सफल रहा सबको बस में भरकर पुलिस थाना भेज दिया। बाकी लोगों को दौड़ा दौड़ा कर पीटते हुए उनके घर में घुसवा दिया। थोड़ी ही देर में पूरा एरिया उसके नियंत्रण में आ गया। सुधीर ने अपना पसीना पोछते हुए राहत की सांस लिया।

 

अगले दिन सभी अखबारों में सुधीर की काबिलियत और बहादुरी की खबर छपी थी। सुधीर ने बड़ी समझदारी से बहुत बड़ा दंगा होने से बचा लिया था।

 

जिला में सभी पदाधिकारियों ने सुधीर की काफी तारीफ किया।

 

और उसके प्रमोशन किया और उसके कार्यों की एक रिपोर्ट डीसी के द्वारा राज्य सरकार गृह विभाग को भेज दिया गया।

 

जूही ने भी सुधीर के कार्यों की बहुत तारीफ किया। होली के कुछ दिनों के बाद जूही ने सुधीर से कहा, सब लोग अपनी गर्लफ्रेंड को कहीं न कहीं घुमाने ले जाते हैं। खिलाते- पिलाते हैं। गिफ्ट देते हैं। एक तुम मेरे ब्वॉय फ्रेंड हो तुम्हें तो मेरी कोई फिक्र ही नहीं रहती है।

 

सुधीर की मां ने कहा जूही ठीक कह रही है, बेटा इसे ले जाओ न कही घुमा फिरा कर ले आओ। रात दिन काम करके तुम दोनों थक जाते हो। थोड़ा दिल भी बहल जाएगा।

 

थैंक यू आंटी कहकर जूही सुधीर की मां से लिपट जाती है। लेकिन मैं सुधीर के साथ उसके बाइक जाऊंगी। जूही ने ज़िद किया। देखा मां इनकी जिद। इनको पता है मैं डीएसपी और ये एसडीओ हैं। हम दोनों की सुरक्षा की जिम्मेवारी का मामला बन जायेगा अगर कोई अप्रिय घटना घट गई तो। सुधीर ने समझाते हुए कहा।

 

वो सब मैं नहीं जानती मैं तो तुम्हारे तुम्हारे बाइक से ही जाऊंगी। सिर्फ मैं और तुम रहेंगे तीसरा और कोई नहीं। तुम थोड़ी देर के लिए भूल जाना तुम डीएसपी और मैं भूल जाऊंगी की एसडीओ हूं। केवल प्रेमी और प्रेमिका बस जूही ने हठ करते हुए कहा।

 

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सुधीर ने अपनी मां से कहा मां तुम भी बहुत सह देती हो मैडम को। अब मेरी बेटी की इच्छा है तो मान लो न बेटा कोई तुमसे खजाना तो नहीं मांग रही है।

 

सुधीर की मां ने जूही के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा।

 

सुधीर ने हथियार डालते हुए कहा ठीक है मैडम आप कल तैयार हो जाइए जब मां बोल रही है तो मैं आपके अपनी बाइक से वाटर फाल ले चलूंगा। वहां देशभर से टूरिस्ट घूमने आते हैं। बड़ी भीड़ रहती है। वहां झील भी है। सुनकर जूही खुशी से उछल पड़ी। वाह तब तो बहुत मजा आयेगा।

 

सुधीर ने कमरे से निकलकर अपनी किसी ऑफिसर से फोन पर बात किया और उसे कुछ जरूरी हिदायत दिया।

 

अगले दिन सुधीर अपनी बाइक लेकर जूही के आवास पर पहुंच गया। जूही पहले से ही तैयार थी। सुधीर को देखते ही वो दौड़कर उसके पास आ गई। जूही की मां ने सुधीर से कहा बेटा संभलकर जाना और आना, माफ करना मेरी बेटी बहुत जिद्दी है। अच्छा किया तुमने इसकी बात मान लिया वर्ना ये तुमको परेशान करते रहती।

 

रास्ते में जूही ने सुधीर की कमर को कस के पकड़ लिया। वो बहत खुश थी सुधीर के साथ। वाटर फाल पहुंचकर सुधीर ने उसे दिखाया ऊंचे पहाड़ से पानी कितनी ऊंचाई से गिर रहा था। पानी जहां गिर रहा था वहां बड़ी सी झील बन गई थी। झील तक जाने के लिए ऊपर से नीचे तक काफी संख्या में सीढियां बनी हुई थी। सुधीर ने जूही का हाथ पकड़कर धीरे धीरे नीचे झील तक ले गया। झील का मनोरम प्राकृतिक दृश्य देखकर जूही बहुत खुश हो रही थी।

 

फिर उसने सुधीर से नाव पर घुमाने की जिद किया। सुधीर ने एक नाविक को बुलाकर जूही को उसकी नाव पर बैठाकर खुद भी चढ़ गया। जूही ने नाविक को वाटर फाल तक ले जाने को कहा जहां ऊंचे पहाड़ से पानी काफी मात्रा में बड़ी तेज आवाज में गिर रहा था जिसका नजारा अद्भुत और मनभावन था।

 

झील की सैर कर दोनों पहाड़ की तलहटी से फिर सीढियां से उपर आने लगे। कुछ उपर जाकर जूही से चलना मुश्किल होने लगा लेकिन सुधीर ने उसका हाथ पकड़ कर धीरे धीरे ऊपर तक ले आया। जूही काफी थक चुकी थी। सुधीर उसे एक झोपड़ीनुमा रेस्टुरेंट में ले गया जहा अंदर में काफी सजावट की गई थी। खाने पीने की सारी चीजें उपलब्ध थी वहां। सुधीर ने जूही का मन पसंद खाना खिलाया। खाना खाकर जूही ने आइसक्रीम खाने की इच्छा जताया। वे दोनों दूसरी दुकान पर गए जहां से सुधीर ने एक आइसक्रीम लिया। जूही आराम से एक कुर्सी पर बैठकर धीरे धीरे खाने लगी।

 

मैडम जल्दी करें अब शाम होने वाली है घर भी जाना है।

 

मैं तो चाहती हूं शाम ही न हो और हम दोनों यहीं साथ घूमते रहें। जूही ने आइसक्रीम खाते हुए हंसकर कहा।

 

सुधीर चुप हो गया।

 

आइस क्रीम खाकर जूही सुधीर की बाइक पर पीछे बैठ गई। सुधीर तेजी से अपनी बाइक दौड़ा दिया। रास्ते में एक बाजार में सुधीर ने जूही को एक सुंदर सी कलाई घड़ी और कुछ ड्रेस खरीद कर गिफ्ट दिया। जूही ने कहा वाह मेरे भोले बलम बड़े सही जा रहे हो। अब लग रहा है तुम मेरे सच्चे प्रेमी हो वाह।

 

इसी तरह ट्रेनिंग ले लो आगे काम आयेगा। जब भी जरूरत पड़ेगी तुम्हारी जेब ढीली करवाती रहूंगी।

 

आप भी मैडम मजाक करने से बाज नहीं आती है। फिर दोनों निकल पड़े।

 

रास्ते में धीरे धीरे अंधेरा होने लगा था। सुधीर रात होने से पहले घर पहुंच जाना चाहता था। रास्ते में घना जंगल भी था।

मगर जूही अपनी धुन में मगन थी उसे तो सुधीर के साथ घूमने में मजा आ रहा था।

 

जैसे ही सुधीर जंगल के बीच पहुंचा उसपर गोलियों की बौछार शुरू हो गई। सुधीर ने अपनी बाइक को फूल स्पीड में डाल दिया। उसने थोड़ी दूर जाकर अपनी बाइक की हेड लाइट ऑफ कर दिया और बाइक को दो चार पेड़ों के पीछे खड़ा कर जूही को उतारकर कर कहा मेडम आप इन पेड़ों के पीछे छिपे रहना बाहर मत निकलना।

 

इतना कहकर वो सड़क पर आ गया। थोड़ी ही देर में पीछे से पुलिस की दो जिप आकर रूकी और उसमें से कई पुलिस के जवान जीप से उतरकर सुधीर को सलामी ठोका। एक ऑफिसर ने कहा सर आपने जैसे कहा था हम लोग शुरू से आपके पीछे पीछे दूरी बनाकर चल रहे थे। अभी गोलियों की आवाज हम लोगों ने भी सुनी है आप ठीक तो है सर।

 

मैं बिल्कुल थीं हूं।

 

दो जवान जूही मैडम के पास जाओ उनकी सुरक्षा में रहो सुधीर ने जूही की तरफ इशारा करते हुए कहा। सभी अपनी रिवाल्वर तैयार रखे एक आदमी सर्च लाइट को तैयार रखे सुधीर ने जल्दी जल्दी सबको तैयार किया तभी फिर गोलियां चलने की आवाज आई।

 

 

सुधीर ने कहा जल्दी से अपनी पोजीशन संभाल लो सब जिधर से गोली चलने की आवाज आए उधर गोली चलाओ और अपनी पोजीशन बदलते रहना। दुश्मन को कभी भी तुम्हारी सही पोजीसन का अंदाजा नहीं लगा सके।

 

फिर काफी देर तक दोनों तरफ से गोलियां चलती रही। थोड़ी देर के बाद उधर से गोलियों की आवाज आनी बंद हो गई। सुधीर ने कहा सर्च लाइट निकालो सावधानी से जांच करो कही कोई मरा या जख्मी तो नहीं हुआ है।

 

तीन लोग मरे पाए गए और पांच जख्मी हालत में पाए गए। सुधीर ने उन सबको गिरफ्तार कर बगल वाले थाने को फोन कर एक एंबुलेंस और एक जीप मंगवा लिया। घायल हमलावरो से हमला करने के कारण के बारे में पूछने पर सबने बताया वे लोग पूर्व विधायक मनमोहन के आदमी हैं। बदला लेने के लिए उन लोगों को जूही को मारने के लिए हमला किया था। जूही के चलते उन लोगों की गुंडा गर्दी बंद हो गई थी उन लोगों से कोई डरता नहीं था। इसलिए उनकी कमाई भी बंद हो गई थी। जूही के चलते उनके नेता गुप्ता को भगाना पड़ा और आत्म समर्पण करना पड़ा।

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बगल वाले थाने से एंबुलेंस आते ही सुधीर ने कुछ जवानों के साथ घायल और मरे हुए हमलावरों को को अस्पताल भेज दिया। उनके इलाज के बाद जेल भेजने और मरे लोगों का पोस्टमार्टम के लिए।

 

अपनी बाइक उसने अपने दो जवानों को दिया और कहा तुम दोनों आगे आगे चलो। थाने से मंगाई गई जीप में उसने जूही को बैठाकर खुद बैठ गया एक जीप आगे और एक जीप को पीछे आने को कहा।

 

रास्ते में जूही ने पूछा इतनी जल्दी पुलिस की जिप कैसे आ गई सुधीर मैं समझी नहीं।

 

आपको जिद पूरी करने के लिए मैं बाइक से आपको लेकर आया मगर दो जिप पुलिस के जवानों को भी हमारे पीछे पीछे आने के लिए बोल दिया ताकि किसी विषम परिस्थिति में हम दोनों को कोई खतरा नहीं हो। याद रहे अब हम लोग कोई साधारण लोग नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी हैं हमें सुरक्षा के नियमो का पालन कर के ही कही आना जाना चाहिए।

 

जूही ने सुधीर की तारीफ करते हुए कहा वाह डीएसपी साहब आप तो पक्का पुलिस ऑफिसर बन गए। भगवान करे आपका जल्दी प्रमोसन हो और हमारा गठबंधन हो।

 

शूबह सभी अखबारों में डीएसपी सुधीर और विधायक के नामी गुंडों को मुठभेड़ के बारे में खबर छपी थी जिसमें सुधीर और उसकी पुलिस की टीम की बहादुरी के बारे में विस्तार से लिखा गया था। साथ ही अपनी जान पर खेलकर एसडीओ जूही की जान बचाने के बारे में भी। क्योंकि उनका टारगेट जूही ही थी।

 

घर पर जब सबको पता चला तो सबने भगवान को शुक्रिया दिया और सुधीर की तारीफ किया।

 

इसको तो मेरी जान बचाना ही था मां ये मुझे प्यार जो कहता है। मुंह से बोलता नहीं है बडा भोला बनता है मगर मेरा बच्चा वैसा है नही। जूही ने हंसते हुए कहा।

 

जूही की मां ने उसे डांटते हुए कहा तुम चुप रहो तुम्हारी ही जिद के चलते मेरा बेटा तुझे अपनी बाइक से ले गया वरना पुलिस की गाड़ी में सुरक्षा सहित जा सकती थीं। हर बार तेरी जान यही तो बचाता आ रहा है।

 

आंटी आप मैडम को मत डांटीये इनका मूझपर बड़ा एहसान है मैं इनके लिए कुछ भी कर सकता हूं।

 

देखी मां इसकी दिल की बात जुबां पर आ ही गई। इसके सामने अगर कोई मुझे कुछ कहे तो इसको बर्दास्त नहीं होता है। और अपने प्यार को मेरे एहसान का नाम देता है। वाह बेटा बड़े होशियार हो। अच्छा है मुझे बड़ी खुशी हुई। जूही ने हंसते हुए कहा।

 

कुछ दिनों में सुधीर के बेहतरीन कार्यों को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा उसका प्रोमोशन लेटर आ गया। सबसे ज्यादा खुशी जूही को हुई।

 

अब उसे अपने विवाह की उम्मीद जग गई थी।

 

दोनों घर में सब लोग काफी खुश हुए इसलिए नहीं की सुधीर का प्रमोशन एसपी के पोस्ट पर हो गया है बल्कि इसलिए कि अब सुधीर का कोई बहाना नहीं चलेगा और जूही का विवाह उसके साथ शीघ्र ही हो जायेगा।

 

जूही ने सुधीर को मिठाई खिलाते हुए कहा लो मिठाई खाओ मेरे लाल और अब जल्दी से दूल्हा बनकर मेरे घर मुझे दुल्हन बनाकर ले जाने की हां कह दो।

 

सुधीर ने हंसकर कहा ठीक है मैडम अब मैं बड़ी धूमधाम से बारात लेकर आने को तैयार हूं आप भी मेरी दुल्हन बनने को तैयार हो जाओ मैडम।

 

सुधीर की हां सुनते ही उसकी मां ने तुरंत पंडित को बुलवाया और विवाह का शुभ मुहूर्त निकालने को कहा।

 

पंडित ने अपना पंचांग निकालकर बताया माता हिंदू नव वर्ष के वैशाख महीने में बहुत ही शुभ मुहूर्त है अंग्रेजी माह का अट्ठारह अप्रैल दो हजार बाइस को रात्रि साढ़े दस बजे।

 

सुधीर की मां ने खुश होकर पंडित को दक्षिणा दिया और कहा पंडित आपसे विद्वान और कौन होगा विवाह संस्कार भी आप ही पूर्ण करे। ठीक है माता जैसी आपकी इच्छा।

 

विधायक जया को जैसे ही जूही और सुधीर के विवाह की खबर मिली और तुरंत सुधीर के आवास पर पहुंची। उसने सुधीर की मां को प्रणाम किया और कहा की आंटी जूही और सुधीर दोनों मेरे दोस्त है और इनका मुझ पर एहसान भी है। इसलिए मैं चाहती हूं जूही का विवाह मेरे घर से हो और सुधीर मेरे घर अपनी बारात लेकर आए और जूही को सिंदूर दान कर बिदा कराके ले जाएं।

 

मेरा विवाह तो सुधीर के नहीं हो सका और न वो मेरे लिए बारात लेकर आ सका लेकिन जूही के बहाने ही सही वो मेरे घर बारात लेकर आए। जया ने सुधीर की मां से कहा।

 

लेकिन इसका फैसला तो जूही और उसकी मां करेंगे। मुझे कोई दिक्कत नहीं है जया बेटी। ठीक है मैं उनसे बात करती हु तुम थोड़ी देर रुको।

 

सुधीर की मां ने फोन कर जूही और उसकी मां को बुलाया।

 

उनके आते ही उसने जया की इच्छा उनको बताई। सुनकर जूही ने कहा मेरी सहेली की इच्छा मै कैसे टाल सकती हूं। ठीक है मुझे मंजूर है जया। जब तुमने मेरी बात मानी है तो मैं क्यों नहीं मानूंगी।

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ठीक है तब बारात के ठहराने, खिलाने पिलाने से लेकर टेंट पंडाल और रात्रि गीत संगीत की जिम्मेवारी मेरी रहेगी। बाकी सुधीर और जूही मैडम देख ले।

 

तभी जूही ने कहा हालांकि मेरे पापा अभी है लेकिन मैं चाहती हूं जब मेरा विवाह तुम्हारे घर से हो रहा है तो मेरा कन्यादान तुम्हारे पिता के हाथो हो।

 

जूही की बात सुनकर जया की आंखों से आंसू छलक आए। उसने जूही का हाथ पकड़कर कहा मैडम लोगों को सम्मान देना कोई आपसे सीखे। इसी वजह से मैं सुधर गई आज आपकी वजह से ही मैं विधायक बनी हूं। आपने ही मेरा घर बसा दिया।

 

आप धन्य हो।

 

ये सब मेरा फर्ज था जूही ने कहा। अब मैं जिला प्रशासन से अनुरोध करूंगी की चाहे एक दिन रात के लिए ही सही तुम्हारे पापा को जेल से मेरे कन्यादान के लिए रिहा किया जाय।

 

जिला प्रशासन ने जूही का अनुरोध स्वीकार कर लिया और पूर्व गुप्ता को एक दिन के लिए रिहा करने का आदेश दे दिया। साथ ही डीसी और डिडीसी के अलावा जिला के कई पदाधिकारी यो ने जूही के विवाह में हर संभव सहयोग करने और निमंत्रण पर आकर दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद देने हेतु आने का भी वादा किया।

 

जूही ने अपनी मां से पूछकर अपने सारे रिश्तेदारों को निमंत्रण भेज दिया। गांव से अपने पापा और बाकी दो बहनों को भी बुला लिया। उसने अपनी सभी सहेलियों को भी न्योता भेज दिया।

 

सुधीर ने भी अपनी और बहन को बोल दिया सभी सगे संबंधियों को निमंत्रण भेजने के लिए। उसने अपने सभी दोस्तों को भी खुद ही न्योता भेज दिया और कहा सालो सिर्फ खाने नहीं आना है। विवाह में मदद भीं करनी है और धूम धाम से बारात भी निकालनी है। उसने अपने दोस्तो को ही घोड़ी लाने, बैंड बाजा, गाड़ी घोड़ा और अतिसबाजी का काम सौप दिया।

 

जूही और अपने दूर के रिश्तेदारों जो बाहर से आनेवाले थे सबके लिए होटल और धर्मशाला आदि बुक करा दिया। जया ने सुधीर के लिए दूल्हा का वस्त्र, शेरवानी आदि खुद गिफ्ट में दिया। जूही को भी साड़ियां और कई गहने गिफ्ट में दिए।

 

जूही ने सुधीर और दोनों माताओं को लेकर विवाह की सारी खरीदारी खुद की।

 

ठीक मुहूर्त पर सुधीर अपनी बारात पूरे गाजा बाजा के साथ सजाकर निकला। बारात में सारा मोर्चा उसके दोस्तो ने संभाल लिया था। बाकी कमी उसके पुलिस के जवानों ने संभाल लिया था। बारात में जिला के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी सामिल थे।

 

उधर जया के घर पर दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद देने के लिए प्रखंड स्तर से लेकर अनुमंडल और जिला मुख्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौयुद थे।

 

बारात की अगवानी के लिए ससुर की भूमिका में खुद पूर्व विधायक गुप्ता भी फुल माला आदि लेकर खड़े थे। उनके साथ जया की पार्टी के कई वरिष्ठ और सम्मानित नेता उपस्थित थे।

 

जूही को दुल्हन के रूप में खुद जया ने अपने हाथो से सजाया था।

 

दरवाजे पर पहुंचने से पहले ही बारात का भव्य स्वागत किया गया। दूल्हा के पिता के रूप में समधी की भूमिका में खुद एमपी साहब थे। दोनों समधी आपस में गले मिले। एक दूसरे को माला पहनाया।

 

दरवाजे पर जैसे ही सुधीर घोड़ी पर सवार होकर पहुंचा उसका भी सुंदर स्वागत महिलाओं ने किया। स्वागत और समधी मिलन के बाद बारात को समियाने में ठहराया गया जहा सबको स्वादिष्ट नाश्ता दिया गया।

 

ठीक समय पर विवाह संस्कार शुरू किया गया। औरतों ने विवाह के मंगल गीत गाने शुरू किए।

 

एक कर वर माला, फिर सुंदर दान और कन्या दान गुप्ता के हाथों संपन्न हुआ। बारात में रात भर सबने नाच गाने का आनंद लिया।

 

सुबह बारात की बिदाई हुई।

 

विदाई के समय मां बेटी खूब रोई। जूही की तीनों बहनें भी रोने लगी।

 

आखिरकार जूही की बिदाई हुई और सुधीर उसे लेकर अपने घर आ गया।

 

जूही जैसे ही दुल्हन बनकर सुधीर के घर आई उसका भी स्वागत सुधीर की मां और उसकी बहन ने किया। गृह प्रवेश करते ही पूरा घर जूही के महक से दमक उठा।

 

सुहाग रात में जब सुधीर अपनी दुल्हन जूही के कमरे में पहुंचा जूही ने शर्माते सकुचाते हुए उसका स्वागत किया। सुधीर ने कहां मेरे गरीब खाने और मेरे दिल के महल में आपका हार्दिक स्वागत है मैडम।

 

जूही ने कहा मेरे भोले बलम अब तो मैडम की रट छोड़ दो अब तो तुम्हारी दुल्हन बन चुकी हूं।

 

आप मेरी प्यारी मैडम थी और हमेसा मैडम बनकर मेरे इस दिल पर और मेरे घर पर हुक्म चलाओगी।

 

सुनकर जूही भाव विभोर हो गई और सुधीर के सीने से लग गई। उसे इतना सुख और आनंद की अनुभूति हुई जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। उसे लगा शायद यह क्षण कभी न खत्म हो। यह अद्दभुत अनुपम स्वर्गिक सुख उसे यूं ही मिलता रहे।

 

समाप्त

लेखक श्याम कुंवर भारती।

यह भाग आपको कैसा लगा कृपया अपना सुझाव अवश्य देंगे।

भाग एक से लेकर भाग 23 तक लगातार अपना स्नेह और प्यार देने के लिए

धन्यवाद।

 

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