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वतन | ऑनलाइन बुलेटिन

©इंदु रवि, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश


 

उठ तू वीर सपूत ।
देश हित में दिखा
अपना बुत ।
ना कर तू कोई चूक ।
अततायियों पर फेंको थूक।
धरा है जननी
तू है रक्षक ;
लगाओ ललकार
मारो तक्षक ।
वतन हमारा सबसे प्यारा ।
लक्षबार जीवन अर्पण हमारा ।
स्वाभिमान से जीना,
स्वदेश पर मरना ।
और नहीं हमें कुछ करना ।
जो करे वतन की दिल्लगी
उस बागी की बाहें चिरना ।
लगने न देंगे इस पर
बेईमानी का धब्बा  ।
ना होने देंगे भ्रष्टाचारियो
 का दबदबा  ।
न पड़ने देंगे सत्य पर काई
सोने की आभा जोहरी बतायी
तामस में मद-मत्त मत हो भाई
मत भूलो तुमने मानुष जन्म पाई
इस अद्भुत रूप पाकर  ।
दिखाओ कुछ नेकी  कमाकर ।
 आओ सीखें हम कुछ
 अतीत महात्माओं से,
पुष्पों का बौछार कर
धन्यवाद कहें उन
महानों से ।
किसी की रंग लाई फकामस्ती
किसी – किसी का देश अनुरक्ति
किसी का तो सुख साधन छोड़ जाना ।
किसी को भाया सदाचरण कर
औरों के लिए
उदाहरण बन जाना ।
 रास्ते चाहे जो भी हो ;
महान विभूतियों का है उद्देश्य, वतन पर बलिहारी हो जाना
वतन का सम्मान बढ़ाना  ।
वतन का सम्मान बढ़ाना  ।।
विरासत है धरोहर | ऑनलाइन बुलेटिन
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