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शिंजो आबे की हत्या के भारत के लिए मायने ? shinjo aabe kee hatya ke bhaarat ke lie maayane ?

©के. विक्रम राव, नई दिल्ली

-लेखक इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।


 

जब गत शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को टोक्यो से खबर आयी कि भारतमित्र शिंजो आबे की हत्या हो गयी। उस रात बीजिंग में दिये प्रज्ज्वलित किये गये। नजारा दीपावलि नुमा था। संवाद समिति की रपट ने कहा कि कम्युनिस्ट नेता आपस में बधाई भी दे रहे थे। इस जुनून का कारण भी है। आबे ने विस्तारवादी लाल चीन की आक्रमकता के खतरे को बाधित करने हेतु एक चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद (क्वाड) गढ़ा था।

 

जापानी प्रधानमंत्री उसके शिल्पी थे। यह 66—वर्षीय शिंजो आबे अपनी पैनी दूरदर्शी रणनीति के तहत भारत, जापान, आस्ट्रेलिया तथा अमेरिका के संयुक्त सैन्य बल के सहयोग द्वारा क्षेत्रीय भौगोलिक सार्वभौमिकता सुदृढ कर रहे थे।

 

पूर्वी एशिया में कम्युनिस्ट उपनिवेशवाद द्वारा ताइवान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम आदि पड़ोसी वामनाकार स्वाधीन गणराज्यों को दैत्याकार चीन हड़प न ले, हजम न कर ले। इस षड़यंत्र को रोकना था। चीनी ड्रेगन का आतंक आसन्न है। यही आधारभूत कारण रहा कि शिंजो आबे को हटा दिया जाये ताकि चीन का प्रमुख शत्रु ही खत्म हो जाये।

 

आबे और नरेन्द्र मोदी के बीच आत्मबंधुत्व, परम सौहार्द्र जैसा रिश्ता इन्हीं कारणों से रचित हुआ। दोनों बड़े राष्ट्रवादी माने जाते हैं। आबे कुछ ज्यादा। वे जापान की ऐतिहासिक शक्ति और भव्यता को दोबारा स्थापित करना चाहते थे। द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की करारी हार से विजयी अमेरिका ने उसके संविधान में धारा 9 थोप दी थी। इसके तहत जापान की आत्मरक्षा वाली सेना का खात्मा कर दिया गया था। उसकी हिफाजत का अमेरिका ने पूरा ठेका स्वयं संभाल लिया था।

 

यह 1946 की घटना है। हिरोशिमा तथा नागासाकी पर अणुबम गिराकर ध्वस्त जापान को नतमस्तक कर दिया गया था। हालांकि द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के प्रति बहुलांश भारतीय जनता की पूर्ण सहानुभूति तथा समर्थन रहा। खुद नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद फौज के गठन में ब्रिटिश—भारतीय सैनिकों (जाट, सिख, राजपूत आदि) को अपनी कैद से मुक्त कर जापान ने नेताजी की मदद की थी।

 

इन्हीं जापानी सैनिकों ने अण्डमानद्वीप समूह तथा इम्फाल (मणिपुर) को अक्टूबर 1943 में ब्रिटिश उपनिवेशियों के कब्जे से स्वतंत्र करा लिया था। स्वाभाविक है जापानी मुक्ति सेना के प्रति आम भारतीय की कृतज्ञता तो रही ही।

 

यह स्मरणीय है कि इसी वक्त में अलमोड़ा जेल से रिहा होकर जवाहरलाल नेहरु ने रानीखेत की आम सभा में कहा था : ”हम अहिंसावादी भारतीयजन सुभाषचन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज के भारत में सैन्य बल से प्रवेश का लाठियों से विरोध करेंगे।”

 

उसी कालखण्ड में नेहरु अलमोड़ा कारागार (दूसरी दफा कैद) से रिहा होकर (15 जनवरी 1946) समीपस्थ (बरास्ते नैनीताल) रानीखेत नगर में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। वहां इस कांग्रेसी नेता के उद्गार थे : ”अगर मैं जेल के बाहर होता तो राइफल लेकर आजाद हिन्द फौज के सैनिकों का अंडमान द्वीप में मुकाबला करता।”

 

यह उद्धहरण है सुने हुये उस भाषण के अंश का जिसे काकोरी काण्ड के अभियुक्त रामकृष्ण खत्री की आत्मकथा ”शहीदों के साये में” (अनन्य प्रकाशन, नयी दिल्ली, तथा इसका ताजा पहला संस्करण (जनवरी 1968 : विश्वभारती प्रकाशन) में है। इसका पद्मश्री स्वाधीनता सेनानी स्व. बचनेश त्रिपाठी भी उल्लेख कर चुके हैं।

 

खत्रीजी के पुत्र उदय लखनऊवासी हैं। अर्थात यह तो साबित हो ही जाता है कि त्रिपुरी (मार्च 1939) कांग्रेस सम्मेलन में सुभाष बाबू के साथ उपजे वैमनस्यभाव की कटुता दस वर्ष बाद भी नेहरु ने पाल रखी थी। नेहरु के आदर्श उदार भाव के इस तथ्य को जगजाहिर करने की दरकार है।

 

इसी सिलसिले में शिंजो आबे द्वारा टोक्यो के निकट यासूकूनि तीर्थस्थल में उपासना हेतु जाना भी विवादग्रस्त रहा। इस स्थल में गत सौ वर्षों के करीब ढाई लाख जापानी देशभक्तों की समाधि है। गत दशकों में राष्ट्र रक्षा में वे सब शहीद हुये थे। मगर माओवादी चीन यासूकूनि की तीर्थयात्रा को सम्राज्यवादी लिप्सा का घोतक मानता है।

 

यहीं वे सब भी दफन है जिन्होंने दक्षिण—पूर्वी एशिया से ब्रिटिश थल तथा जल सेना को खदेड़ा था। उनके कमांडर का नाम था एडमिरल लूई माउन्टबेटन जिन्होंने ने जवाहरलाल नेहरु को प्रधानमंत्री की शपथ दिलवाई थी।

 

टोक्यो के इस यासूकूनि तीर्थ स्थल का महत्व और पवित्रता साधारण जापानी नागरिकों के लिये वैसी ही है जितनी जलियांवाला बाग और सोमनाथ की हिन्दुस्तानियों के लिये है। इन पुनीत स्थलों में स्वाधीनताप्रेमी भारतीयों का लहू बहा था।

 

शिंजो आबे का आक्रोश रहा कि विजयी अमेरिकी सेनापति जनरल डगलस मैकआर्थर ने संविधान में धारा 9 जोड़ कर जापान के राष्ट्रवाद को क्लीब बना डाला था। आबे चाहते थे कि जापान नये परिवेश में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा सेना का गठन करे।

 

तभी कम्युनिस्ट चीन से युद्ध की बेला पर किसी अन्य राष्ट्र की सेना पर निर्भर न रहा जाये। नयी सैन्यशक्ति का एकमात्र उद्देश्य आत्म सुरक्षा है। उदाहरण भारत का है जो 1962 में चीन से हारकर, तबसे तगड़ी सेना का गठन कर रहा है। आबे की कोशिश भी रही कि हिन्द महासागर, प्रशान्त महासागर आदि तटीय क्षेत्रों में चीन की विशाल नौसेना का सशक्त मुकाबला किया जा सके। क्वाड रणनीति का यही मकसद है।

 

आबे का नारा भी था : ”आजादी और विकास का वृत्तांश बनकर यह क्वाड उभरे।” खतरे से भयभीत कम्युनिस्ट चीन आबे और नरेन्द्र मोदी से आशंकित और त्रस्त रहता है। आबे की हत्या से क्वाड समरनीति का सुष्टा तथा प्रणेता चला गया। लाल चीन खुश हुआ। अब क्वाड के संचालन का दारोमदार भारत पर है। कारण यही कि चीन को सैन्यशक्ति से अधिकतम खतरा भारत को है। उसके क्षेत्र लद्दाख, अरुणाचल तथा पूर्वोत्तर को खासकर।

 

शिंजो आबे के असामयिक महाप्रस्थान से सर्वाधिक क्षति भारत को हुयी है। उसके राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री को कहीं​ अधिक।

 

 

 

 

What does the assassination of Shinzo Abe mean for India?

 

 

©K. Vikram Rao, New Delhi

 The author is the National President of the Indian Federation of Working Journalists (IFWJ).


 

 

When the news came from Tokyo on Friday (July 8, 2022) that India’s friend Shinzo Abe had been murdered. Diyas were lit that night in Beijing. The view was like Diwali. The report of the Dialogue Committee said that the communist leaders were also congratulating among themselves. There is a reason for this obsession. Abe had coined a quadrangular security dialogue (Quad) to deter the threat of aggression from expansionist Red China.

 

The Japanese prime minister was its architect. This 66-year-old Shinzo Abe, as part of his sharp visionary strategy, was strengthening regional geographical sovereignty through the cooperation of joint military forces of India, Japan, Australia and America.

 

By communist colonialism in East Asia, the giant China should not take over the neighboring independent independent republics like Taiwan, South Korea, Vietnam etc. This conspiracy had to be stopped. The terror of the Chinese dragons is imminent. This was the basic reason why Shinzo Abe should be removed so that China’s main enemy would be eliminated.

 

The relationship between Abe and Narendra Modi like self-fraternity, ultimate harmony was created due to these reasons. Both are considered great nationalists. Abe a little more. They wanted to restore the historical power and grandeur of Japan. America, victorious from Japan’s crushing defeat in World War II, had imposed Article 9 in its constitution. Under this, the self-defense army of Japan was eliminated. America had taken over the entire contract for his protection.

 

This is the incident of 1946. Demolished Japan was bowed down by dropping atomic bombs on Hiroshima and Nagasaki. However, in the Second World War, there was full sympathy and support of the majority of the Indian people towards Japan. In the formation of the Azad Hind Fauj of Netaji Subhas Chandra Bose himself, Japan had helped Netaji by freeing the British-Indian soldiers (Jats, Sikhs, Rajputs etc.) from their captivity.

 

These same Japanese soldiers liberated the Andaman Islands and Imphal (Manipur) from the British colonial occupation in October 1943. Naturally, the gratitude of the common Indian towards the Japanese Liberation Army remained.

 

It is to be remembered that at the same time, after being released from the Almora jail, Jawaharlal Nehru had said in the general meeting of Ranikhet: “We will oppose the entry of the Azad Hind Fauj of the non-violent Indian Subhas Chandra Bose into India by military force with sticks.”

 

In the same period, Nehru was released (15 January 1946) from Almora jail (imprisonment for the second time) and was addressing a public meeting in Ranikhet Nagar, nearby (via Nainital). There was the exclamation of this Congress leader: “Had I been outside the prison, I would have fought the soldiers of the Azad Hind Fauj in the Andaman Islands with a rifle.”

 

This is an excerpt from an excerpt from a speech heard in Kakori case accused Ramkrishna Khatri’s autobiography “Martyrs Ke Saaye Mein” (Exclusive Publications, New Delhi, and its latest first edition (January 1968: Visva-Bharati Publications). Padmashree freedom fighter Late Bachnesh Tripathi has also mentioned.

 

Khatriji’s son Uday is a resident of Lucknow. That is, it is proved that even after ten years the bitterness of the enmity that had arisen with Subhash Babu at the Tripuri (March 1939) Congress conference was maintained by Nehru. There is a need to make known this fact of Nehru’s ideal liberal spirit.

 

In this connection Shinzo Abe’s visit to the Yasukuni shrine near Tokyo for worship was also controversial. In this place, there is a mausoleum of about 2.5 lakh Japanese patriots of the last hundred years. In the last decades, they were all martyrs in the defense of the nation. But Maoist China considers Yasukuni’s pilgrimage to be a sign of imperialist lust.

 

It is here that all those who had driven the British army and navy from South-East Asia are also buried. His commander’s name was Admiral Louis Mountbatten, who administered the oath of Prime Minister to Jawaharlal Nehru.

 

The importance and sanctity of this Yasukuni pilgrimage site in Tokyo is the same for ordinary Japanese citizens as it is for the Indians of Jallianwala Bagh and Somnath. The blood of freedom-loving Indians was shed in these holy places.

 

Shinzo Abe was outraged that the victorious US general, General Douglas MacArthur, had made Japan’s nationalism a club by adding Article 9 to the Constitution. Abe wanted Japan to establish its own National Security Forces in the new environment.

 

Only then, at the time of war with communist China, should not be dependent on the army of any other nation. The sole aim of the new military power is self-defense. The example is of India, which has been building a strong army since 1962, after losing to China. Abe’s effort was also that the Indian Ocean, Pacific Ocean etc. In the coastal areas, China’s huge navy could be competed strongly. That is the purpose of the quad strategy.

 

Abe’s slogan was also: “Let these quads emerge as a narrative of freedom and development.” Fearful of danger, Communist China remains apprehensive and plagued by Abe and Narendra Modi. The assassination of Abe left the leader and leader of the Quad synergy. Red China rejoiced. Now India is responsible for the operation of Quad. The reason is that India has the maximum threat from military power to China. Its regions are Ladakh, Arunachal and Northeast especially.

 

India has suffered the most due to the untimely departure of Shinzo Abe. Much more to his nationalist prime minister.

 

 

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