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आरटीआई लगाने पर एक दलित को इतन बड़ी सजा aarateeaee lagaane par ek dalit ko itan badee saja

नरेश कुमार कोसले

 

 

ये मामला छत्तीसगढ़ रायपुर के वेगन रिपेयर शॉप (रेल कारखाना) का है, जहां टेकनिशियन के पद पर कार्यरत थे श्री नरेश कुमार कोसले। ये दलित समाज से ताल्लुक रखते हैं। इन्होंने देखा कि रेल कारखाने में ठेकेदार के मजदूर काम करते हैं। इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। नई भर्ती बंद कर दी गई है। जहां रेल में नौकरी के लिए 10वीं पास आईटीआई मांगा जा रहा है, वहां अकुशल ठेका मजदूर को काम पर लिया जा रहा है। इसी संबंध में नरेश कोसले ने आरटीआई कानून 2005 के तहत 5 बिन्दुओं में 13 जनवरी 2021 को रेल कारखाना प्रशासन से जानकारी मांगी। यहां ये जानना जरूरी है कि वे 5 बिन्दु क्या थे।

 

  1. यह कि भारत सरकार द्वारा रेलवे बोर्ड किस वर्ष ठेकेदारी पर काम होने हेतु आदेश जारी किया? व जानकारी की सत्यारपित छायाप्रति।
  2. यह कि भारत सरकार द्वारा जारी निगमीकरण करने का था पर रेलवे द्वारा तो निजीकरण कर रहा है। आदेश की सत्यापित छायाप्रति।
  3. यह कि वर्तमान रेलवे कारखाना अधिनियम के अंतर्गत रेल कारखाना में भर्ती की योग्याता 10 वीं पास एवं संबंधित ट्रेड से आई टी आई होना अनिवार्य होता है। ठेका मजदूरों की योग्यता व पुलिस वेरिफिकेशन की जानकारी, सत्यायपित छायाप्रति।
  4. यह कि वर्तमान रेलवे कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कोई भी व्याक्ति 3 माह से अधिक एक जगह पर कार्य करता है तो उसे नियमित किया जाता है और वर्तमान में ठेका मजदूरों के साथ ऐसा नहीं हो रहा है। इस संबंध में रेलवे द्वारा आदेश की जानकारी की सत्यापित छायाप्रति।
  5. यह कि रेलवे द्वारा ठेका मजदूरों को कितना मजदूरी देने का प्रावधान है? के आदेश की जानकारी की सत्यापित छायाप्रति।

इस पत्र के जवाब में 30 अक्टूबर 2021 को प्रबंधन ने बिन्दु 1, 2, 4 की जानकारी नहीं होना बताया। साथ ही बिन्दु क्रमांक 3 में ठेका मजदूर की योग्यता के संबंध में जानकारी नहीं होने एवं पुलिस वेरिफिकेशन की छायाप्रति 7 पृष्ठों में उपलब्ध कराई गई। बिन्दु 5 में कहा गया कि ठेका मजदूरों को सीधे मजदूरी दिए जाने का प्रावधान नहीं है। यह प्रश्न उठता है कि बिना आदेश के प्रबंधन ठेका मजदूर को कैसे कारखाने में प्रवेश दे रहा है। या फिर जानकारी जानबूझकर छि‍‍पाई गई।

इसके बाद 28 जनवरी 2022 को पत्रिका समाचार पत्र में वैगन रिपेयर शॅाप से संबंधित शीर्षक ‘रेल कारखाने में बढ़ रहा है निजीकरण का दायरा, 2200 कर्मियों में हड़कंप’ प्रकाशित हुआ। इस समाचार में न ही उस सूचना का प्रयोग किया गया। न ही आवेदक नरेश कोसले का जिक्र हुआ। यदि होता भी तो भी वह गैर कानूनी नहीं था क्योंकि सूचना के अधिकार में प्राप्त जानकारी को प्रकाशित या सार्वजनिक किया जा सकता है।

 

इसके बाद कारखाना के कर्मशाला प्रबंधक महेश कुमार ने कारण बताओ नोटिस तात्कालीन रेल कर्मचारी श्री नरेश कुमार कोसले को 3 फरवरी 2022 को जारी किया। नोटिस में यह कहा गया कि आपके द्वारा आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई थी, जिसका उपयोग रेल प्रशासन की आलोचना के लिए किया गया है।

रेल कर्मचारी नरेश कोसले ने इस नोटिस का जवाब दिया।

 

इसके बाद कर्मशाला प्रबंधक महेश कुमार ने नरेश कोसले के जवाब से असंतुष्टा होते हुए आरटीआई लगाकर रेलवे को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए 30 मई 2022 को कारखाना के टेक्निशियन ग्रेड-1 पद से बर्खास्त कर दिया। जिसमें पेंशन का अधिकार भी छीन लिया गया।

 

यह पूरे देश में किसी कर्मचारी द्वारा आरटीआई से जानकारी मांगे जाने पर बर्खास्त किए जाने का पहला मामला है। यहां पर कर्मचारी का दलित होना भी उसकी बर्खास्तगी का मुख्य कारण है। सबसे मुख्य बात यह है कि कारखाना प्रबंधन ने मांगी गई जानकारी आवेदक को नहीं दी। ना ही पत्रिका समाचार पत्र में उसका जिक्र हुआ।

जहां एक ओर रेलवे में बढ़ते निजीकरण से कर्मचारी वर्ग परेशान है, वहीं दूसरी ओर किसी कर्मचारी को आरटीआई से जानकारी मांगने पर बर्खास्त किया जाना अनुचित प्रतीत होता है। इस पर देशभर के केन्द्रीय एवं राज्य कर्मचारी संगठनों में रोष है। कानूनी कार्यवाही एवं धरना- प्रदर्शन के लिए एकजुट हो रहे हैं। जहां एक ओर लोकतंत्र को मजबूत करने हेतु सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 जैसे कानून दिए गए हैं, प्रेस की स्वअतंत्रता निहीत की गई है। वहीं दूसरी ओर किसी कर्मचारी का गला सिर्फ इस लिए घोंटा जा रहा है क्योंकि उसने उन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए कदम उठाया था। यह एक बड़ा दुर्भाग्य है।

 

नरेश कुमार कोशले

Mr. Naresh Kumar Kosle

 

 

Such a big punishment for a dalit for applying RTI

 

This case is of Vegan Repair Shop (Rail Workshop) of Raipur, Chhattisgarh, where Mr. Naresh Kumar Kosle was working as a technician. They belong to Dalit society. He saw that the laborers of the contractor work in the railway factory. Their number is increasing. New Recruitment has been closed. Where 10th pass ITI is being sought for jobs in Railways, unskilled contract laborers are being hired.  In this regard, Naresh Kosle sought information from the Railway Factory Administration on 13 January 2021 in 5 points under the RTI Act 2005. Here it is important to know what those 5 points were.

 

  1. In which year Railway Board issued an order for contract work by the Government of India? And attested photocopy of the information.
  2. That it was meant to be corporatized by the Government of India but is being privatized by the Railways. Attested photocopy of the order.
  3. That under the current Railway Factory Act, it is mandatory to have 10th pass and ITI from the relevant trade for recruitment in Rail Factory. Information about qualification and police verification of contract laborers, attested photocopy.
  4. That under the existing Railway Factories Act, if any person works in one place for more than 3 months, then he is regularized and at present this is not happening with the contract laborers. Attested photocopy of the information of the order issued by the Railways in this regard.
  5. That there is a provision to pay how much wages to the contract laborers by the Railways? Attested photocopy of order information.

 

In response to this letter, on October 30, 2021, the management stated that there was no information about point 1, 2, 4. Also, in point number 3, there was no information regarding the qualification of the contract laborer and a photocopy of police verification was made available in 7 pages. In point 5, it was said that there is no provision for direct payment of wages to the contract labourers. The question arises as to how the management is allowing the contract labor to enter the factory without orders. Or the information was deliberately concealed.

 

After this, on January 28, 2022, the title related to Wagon Repair Shop was published in the magazine ‘Rail factory is increasing the scope of privatization, 2200 workers stirred’. Neither that information was used in this news. Nor was there any mention of the applicant Naresh Kosle. Even if it was, it was not illegal because the information obtained under the Right to Information can be published or made public.

 

After this, the workshop manager of the factory, Mahesh Kumar, issued a show cause notice to the then railway employee Shri Naresh Kumar Kosale on 3 February 2022. In the notice it was said that information was sought by you under RTI, which has been used to criticize the railway administration.

 

Railway employee Naresh Kosale replied to this notice.

 

After this, the workshop manager Mahesh Kumar, being dissatisfied with the reply of Naresh Kosale, was dismissed from the post of Technician Grade-1 of the factory on 30 May 2022, alleging that the railway was defamed by applying RTI. In which the right to pension was also taken away.

 

This is the first case in the entire country of an employee being sacked for seeking information through RTI. Here the employee being a Dalit is also the main reason for his dismissal. The most important thing is that the factory management did not give the requested information to the applicant. Nor was it mentioned in the magazine newspaper.

 

While on the one hand the increasing privatization in the railways has upset the working class, on the other hand it seems unfair to sack an employee for seeking information from RTI. There is anger among the Central and State employees organizations across the country on this. Uniting for legal action and dharna-demonstration. While on the one hand laws like Right to Information Act 2005 have been given to strengthen democracy, freedom of the press has been implied. On the other hand, an employee is being strangled just because he had taken steps to protect those democratic values. This is a great misfortune.

 

 

 

 

©संजीव खुदशाह

परिचय- रायपुर, छत्तीसगढ़

लेखक देश में चोटी के दलित लेखकों में शुमार किए जाते हैं और प्रगतिशील विचारक, कवि, कथाकार, समीक्षक, आलोचक एवं पत्रकार के रूप में भी जाने जाते हैं। “सफाई कामगार समुदाय” एवं “आधुनिक भारत में पिछड़ा वर्ग”, “दलित चेतना और कुछ जरुरी सवाल” आपकी चर्चित कृतियों में शामिल है। आपकी किताबों का मराठी, पंजाबी, ओडिया सहित अन्य भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

लेखक परिचय :- जन्म 12 फरवरी 1973 को बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ। शिक्षा एमए, एलएलबी। आप देश में चोटी के दलित लेखकों में शुमार किए जाते हैं और प्रगतिशील विचारक, कवि, कथाकार, समीक्षक, आलोचक एवं पत्रकार के रूप में भी जाने जाते हैं। आपकी रचनाएं देश की लगभग सभी अग्रणी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकीं हैं। “सफाई कामगार समुदाय” एवं “आधुनिक भारत में पिछड़ा वर्ग”, “दलित चेतना और कुछ जरुरी सवाल” आपकी चर्चित कृतियों में शामिल है। आपकी किताबों का मराठी, पंजाबी, ओडिया सहित अन्य भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। आपकी पहचान मिमिक्री कलाकार और नाट्यकर्मी के रूप में भी स्थापित है। छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य सम्मेलन से निबंध विधा के लिए पुर्ननवा पुरस्कार सहित आप कई पुरस्‍कार एवं सम्मान से सम्मानित किए जा चुके हैं।

E-mail- sanjeevkhudshah@gmail.com

 

 

 

105 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकल आया राहुल साहू 105 ghante ke reskyoo opareshan ke baad surakshit baahar nikal aaya raahul saahoo

 

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