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नाग पंचमी naag panchamee

@अरुणा अग्रवाल


 

 

आज हो रहा नाग देवता का पूजन,

भारतवर्ष की सभ्यता,संस्कृति,सुमन,

प्रायः सब जीव जन्तु की होती पूजा,

इसी कड़ी में आता “नाग पंचमी” उत्तम।।

 

शेष नाग पर करते शयन स्वयं मुरारी,

माता लक्ष्मी संग हर्षित,अधर,उपर,

देते संदेश कि नाग भी जीव,पूजित,

सृष्टि में है सबका अपना वचर्स्व,मित।।

 

शिवजी के गल-माल रूपे सर्प शोभित

पीते गरल आशुतोष मिटाने मनुज का,

आधि,व्याधि,उपाधि का दुःख,हरते,

अमृत बदले में संसार को हैं पिलाते।।

 

नाग,नागीन का है अपना संम्प्रदाय,

चूहा,सर्प,अर्ध-चन्द्रमाधारी,शंकर,

देते अभय,सुख,सौभाग्य का आशीष

सावन माह कृष्णपक्ष पचंमी,विशेष।।

 

दुग्ध पिलाते नाग देव,देवी,जनमानस,

ललना लली करते पूजा,अर्चना,सुबास

धूप,दीप,नारियल,फूल औ कुमकुम,

होता नागदेव का पूजन,उत्तम-राम।।

 

भाई बहन का प्यार का प्रतीक,

“नाग-पंचमी”है बहन का सुखद,

सुकून,सौभाग्य का पालनहार,

कभी नाग कर देते चोटिल,अरु,

फिर भी “नाग-पंचमी”है पर्व,सुधीर।।

 

अरुणा अग्रवाल

 

NAG PANCHAMl

 

 

Nag Panchami, great festival

Traditional,religious,moral,

India being,glorious,country,

Has the theme of ‘”Unity in diversity..

 

Nagdev is our native God,

From ancient time,respected

And the process is going on,

females worship him as brother.

 

Nag is the ornament of Shiva,

He wears it around ,neck,

It represents positivity,

and blesses peace for all.

 

Lord Sankar drank poison,

Other hand gave nectar

And this is the motto of the,

Glorious, occasion of Nag-

Panchami,mythologically ,great

 

God Vishnu sleeps on Shesha – Nag,with Laxmi over KsheeraSagar with eyes closed,

All the above narrate the,

Value,worth of Nag-Panchami.

 

 

अनुसूचित जाति के शख्स की सवर्ण पत्नी, सुप्रीम कोर्ट का ससुर को नोटिस, जानें मामला anusoochit jaati ke shakhs kee savarn patnee, supreem kort ka sasur ko notis, jaanen maamala

 

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