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ज्ञानमणि Gyanmani

©अशोक कुमार यादव

परिचय– मुंगेली, छत्तीसगढ़.


 

कोई बन सपेरा नचा रहा है मुझे ?

अपनी बीन के सुमधुर धुन पर।

लहराकर, झूमकर नाच रहा हूं,

जादुई आवाज को सुन-सुन कर।।

 

मेरी चारों ओर फैलाया मंत्र जाल,

मुझे कोड़ा से पीट रहा है प्रेत दूत।

तू ही रास्ता दिखाता है विश्व को,

निकालो मस्तक से जो है अद्भुत।।

 

मेरे पास है दिव्यमान ज्ञानमणि,

जन मन को करता है प्रकाशित।

छीनकर मुझसे ले जाएगा वंचक,

जिसे दिया था गुरुदेव कर्मातीत।।

 

फिर क्या रह जाएगा जीवन में ?

इसे खोने के बाद तमस-ही-तमस।

बन अंधा टकराऊंगा शिलाओं पर,

सिर पटक करूंगा आत्म सर्वनाश।।

 

कोई छीन नहीं सकता मेरी प्रतिभा ?

बदलूंगा अपनी रूप,मैं हूं इच्छाधारी।

कर्म करके प्रभु से मिला है वरदान,

जय आशीष दिया है भोले भंडारी।।

 

 

अशोक कुमार यादव

Ashok Kumar Yadav

 

 

 

 Gyanmani

 

 

 

Is someone making me a snake charmer?
To the melodious tune of your bean.
Waving, dancing and dancing,
Listening to the magical voice.

 

The mantra nets spread around me,
The ghost angel is beating me with a whip.
You show the way to the world,
Take out what is wonderful from the head.

 

I have divine knowledge,
Publishes the public mind.
Will snatch and take away from me,
To whom Gurudev was given Karmateet.

 

Then what will remain in life?
Tamas-hee-tamas after losing it.
I will collide blindly on the rocks,
I will bang my head and self-destruct.

 

No one can take away my talent?
I will change my form, I am wishful.
Got a boon from the Lord by doing karma,
Jai Ashish has given you Bhole Bhandari.

 

 

जूही की महक, कहानी – भाग एक joohee kee mahak, kahaanee – bhaag ek

 

 

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