Explainer- डायनासोर जैसे रोबोट्स- करोड़ों साल पुराने जीवों को फिर से जीवित करने की अनोखी कोशिश!
Explainer- डायनासोर का नाम सुनते ही ज़हन में बड़े विशालकाय और विलुप्त जीवों की छवि उभर आती है। यह सोच पाना भी कठिन है कि इंसानों ने अब इन विलुप्त प्रजातियों के रोबोट बनाने की ठानी है। दरअसल, वैज्ञानिक अब ऐसे यंत्र तैयार कर रहे हैं जो इन प्राचीन जीवों के शरीर विज्ञान को सटीक रूप से दर्शा सकें, जिससे उनके जीवन, चलने-फिरने और विकासक्रम को समझने में आसानी हो सके। इसे ‘पैलियो-इंस्पायर्ड रोबोटिक्स’ का नाम दिया गया है, जिसमें विज्ञान और प्रागैतिहासिकता का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।

क्या है डायनासोर रोबोट्स बनाने का उद्देश्य?
Explainer- डायनासोर रोबोट्स बनाने का उद्देश्य केवल किसी एनीमेशन या सिम्यूलेशन तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक इन रोबोट्स का उपयोग करके प्राचीन जीवों के जीवन और उनकी गतिविधियों को वास्तविक समय में स्टडी करने का प्रयास कर रहे हैं। इस नई तकनीक से यह जानने में मदद मिलेगी कि कैसे करोड़ों साल पहले पानी से निकलकर प्राचीन मछलियों ने चलना सीखा और धरती पर अपने अस्तित्व की नई शुरुआत की। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन मॉडलों की मदद से कई ऐसे सवालों के उत्तर मिल सकते हैं, जो अब तक केवल अनुमान पर आधारित थे।
कैसे करते हैं वैज्ञानिक इस रोबोटिक्स का प्रयोग?
Explainer- कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के डॉ. माइकल इशिदा की अगुआई में एक टीम ऐसे रोबोट्स का निर्माण कर रही है जो विलुप्त मडस्किपर उभयचर (जल और भूमि दोनों पर जीवित रहने वाली मछलियां) की तरह दिखते और चलते हैं। इन रोबोट्स के माध्यम से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि कैसे इन मछलियों ने दलदली क्षेत्र में चलना सीखा होगा। इस शोध से जीवन के विकासक्रम में प्राचीन प्रजातियों के मेटामॉरफोसिस और धरती पर उनके अस्तित्व के अनुकूलन को समझने में काफी मदद मिलेगी।

क्यों है यह रिसर्च विशेष?
- विलुप्त प्रजातियों का असल जीवन रूप में अध्ययन: जहां अन्य रोबोटिक्स प्रोजेक्ट्स आज के जीवों की नकल करते हैं, वहीं इस रिसर्च का ध्यान उन प्रजातियों पर है, जो अब पूरी तरह से विलुप्त हो चुकी हैं। यह विज्ञान के क्षेत्र में पहली बार हो रहा है कि करोड़ों साल पुराने जीवों को फिर से “जीवित” कर उनकी जीवनशैली का अध्ययन किया जाएगा।
- विकासक्रम का तेज़ सिम्यूलेशन: प्राकृतिक विकासक्रम में लाखों साल लगते हैं, लेकिन रोबोटिक्स के माध्यम से वैज्ञानिक इसे एक दिन में भी सिम्यूलेट कर सकते हैं। डॉ. इशिदा के मुताबिक, एक साधारण कोड या 3डी प्रिंटिंग द्वारा बनाए गए रोबोट की टांग के माध्यम से हजारों सालों का विकासक्रम सरलता से दर्शाया जा सकता है।
- नए सवालों के उत्तर: इस रिसर्च से यह जानने में सहायता मिल सकती है कि रीढ़धारी जीव पानी से निकलकर धरती पर कैसे चले, और कैसे कुछ डायनासोर उड़ने में सक्षम हुए, जिससे आज के पक्षियों की उत्पत्ति हुई।

भविष्य में इस रिसर्च का प्रभाव
Explainer- यह रिसर्च न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बल्कि जैविक विकासक्रम को समझने के लिए एक नया आयाम खोल सकती है। इसकी मदद से हमें यह जानने का अवसर मिलेगा कि कैसे जीवन ने कठिनतम परिस्थितियों का सामना कर अपने अस्तित्व को बनाए रखा और धरती पर अपनी पकड़ बनाई।
Explainer- अत: यह कहना गलत नहीं होगा कि डायनासोर जैसे रोबोट्स बनाकर हम प्राचीन जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देख रहे हैं और इससे हमारी सभ्यता को नई अंतर्दृष्टि मिलने की संभावना है।

? सोशल मीडिया
फेसबुक पेज में जुड़ने के लिए क्लिक करें
https://www.facebook.com/onlinebulletindotin
व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/Cj1zs5ocireHsUffFGTSld

ONLINE bulletin dot ।n में प्रतिदिन सरकारी नौकरी, सरकारी योजनाएं, परीक्षा पाठ्यक्रम, समय सारिणी, परीक्षा परिणाम, सम-सामयिक विषयों और कई अन्य के लिए onlinebulletin.in का अनुसरण करते रहें.
? अगर आपका कोई भाई, दोस्त या रिलेटिव ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन में प्रकाशित किए जाने वाले सरकारी भर्तियों के लिए एलिजिबल है तो उन तक onlinebulletin.in को जरूर पहुंचाएं।












