Groom is not allowed to celebrate the wedding night- सुहागरात पर दूल्हे को चैन से नहीं रहने देते! ‘चारीवारी’ परंपरा का क्या है राज?

Groom is not allowed to celebrate the wedding night-

Groom is not allowed to celebrate the wedding night- शादी हर समाज में एक महत्वपूर्ण परंपरा है, लेकिन दुनिया भर में इससे जुड़े रिवाज इतने अलग और अनोखे होते हैं कि कई बार उन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक रोचक और हैरान करने वाला रिवाज फ्रांस में निभाया जाता है। यहां सुहागरात के दौरान नवविवाहित जोड़े को एक शांत और रोमांटिक रात बिताने का मौका नहीं मिलता।

क्या है ‘चारीवारी’ परंपरा?

Groom is not allowed to celebrate the wedding night- फ्रांस में शादी के बाद की रात यानी सुहागरात को लेकर एक अनोखी परंपरा प्रचलित है, जिसे ‘चारीवारी’ (Charivari) के नाम से जाना जाता है। इस परंपरा के अनुसार, जब नवविवाहित जोड़ा शादी के बाद अपनी पहली रात मनाने के लिए अपने कमरे में जाता है, तो उनके रिश्तेदार, दोस्त और परिजन उनके घर के बाहर बर्तन, ड्रम और अन्य चीजें बजाकर जोर-जोर से शोर मचाते हैं।

क्यों मचाते हैं शोर?

Groom is not allowed to celebrate the wedding night- इस परंपरा के पीछे एक खास मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि इस शोर से नवविवाहित जोड़े के घर से सारी नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है। इस शोर-शराबे को खुशहाली और सकारात्मकता लाने का प्रतीक माना जाता है।

आधी रात में बाहर बुलाते हैं जोड़े को

Groom is not allowed to celebrate the wedding night- चारीवारी की परंपरा यहीं खत्म नहीं होती। आधी रात में इस जोड़े को कमरे से बाहर बुलाकर उनके साथ हंसी-मजाक किया जाता है। रिश्तेदार और दोस्त उन्हें ड्रिंक्स और खाने-पीने की चीजें ऑफर करते हैं। इस दौरान जोड़े को शांति से एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका नहीं दिया जाता।

सदियों पुरानी परंपरा

Groom is not allowed to celebrate the wedding night- चारीवारी की परंपरा फ्रांस में सदियों से चली आ रही है। पहले यह रिवाज मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में होता था, लेकिन अब इसे पूरे फ्रांस में खासतौर पर उत्सव का हिस्सा माना जाता है।

क्या इस परंपरा का कोई वैज्ञानिक आधार है?

Groom is not allowed to celebrate the wedding night- वैसे तो इस परंपरा का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन इसे सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर नवविवाहित जोड़े के जीवन में खुशी और सकारात्मकता लाने का जरिया माना जाता है। यह परंपरा रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ हंसी-मजाक और नजदीकी बढ़ाने का भी प्रतीक है।

इस अनोखी परंपरा से हमें क्या सीखने को मिलता है?

Groom is not allowed to celebrate the wedding night- चारीवारी जैसी परंपराएं हमें यह सिखाती हैं कि हर समाज में शादी और रिश्तों को लेकर अलग-अलग धारणाएं और मान्यताएं हो सकती हैं। ये परंपराएं सामाजिक जुड़ाव और सामूहिक खुशी का प्रतीक हैं।



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