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फुटबाल संघ का ही पंचर हो गया! तो खेला कैसे हो ? phutabol sangh ka hee panchar ho gaya! to khel kaise ho ?

©के. विक्रम राव, नई दिल्ली

-लेखक इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।


 

 

लोकोक्ति थी कि खेल की भावना यदि राजनति में आ जाये तो कटुता घटेगी, सौहार्द बढ़ेगा। संभावतः ईमानदारी भी गहरायेगी। आज ठीक उलटा हो रहा है। खेल को राजनीति ने ज्यादा कदाचारी बना डाला है। कल (22 अगस्त 2022) को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फुटबाल खेल संघ के मामले पर दिये गये निर्णय से ठीक विपरीत ही हो गया है।

 

अब खेल में वहीं सियासत की विशेषतायें, तुच्छतायें प्रवेश कर गयीं। लूटतंत्र, कुटंुबवाद, गबन। फलस्वरूप भ्रष्टाचार का कौतुक, खेला, तमाशा सभी की खामियां कूट-कूट कर घुन जैसी भर र्गइं हैं। घिन होती है। इस मसले पर सर्वोच्च न्यायालय के तीन-सदस्यीय खण्डपीठ के अध्यक्ष धनंजय यशवंत चन्द्रचूड का निर्णय बड़ा खास है, तीव्र और दूरगामी भी।

 

न्यायमूर्ति चन्द्रचूड ढाई माह बाद भारत केे प्रधान न्यायाधीश नामित होंगे। न्यायमूर्ति चन्द्रचूड ने राष्ट्र पर उपकार किया कि आल-इंडिया फुटबाल फेडरेशन के अध्यक्ष पैंसठ-वर्षीय प्रफुल मनोहरभाई पटेल को अध्यक्ष पद से बिना किसी मुरव्वत के हटा दिया। इतना गंभीर फैसला क्यों ? प्रफुल पटेल की कारगुजारी ही इसकी जिम्मेदार है।

 

प्रफुल पटेल बारह बरस से बिना मतदान कराये अध्यक्ष बने बैठे रहे। देशव्यापी बजट भी इसका अरबों रूपयों वाला है। कोर्ट ने प्रफुल पटेल को अपदस्थ कर नयी संचालन समिति गठित कर दी।

 

तो आखिर ऐसी नौबत आई क्यों? भारत सरकार के महाधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि दोषियों (गबन के अपराधियों) के खिलाफ सख्त कदम उठाये। खेल के व्यापार में प्रवेश के पूर्व प्रफुल पटेल मनमोहन सिंह मंत्रिपरिषद में नागरिक उड्डयन के राज्यमंत्री थे। सरकारी उपक्रम एयर इंडिया की पटेल ने बधिया ही बैठा दी।

 

मोदी काबीना के पूर्व मंत्री रहे प्रकाश जावेडकर के शब्दों में प्रफुल पटेल ने एयर इंडिया का सर्वनाश कर दिया था। इसके नतीजे में केन्द्रीय प्रवर्तन निदेशालय ने मुम्बई में उनके वाणिज्यीय भवन आदि का अधिग्रहण कर लिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस के इस प्रमुख नेता पर आरोप रहा कि वे कुख्यात माफिया और तस्कर दाउद इब्राहीम के सरगना इकबाल मिर्ची के हमजोली हैं।

 

कालेधन का धंधा जोरशोर से चलाया है। निदेशालय ने अक्टूबर 2012 में पटेल को करीब बारह घंटों तक अपने भवन में जिरह, सवाल-जवाब हेतु बुलाया था। फजीहत किया था। उनकी बावत कहा गया कि मुम्बई के नामीगिरामी अवैध धंधों में लिप्तता में पटेल का शुमार होता है।

 

मगर प्रफुल पटेल को देश हमेशा याद रखेगा कि एयर इंडिया का बेडा गर्क करने के लिये उनका योगदान अपार रहा। सारे मुनाफे के रूट पर जहाज उड़ाने की अनुमति पटेल ने निजी उद्योगपतियों को दे दी थी। एयर इंडिया को केवल घाटे की उड़ान दिये। उदाहरणार्थ लखनऊ से पटना केवल 50 मिनट की उड़ान होती है, मगर इन दोनों राजधानियों को वाया दिल्ली जोड़ा गया।

 

अर्थात एयर इंडिया दूना किराया लेता है। कौन मूढ अपनी नाक को पीठ के पीछे से हाथ ले जाकर छुएगा ? निजी जहाज जहां बीस घंटों की दैनिक उड़ान भरते हैं वहीं सरकारी एयर इंडिया केवल नौ घंटे ही चलती है। लाभ कहां से होता? मुम्बई एयरपोर्ट के आस पास की बेेशकीमती भूमि को ऊंचे दाम लेकर निजी हाथों में बेचा दिया।

 

मुम्बई में स्थापित पंजाब-महाराष्ट्र सहकारिता बैंक के करोड़ों के घोटाले में पटेल का नाम चमका था। पटेल के आदेश पर साठ खरब रूपये के नये हवाई जहाज को एक घटिया कम्पनी जिसके कुल सम्पत्ति अठारह हजार करोड़ की थी, को खरीदने के लिये दे दिया गया।

 

बैंक उद्योग में तो पटेल ने करिश्मा ही कर दिया। वे टेलिफोन पर ऋण मंजूर कर देते थे। तुर्रा यह है कि वरिष्ठतम राजनेता शरदचन्द्र गोविदराव पवार के पटेल शिष्य रहे। गत वर्ष पटेल ने विज्ञापन के रूप में एक सार्वजनिक विज्ञापन प्रकाशित कर दिया था। उसका मजमून था कि शरद पवार को अगला प्रधानमंत्री बनाया जाये। वे ही वरिष्ठतम तथा योग्यतम दावेदार हैं।

 

एक समाचारपत्र के स्तंभकर की तब टिप्पणी थी कि रही सही कोर कसर शरद पवार पूरी कर देंगे। समूची भारतभूमि ही रेहन पर चली जायेगी। ईश्वर भारत पर दयालु है। शरद पवार राष्ट्रपति पद का नामांकन तक नहीं कर सके।

 

प्रफुल पटेल और शरद पवार की तरह लालू यादव और फारूख अब्दुल्लाह भी खेल व्यापार से नाम कमा चुके है। मुम्बई क्रिकेट के नाम पर शरद पवार काफी सम्पत्ति बना चुके है। लालू यादव बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के सर्वेसर्वा रहे। चारा व्यापार का उनका अनुभव काफी लाभप्रद साबित हुआ। खेल में भी वही चारा घोटाला के गुर लालू ने अपनाये। खूब कमाया। उधर कश्मीर के फारूख अब्दुल्लाह को तो प्रवर्तन निदेशालय ने श्रीनगर क्रिकेट के घोटाला में घंटों पूछताछ कर चुकी है।

 

तो खेल के नाम पर सीनाजोरी करने वाले ये राजनेता कई गुल खिला चुके है। अब न्यायाधीश यशवंत चन्द्रचूड सबकी खबर लेंगे। मगर तब तक देश तो कंगाल हो चुका होगा।

 

 

 

Football union itself got punctured! So how’s the game?

 

 

K Vikram Rao


 

 

There was a saying that if the spirit of sports comes into politics, then bitterness will decrease, harmony will increase. Possibly honesty will also deepen. Today the exact opposite is happening. Politics has made sports more malpractice. The decision given by the Supreme Court on the matter of Football Sports Federation yesterday (22 August 2022) has done just the opposite.

 

Now the features of politics and trivialities have entered the game. Plunder, nepotism, embezzlement. As a result, the prodigy of corruption, the play, the spectacle, the flaws of all have been filled with mites. It gets rough. The decision of Dhananjay Yashwant Chandrachud, chairman of the three-member bench of the Supreme Court on this issue, is very special, fast and also far-reaching.

 

Justice Chandrachud will be named the Chief Justice of India after two and a half months. Justice Chandrachud did the nation a favor for the removal of sixty-five-year-old Praful Manoharbhai Patel, the President of the All-India Football Federation, without any delay. Why such a serious decision? The action of Praful Patel is responsible for this.

 

Praful Patel remained the president for twelve years without voting. Its nationwide budget is also billions of rupees. The court removed Praful Patel and constituted a new steering committee.

 

So why did such a thing happen? The Advocate General of the Government of India had requested the Supreme Court to take strict action against the culprits (criminals of embezzlement). Prior to entering the business of sports, Praful Patel was the Minister of State for Civil Aviation in the Manmohan Singh Council of Ministers. Patel of the state-owned Air India had just castigated.

 

In the words of Prakash Javedkar, former minister of Modi cabinet, Praful Patel had destroyed Air India. As a result of this, the Central Enforcement Directorate took over his commercial building etc. in Mumbai. This prominent leader of the Nationalist Congress was accused of being a friend of Iqbal Mirchi, the kingpin of notorious mafia and smuggler Dawood Ibrahim.

 

Black money business is run vigorously. In October 2012, Patel was called by the Directorate for cross-examination, question-answer in its building for about twelve hours. was troubled. It was said about him that Patel is involved in the famous illegal business of Mumbai.

 

But the country will always remember Praful Patel that his contribution in building Air India’s fleet was immense. Patel had given permission to private industrialists to fly the ship on the route of all profits. Gave only loss flights to Air India. For example, Lucknow to Patna flight is only 50 minutes, but these two capitals were connected via Delhi.

 

That is, Air India charges double fare. Which fool will touch his nose with his hand behind his back? While private planes fly daily for twenty hours, the state-run Air India operates only for nine hours. Where would the profit come from? The valuable land around the Mumbai airport was sold to private hands for a high price.

 

Patel’s name shone in the multi-crore scam of Punjab-Maharashtra Co-operative Bank established in Mumbai. On Patel’s order, a new airplane worth Rs.60 trillion was given to a substandard company whose total assets were worth eighteen thousand crores for purchase.

 

In the banking industry, Patel did charisma. They used to sanction loans over the telephone. The odd thing is that Patel was a disciple of the senior most politician Sharad Chandra Govindrao Pawar. Last year Patel published a public advertisement in the form of an advertisement. His insistence was that Sharad Pawar should be made the next Prime Minister. He is the oldest and fittest contender.

 

 

A newspaper columnist then remarked that Sharad Pawar will do the right thing. The entire land of Bharat will go on mortgage. God is merciful to India. Sharad Pawar could not even file his nomination for the post of President.

 

Like Praful Patel and Sharad Pawar, Lalu Yadav and Farooq Abdullah have also earned a name from the sports business. Sharad Pawar has made a lot of wealth in the name of Mumbai cricket. Lalu Yadav was the surveyor of Bihar Cricket Association. His experience in the fodder trade proved to be very beneficial. In sports too, Lalu adopted the same tricks of fodder scam. Earned a lot On the other hand, Farooq Abdullah of Kashmir has been questioned by the Enforcement Directorate for hours in the Srinagar cricket scam.

 

So in the name of sports, these politicians have fed many gulps. Now Judge Yashwant Chandrachud will take everyone’s news. But by then the country would have become poor.

 

महिला पीएम है तो उसकी निजता लांछित होगी ? mahila peeem hai to usakee nijata laanchhit hogee ?

 

 

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