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सिन्हा के सपने ! सच कितने ? भाग – 1 sinha ke sapane ! sach kitane ? bhaag – 1

©के. विक्रम राव, नई दिल्ली

-लेखक इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।


 

 

         नौकरशाही से राजनीति में प्रविष्ट हुये यशवंत सिन्हा को यदि कुछ भी लाज—लिहाज हो तो राष्ट्रपति चुनाव से हट जायें। हजारीबाग में अपने व्यवसाय को देखें। व्यापार बढ़ायें, ज्यादा मुनाफा कमायें। राजनीति में हनीमून पर दोबारा आये हैं। अब पूरा हो गया। क्योंकि जनसेवा तो राजनीति में अब चन्द निस्वार्थ जन के लिये ही रह गयी है।

 

यशवंत सिन्हा को इसी जुलाई 1 को ही नाम वापस ले लेना चाहिये था, जब उनकी प्रस्ताविका कुमारी ममता बनर्जी ने कहा था : ”भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रपति पद हेतु राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को चुनावी मैदान में उतारने से पहले विपक्ष के साथ चर्चा की होती तो विपक्षी दल उनका समर्थन करने पर विचार कर सकते थे।”

 

उन्होंने यह भी कहा कि ”मुर्मू के पास 18 जुलाई होने वाले राष्ट्रपति चुनाव जीतने की बेहतर संभावना है, क्योंकि महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बाद एनडीए की स्थिति मजबूत हुयी है।”

 

उत्तर प्रदेश जो राष्ट्रीय राजनीति का ध्रुव केन्द्र है में यशवंत सिन्हा के लिये धूमधाम से अखिलेश यादव ने समर्थन जुटाया। पर दरार पड़ गयी। चचा शिवपाल के शब्दों में भतीजा अपरिपक्व हैं। मगर नासमझी इस कदर ? ओमप्रकाश राजभर को न बैठक में बुलाया। न उनसे सिन्हा के लिये समर्थन मांगा।

 

खिसियाये राजभर योगी आदित्यनाथ के घर पर डिनर खाने चले गये। वहां द्रौपदी मुर्मू के लिये सभी अपने वोट की घोषणा कर रहे थे। वहीं शिवपाल सिंह भी वादा कर आये। शिवपाल समाजवादी पार्टी के कुछ और वोट काट सकते हैं।

 

उन्होंने ने कहा कि ”मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति चुनाव में राजग प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट मांगा है। लिहाजा मैं मुर्मू को ही वोट करूंगा।” श्री यादव ने यहां कहा, ”मैंने पहले ही कहा था, राष्ट्रपति चुनाव में जो प्रत्याशी मुझसे वोट मांगेगा, मैं उसके पक्ष में वोट करुंगा।

 

योगी आदित्यनाथ ने मुझसे (द्रौपदी मुर्मू के लिये) वोट देने को कहा था और मैंने फैसला किया है कि मैं उन्हें वोट दूंगा।” जयंत चौधरी बच गये। सपा मुखिया के साथ रह गये। मगर क्या फर्क डाल पायेंगे ?

 

सिलसिलेवार अन्य राज्यों पर गौर करें। अन्नाद्रमुक और अन्य सहयोगी दल एनडीए की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेंगे। मुर्मू ने अन्नाद्रमुक नेताओं—के. पलानीस्वामी और ओ. पन्नीरसेल्वम, तमिल मनीला कांग्रेस के अध्यक्ष जी. के. वासन, पट्टाली मक्कल काचि (पीएमके) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास से मुलाकात की।

 

सभी ने उनके प्रति समर्थन व्यक्त किया। वहीं शिरोमणी अकाली दल (शिअद) ने भी कहा कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की उम्मीदवार का समर्थन करेगा। शिअद ने मुर्मू का समर्थन करने का फैसला किया है।

 

पार्टी का मानना है कि वह अल्पसंख्यकों, शोषित और पिछड़े वर्गों के साथ—साथ महिलाओं की प्रतीक है। देश में गरीब व आदिवासी वर्गों के प्रतीक के रुप में उभरी हैं। यही वजह है कि पार्टी राष्ट्रपति चुनाव में उनका समर्थन करेगी। ”सिख समुदाय पर अत्याचारों के कारण हम कांग्रेस के साथ कभी नहीं जायेंगे।”

 

part 1 of 2

 

 

Sinha’s dreams Really how many? part 1

 

 

©K. Vikram Rao, New Delhi

The author is the National President of the Indian Federation of Working Journalists (IFWJ).


 

 

Yashwant Sinha, who entered politics from the bureaucracy, should withdraw from the presidential election if he has any shame. View your business in Hazaribagh. Grow business, earn more profit. Coming back on honeymoon in politics. Now completed. Because public service is now only for a few selfless people in politics.

 

Yashwant Sinha should have pulled out on July 1, when his proponent Kumari Mamata Banerjee said: “The Bharatiya Janata Party prevented the National Democratic Alliance (NDA) candidate from fielding Draupadi Murmu for the presidency. Had discussed with the opposition earlier, the opposition parties could have considered supporting them.

 

He also said that “Murmu has a better chance of winning the presidential election to be held on July 18, as the NDA’s position has strengthened after the change of power in Maharashtra”.

 

In Uttar Pradesh which is the pole center of national politics, Akhilesh Yadav gathered support for Yashwant Sinha with great pomp. But there was a crack. In the words of uncle Shivpal, the nephew is immature. But so ignorant? Om Prakash Rajbhar was not invited to the meeting. Neither asked him for support for Sinha.

 

The gleeful Rajbhar went to Yogi Adityanath’s house to have dinner. There everyone was declaring their vote for Draupadi Murmu. At the same time Shivpal Singh also came with a promise. Shivpal can cut some more votes of Samajwadi Party.

 

He said that “Chief Minister Yogi Adityanath has sought votes in favor of NDA candidate Draupadi Murmu in the presidential election. So I will vote for Murmu only.

 

Yogi Adityanath had asked me to vote (for Draupadi Murmu) and I have decided that I will vote for her.” Jayant Chaudhary survived. stayed with the SP chief. But what difference can you make?

 

Look at the other states sequentially. AIADMK and other allies will support NDA candidate Draupadi Murmu. Murmu slams AIADMK leaders-K. Palaniswami and O. Panneerselvam, Tamil Manila Congress President G. Of. Vasan called on Dr. Anbumani Ramadoss, President, Pattali Makkal Katchi (PMK).

 

Everyone expressed their support for him. Shiromani Akali Dal (SAD) also said that it will support the National Democratic Alliance (NDA) candidate. The SAD has decided to support Murmu.

 

The party believes that she is a symbol of minorities, exploited and backward classes as well as women. Has emerged as a symbol of poor and tribal classes in the country. This is the reason why the party will support him in the presidential election. “We will never go with the Congress because of the atrocities on the Sikh community.”

 

 part 1 of 2

 

 

बच्चे को निगला तो गांव वालों ने मगरमच्छ को बनाया बंधक, बोले- मासूम को पेट से बाहर निकाले तब ही छोड़ेंगे bachche ko nigala to gaanv vaalon ne magaramachchh ko banaaya bandhak, bole- maasoom ko pet se baahar nikaale tab hee chhodeng

 

 

 

 

 

 

 

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