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मेरे पिता mere pita

©अमिता मिश्रा

परिचय– बिलासपुर, छत्तीसगढ़


 

 

(1)

माँ धरती है तो आसमान है पिता।

मेरे लिए तो दोनों जहान है पिता।

मेरी हर सफलता की पहचान है पिता।

मैं उनका गर्व हूं तो मेरे अभिमान है पिता।

(2)

माँ की सीख है तो समझदारी है पिता।

मेरी हर बातों में आदतों में शुमार है पिता।

खामोश हुए तो तूफान, प्यार में मुस्कान है पिता।

संघर्ष, सहनशीलता में चट्टान है पिता।

(3)

घर में खुशियों की सौगात है पिता।

बच्चों के लिए सुरक्षा कवच तो माँ के सरताज है पिता।

एक बेटी के लिए उसका आदर्श है पिता।

गर्मी, ठंड, बरसात में भी अपना फर्ज निभाते हैं पिता।

(4)

बच्चों की हर जिद्द को पूरा करते हैं पिता।

भविष्य की चिंता में दिन रात चलते हैं पिता।

घर के राशन से लेकर बच्चों के परवरिश हैं पिता।

अपनों के लिए जो अपना सब कुछ त्याग दे वो है पिता।

(5)

चुप चाप हर दर्द सह जाते पिता मुसीबतों में भी मुस्कुराते पिता।

अपनी पसंद नापसंद कभी जाहिर नहीं करते पिता।

सबके आराम के लिए खुद का आराम छोड़ कमाते पिता।

सबके लिए नए कपड़े लाते अपनी बंडी कई साल चलाते।

(6)

सबका ख्याल रखते अपनी सेहत का ख्याल रखना भूल जाते पिता।

हर दर्द सीने से लगाये अपने आँसू आँखों में ही छिपाते पिता।

बेटी की विदाई में घर के सूने कोने में रोते हैं पिता।

बच्चे बाहर हो तो सौ बार हाल पूछते पिता।

(8)

पिता वो पहेली है जिसका कोई हल नहीं।

एक पिता को समझ पाना किसी के बस में नहीं।

हर दिन हर छण प्रेम और सम्मान के पात्र हैं पिता।

सूरज सा तेज लिये हर किसी के जीवन में प्रकाशमान है पिता।

(9)

पिता वो चट्टान है जिससे सुरक्षित हर मकान है।

कर्तव्यों की बोझ से बोझिल कंधा लिए होते हैं पिता।

कर्म के आगे मर्म को अपना भुलाते हैं पिता।

कर्मपथ पर अग्रसर होने का प्रमाण है पिता।

(10)

हर शब्द हर वाक्य कम पड़ जाते हैं।

गीत, गजल, छंद, मुक्तक सब फीके लगते हैं।

सात सुरों के सरगम जैसा सुनहरे गीतों की लय है पिता।

जीवन की हर परीक्षा में सफल है पिता।

 

 

अमिता मिश्रा

 

Amita Mishra

 

my father

 

 

(1)
Mother is earth and father is sky.
For me both the worlds are father.
Father is the hallmark of my every success.
If I am proud of him, then I am proud of my father.

(2)
Mother’s learning is father’s wisdom.
Father is one of my habits in everything.
If you are silent, there is a storm in love, father is a smile.
Father is a rock in struggle and tolerance.

(3)
Father is the gift of happiness in the house.
The father is the guardian of the mother, the protective shield for the children.
Her role model for a daughter is the father.
Father fulfills his duty even in summer, cold and rain.

(4)
Father fulfills every stubbornness of the children.
Father walks day and night worrying about the future.
From the ration of the house to the upbringing of the children, the father is there.
The one who gives up everything for his loved ones is the father.

(5)
Father silently bears every pain, father smiling even in troubles.
Father never expresses his likes and dislikes.
Father earning by leaving his own comfort for everyone’s comfort.
His bundy would run for many years bringing new clothes for everyone.

(6)
Taking care of everyone, father forgets to take care of his health.
Father applied every pain to his chest, hiding his tears in his eyes.
In the farewell of the daughter, the father cries in the deserted corner of the house.
When the children are outside, the father asks about the condition a hundred times.

(8)
Father is a riddle that has no solution.
It is not in anyone’s power to understand a father.
Father deserves love and respect every day.
Father shines bright like the sun in everyone’s life.

(9)
Father is the rock by which every house is safe.
Fathers are burdened with the burden of duties.
In front of karma, the father forgets the meaning of his own.
The proof of progressing on the path of action is the father.

(10)
Every word every sentence falls short.
Songs, ghazals, verses, muktaks all seem faded.
Father is the rhythm of golden songs like a gamut of seven notes.
Father is successful in every test of life.

 

 

बाल मजदूर दिवस baal majadoor divas

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