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जूही की महक का भाग – 20, लेखक श्याम कुंवर भारती | ऑनलाइन बुलेटिन

©श्याम कुंवर भारती

परिचय- बोकारो, झारखंड


 

जूही अभी घर जाने के लिए अभी अपनी गाड़ी में बैठने ही वाली थी तभी वहां डीसी, डीडीसी, एसपी और डीएसपी कुमार भी अपनी अपनी गाड़ियों से पहुंच गए। उन सबको देखकर जूही रुक गई और सबका अभिवादन किया। उतरते ही सभी जिला के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जूही को गुलदस्ता भेंट करते हुए उसके स्वस्थ होने और बहादुरी के लिए बधाइयां दी।

 

जूही ने सबका आभार किया और सबका गुलदस्ता स्वीकार किया। डीसी ने कहा जूही तुम्हारी जैसे बहादुर और ईमानदार ऑफिसर पर पूरे जिला को गर्व है। तुमने जो कर दिखाया है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। प्रखंड से लेकर जिला तक ऑफिसर से लेकर आम जनता ने विधायक के आतंक से राहत की सांस लिया है।

 

सर सब आप सबके सहयोग से कर पाई। वरना मैं अकेली कुछ नहीं हूं। जूही ने आभार प्रकट करते हुए कहा।

 

फिर भी अगुवाई करने का हिम्मत तुमने ही दिखाया है जूही वरना आजतक कोई भी विधायक के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता था। डीडीसी ने कहा।

 

सर आपका स्नेह और मार्गदर्शन से मुझे हिम्मत मिली। जूही ने उनका आभार प्रकट करते हुए कहा।

 

एसपी ने कहा हालांकि विधायक अभी गिरफ्तार नहीं हुआ है लेकिन उसकी तलाश जारी है। लगता है उसने जिला ही छोड़ दिया है वरना अबतक वो पकड़ा जाता। अगर एक सप्ताह के भीतर वो नहीं पकड़ा गया तो कोर्ट से आदेश लेकर उसके घर की कुड़की, जब्ती किया जायेगा। साथ ही उसका घर भी बुलडोजर से गिरवा दिया जायेगा।

 

जूही ने कहा मेरा आप सबसे अनुरोध है चूंकि मेरे ऊपर जानलेवा हमला की सूचना विधायक की बेटी जया ने ही दिया था जिससे सुधीर ने मुझे समय पर बचा लिया था। इसलिए जया और उसकी मां पर दया दिखाते हुए और प्रशासन की मदद करने के चलते उसका घर कुड़की, जब्ती न किया जाय और और न गिराया जाए।

 

उसकी बात सुनकर डीसी ने एसपी से कहा – सिंह साहब जब जूही अनुरोध कर रही है तो आप ये सब रोक दें। किसी तरह विधायक को गिरफ्तार कर जेल भेजने का प्रयास करें।

 

एसपी ने कहा ठीक है सर।

 

फिर जूही ने सुधीर के साथ अपनी मां, बहन और सुधीर की मां का परिचय सबसे कराया।

 

डीसी ने सुधीर की पीठ ठोकते हुए कहा बहुत बहादुर हो तुम बहुत अच्छा काम किया है तुमने। इसका इनाम मिलेगा तुमको। तभी वहां सबको आया देख सिविल सर्जन भी दौड़ते हुए आए और सबका अभिवादन किया।

 

डीडीसी ने उनको शाबाशी देते हुए कहा डॉक्टर साहब आपने जूही की जान बचाई और उसकी मां का बेहतर इलाज किया इसके लिए आपको बधाई। सी एस ने कहा सर ये तो हमारा फर्ज था।

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फिर सब लोग वहां से निकल गए। जूही भी सबको लेकर अपने आवास पर आ गई। डॉक्टर ने उसे अभी दस पंद्रह दिन ज्यादा भाग दौड़ करने या भारी काम करने से मना किया इसलिए उसने अपने आवास से ही अपने ऑफिस का काम करना शुरू किया। उसकी मां और बहन अभी उसी के साथ थे। सुधीर वहां रोज आया करता था। उसकी मां कभी कभी आया जाया करती थी उसका हाल चाल लेने के लिए।

 

सुधीर को सवारी गाड़ी के लिए लोन पास हो गया था। उसने एक ड्राइवर रख कर गाड़ी को स्टेशन और शहर के बीच चलाना शुरू कर दिया था। उसे स्टेशन रोड की लाइटिंग का भी काम मिल गया था। उसने कुछ ही दिनों में उसने बिजली के खंभा गड़वा कर बिजली का तार जोडवाकर भेपर लाइट लगवा दिया। अब उस रास्ते पर रात मे भी दिन जैसा उजाला रहता था। आने जाने वाले यात्री बहुत खुश होते थे।

 

कुछ दिनों में जूही अब पहले से काफी स्वस्थ हो चुकी थी। अब वो अपने ऑफिस जाने लगी थी।

 

एक दिन डीएसपी कुमार उसके पास आया और कहा मैडम मुझे आपसे एक बात कहनी थी अगर आप इजाजत दे तो कहूं।

 

कुमार साहब इसमें मुझसे पूछने की क्या जरूरत है। आपको जो कहना है बेहिचक कहें।

 

कुमार ने हिचकिचाते हुए कहा- मैडम मेरे घर वाले मुझ पर शादी करने का दबाव डाल रहे हैं और उन्होंने मेरे लिए कई लड़कियां भी देख रखी है। बस मुझे किसी को पसंद कर हां बोलनी है।

 

सुनकर जूही ने खुशी जाहिर किया हुए कहा ये क्या बड़ी खुशी की बात है कुमार साहब। मगर मुझे क्यों सुना रहे हैं आप किसी को पसंद कर हां बोल दें।

 

मगर मुझे कोई और पसंद है मैडम कुमार ने हिचकिचाते हुए कहा।

 

वाह बहुत सुंदर तो आप अपनी पसंद सबको बता दें। जूही ने कहा।

 

अभी नहीं कह सकता मैडम जबतक लड़की की पसंद न जान लूं। कुमार ने कहा।

 

तो उस लड़की को बता दें कि आप उसे पसंद करते हैं और उससे विवाह करना चाहते है। जूही ने हंसते हुए कहा।

 

इसलिए तो आपके पास आया हूं मैडम। कुमार ने कहा।

 

कमाल है इसके लिए आप मेरे पास क्यों आए आप उस लड़की के पास जाएं जो आपको पसंद है। जूही ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

 

क्योंकि वो लड़की आप ही हैं मैडम। मुझे आप बहुत पसंद हैं इसलिए अगर आप हां कह दें तो मैं आपसे विवाह करना चाहता हूं कुमार ने अपने दिल की बात कही।

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सुनकर जूही चौंक गई। उसे कुमार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। हालांकि कुमार भी काफी सुंदर, स्मार्ट और ईमानदार पुलिस ऑफिसर है। अच्छे पद पर है। उसमें कोई बुराई नहीं है। कोई भी लड़की कुमार के प्रस्ताव को ठुकरा नहीं सकती। मगर उसने अभी अपनी शादी के बारे में सोचा ही नहीं है।

 

उसने अपने आपको संयत रखते हुए कुमार की भावना का ख्याल रखते हुए कहा – आपका प्रस्ताव सुनकर बहुत अच्छा लगा। मुझे पसंद करने के लिए आपका आभार कुमार साहब। आपका प्रस्ताव हर लड़की के लिए बड़ी खुशी की बात होगी मगर मैंने अभी अपनी शादी के बारे में सोचा ही नहीं है।

 

सुनकर कुमार थोड़ा उदास हुआ मगर उसने कहा कोई बात नहीं मैडम मुझे आप पसंद थी इसलिए कह दिया कृपया बुरा मत मानना।

 

नहीं नहीं मैं बिल्कुल नाराज नहीं हूं बल्कि मैं आपकी भावना की कद्र करती हूं।

 

जूही ने आगे कहा मगर मेरी नज़र में एक लड़की है अगर आप कहें तो मैं उससे बात करती हूं।

 

छोड़िए मैडम मुझे किसी और लड़की के बारे में कोई बात नहीं करनी है कुमार ने इंकार करते हुए कहा।

 

सुन लीजिए इसके बाद आपको जो मर्जी हो जूही ने अनुरोध करते हुए कहा।

 

ठीक है बोलिए कुमार ने कहा।

 

विधायक की बेटी जया को तो आप जानते हैं। अपने पिता के खिलाफ है वो। बहुत बदल गई है। अपने पिता के फरार होने से बहुत टूट गई है। बेसहारा हो गई है। उसे आप जैसे व्यक्ति के सहारा की जरूरत है। अगर आप कहे तो मैं जया और उसकी मां से बात करती हूं फिर आपको बताती हूं।

 

ठीक है जैसा आप उचित समझें। इतना कहकर कुमार चला गया। रात को जूही ने सुधीर से बोल कर जया और उसकी मां को अपने आवास पर बुलवाया। साथ में सुधीर की मां को भी।

 

जैसे ही सबलोग आ गए। जूही ने जया को अपनी जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया। जया ने कहा मैडम आपने मुझे दोस्त बनाया और मुझे आपकी बात सही लगी इसलिए आपका साथ दिया और सुधीर की खुशी के लिए।

 

जूही ने जया की मां से कहा आंटी अगर अब भी आपके पति पुलिस को आत्म समर्पण कर दे तो हम सब उनकी सजा कम करवाने की सिफारिश कर सकते हैं। मगर वो फरार हैं। उनकी बदनामी की वजह से कोई भी शरीफ लड़का या परिवार आपकी बेटी से शादी नहीं करेगा। लेकिन मेरी नजर में एक लड़का है जो मेरे कहने पर आपकी बेटी से शादी कर सकता है। हमारा पुलिस ऑफिसर डीएसपी कुमार। आंटी आपको इतना अच्छा लड़का कहीं नहीं मिलेगा। अभी उसकी पहली पोस्टिंग है। वो एक आईपीएस ऑफिसर है। जल्दी ही उसका प्रमोशन हो सकता है।

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आप दोनों अभी सोचकर बताएं ताकि मैं कुमार साहब को बता दूं।

 

जया ने कहा मगर मुझे सुधीर पसंद है मैडम। मैं उसी से शादी करना चाहती हूं।

 

पागल मत बनो जया जरा दिमाग से सोचो और जिद छोड़ दो। अगर ज्यादा देर की तो यह भी लड़का हाथ से निकल जायेगा।

 

जया की मां ने कहा जूही बेटी मुझे तुम्हारा प्रस्ताव स्वीकार है। तुम बिल्कुल सही कह रही हो। कुमार से अच्छा लड़का कहीं नहीं मिलेगा। इसके पापा का पता नहीं क्या होगा मगर मेरी बेटी का परिवार बस जाए इससे बड़ी खुशी मुझे क्या चाहिए।

 

जया अभी भी सुधीर के लिए अड़ी हुई थी। उसकी मां ने उसे कस कर डांटा तुम चुप रहो।

 

जूही ने जया की मां को मना करते हुए कहा इसे मत डांटो आंटी मैं अभी सुधीर को बुलाती हूं। जूही ने फोनकर सुधीर को बुलाया। सुधीर थोड़ी देर में पहुंच गया। जूही ने सुधीर से कहा जया तुमसे शादी करना चाहती है। अब तुम बोलो करोगे जया से शादी।

 

सुधीर ने बड़े प्यार से जया को समझाते हुए कहा – देखो जया मैंने कितनी बार तुमसे कहा मैं अभी कुछ नहीं हूं। इसलिए अभी न प्यार न शादी कुछ नहीं कर सकता। तुमको जिससे अपना विवाह करना है कर लो।

 

उसकी बात सुनकर जया रोने लगीं। उसने सुधीर से कहा तुमने मुझे धोखा दिया है। मेरा दिल दुखाया है सुधीर। मैं तुम्हें बहुत प्यार करतीं हूं। तुम मुझे शुरू से पसंद थे। अब मैं तुमसे कभी बात नहीं करूंगी।

 

जूही ने जया को किसी तरह समझा कर चुप कराया और कहा तुम सुधीर से नाराज मत हो वो जो कह रहा है सही कह रहा है। सुधीर तुमसे प्यार नहीं करता है। उससे शादी करके तुम खुश नहीं रहोगी।

 

इसलिए जो तुम्हारी मां कह रही है मान लो। कुमार से शादी के लिए हां कह दो। फिर उसने जया और उसकी मां को अपनी एक योजना बताई। सुनकर सब चौंक गए। मगर सब राजी हो गए। सुधीर ने जया की तारीफ करते हुए कहा यह बहुत अच्छा होगा। मैं भी इसमें सब का साथ दूंगा।

 

 

शेष अगले भाग – 21 में।

लेखक – श्याम कुंवर भारती।

 

 

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