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दूध का उपकार doodh ka upakaar

©नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़

परिचय– मुंबई, आईटी सॉफ्टवेयर इंजीनियर.


 

विश्व दुग्ध दिवस पर विशेष

 

कभी गाय तो कभी बकरी ने इंसानों को पाला।

जिस्म से निकाल कर दुग्ध हम सभी को संभाला।

धारा बहती रही यहां मज़हब के नाम पे,

जहाँ बच्चे ने, कटोरे में छानकर,

बहन को दिया दूध से भरा प्याला।

 

उम्र कोई भी हो, दूध देता है फ़ायदे हज़ार,

जो करे दूध का सेवन न पड़े वो बीमार।

दूध मुहे बच्चे बिन दूध के एक पल जी न पाए,

माँ जो न हो उनकी, जानवर ही उनकी माँ बन जाए।

 

पौष्टिकता से भरपूर, दूध है हमारा आहार,

प्रकृति का वरदान है, बीमारियों पे करे प्रहार,

छाछ, माखन, दही सब हैं इसके रूप,

शाकाहारी या मांसाहारी सबपे दूध का उपकार।

 

 

नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़

Nilofar Farooqui Tausif

milk favors

 

 

special on world milk day

Sometimes cows and sometimes goats reared humans.
Taking out the milk from the body took care of all of us.
The stream kept flowing here in the name of religion,
Where the child, sifting through the bowl,
A cup full of milk given to the sister.

Whatever be the age, milk gives thousands of benefits,
Those who do not consume milk are sick.
Milk-mouthed children cannot live a moment without milk,
Whoever is not a mother, the animal becomes their mother.

 

Rich in nutrition, milk is our diet,
Nature’s boon, strike on diseases,
Buttermilk, butter, curd are all its forms,
Vegetarian or non-vegetarian subpoena of milk.

 

 

बोलने से पहले तोलना जरूरी है bolane se pahale tolana jarooree hai

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