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हम भारत के मूलनिवासी we are native of india

©जलेश्वरी गेंदले, शिक्षिका

परिचय- मुंगेली, छत्तीसगढ़.


 

हम भारत के मूलनिवासी

 जब जाग जाएंगे।

 तेरे जुल्मों सितम से नहीं डरने वाले

 हम समता, न्याय, बंधुत्व बनाएंगे

 अखंड भारत का सपना सजाएंगे

 सह लिया जुल्म तेरा

 अत्याचार अब और नहीं।

 

मार दिया तुमने पानी के प्यासे इंद्र मेघवाल को

क्यों ? तरस नहीं आया पानी बरसाने वाले को,

नारी की अपमान सदियों होते आया

आज भी लूट रही इज्जत बानो की

जला दिया हवस की पुजारी

अंकिता जैसे मजलूम बेबस नारी

अत्याचार अब और नहीं।

 

फैलाओ भय, अत्याचार तुम कहीं

कर सम्मान पापियों का

 तेरा सपना सच ना हो पाएगा

मूलनिवासी जब एक हो जाएगा

अत्याचार अब और नहीं।

 

जाग गया है बहुजन तू जान लिया भी

बंद करके देख एक बार बेईमानी नियत अपना सही

तेरे फैलाए भय से एक चिंगारी पैदा होगा

तेरा अन्याय व अमानवीय सामाजिक व्यवस्था

को जलाएगा,

कर तू अब इंतजार सही

अत्याचार अब और नहीं।

 

रोक सको तो रोक लो

हम जैसे इंकलाबी कोई और नहीं

पुरखा हमारी सहते आए हैं

ऊंच-नीच भेदभाव

यहां जो कहीं और नही

मजदूर, किसान, शिल्पकार, सैनिक

बैठा दिए तुम्हें राज सिंहासन पर

उतर जाओगे वैसे ही

ये दम रखते हैं अभी

सोचो तो तनिक

अत्याचार अब और नहीं।

 

सच्चे न्याय की बात करते हो

साम, दाम, दंड, भेद नीति छोड़ सही

अपना लिए हम तेरा ही रास्ता कहीं

क्या होगा तेरा सोच सही

मानवता पर हम चलने वाले

मानवता के गीत गाएंगे

अत्याचार अब और नहीं।

 

सुन अब पाखंडी

लाख कर जतन

हम न मिटने देंगे अपना वतन

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अपनी आजादी के लिए जुल्मों से टकराएंगे

हम भारत के मूलनिवासी

मानवता पर चल तेरा

अमानवीय साम्राज्य मिटाएंगे

अत्याचार और अब नहीं।

 

फैलाओ दहशत, भय तुम

भीमा कोरेगांव हम याद दिला आएंगे

महापुरुषों की जज्बा संघर्ष

 याद कर ज्वाला बन जाएंगे

अब वह दिन दूर नहीं

कर ले राज तुम अभी

वक्त आएगा बिना आवाज के तेरा सर्वनाश

कर जाएगा,

मानसिक गुलामी छोड़

बहुजन स्वाभिमान जाग जाए कहीं

अत्याचार अब और नहीं।

 

 

Jaleshwari Gendle


 

 

we are native of india

 

 

 

we are native of india
When you will wake up
Those who are not afraid of your atrocities
We will create equality, justice, fraternity
Will decorate the dream of united India
tolerated your oppression
Torture no more.

You killed water thirsty Indra Meghwal
Why ? He did not feel sorry for the one who rained water,
Women have been humiliated for centuries
Bano’s respect is being robbed even today
burnt lust priest
A helpless woman like Ankita
Torture no more.

spread fear, tyranny somewhere you
tax honor sinners
your dream won’t come true
when the native will become one
Torture no more.

You have woken up, you have even known
Stop seeing once dishonesty fixed your right
A spark will be born from the fear you spread
Your injustice and inhuman social system
will burn
do you wait right now
Torture no more.

Stop me if you can
There is no revolution like us
ancestors have come to bear us
top-down discrimination
here nowhere else
Laborer, Farmer, Craftsman, Soldier
made you sit on the throne
you will get down
they hold their breath now
think a little
Torture no more.

तिरंगा tiranga
READ

talk of true justice
Good, price, punishment, difference policy left right
For myself, we are your way somewhere
what will be your thinking right
we walk on humanity
sing the songs of humanity
Torture no more.

hear now hypocrite
save a million
We will not let our country die
Will fight with oppressions for his freedom
we are native of india
walk on humanity
destroy the inhuman empire
Torture no more.

spread panic, you fear
We will remind you of Bhima Koregaon
struggle of great men
will become a flame by remembering
now that day is not far
do raj you right now
Time will come without your voice
will do,
give up mental slavery
Where should the Bahujan self-respect wake up?
Torture no more.

 

 

 

शिक्षा के संग कीजिये, भोजन उचित प्रबंध, पोषण सह बल से बढ़े, जीवन का अनुबंध shiksha ke sang keejie, bhojan uchit prabandh, poshan sah bal se badhe, jeevan ka anubandh

 

 

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