Nasa Sunita Williams News: खाना-पानी के बिना जब चांद के करीब फंस गए थे तीन अंतरिक्ष यात्री, सुनीता विलियम्स ने दिलाया याद, जानें वापसी की कहानी..

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Nasa Sunita Williams News: Google Hindi News : Online Bulletin : वॉशिंगटन | [वर्ल्ड बुलेटिन] | ऑनलाइन बुलेटिन : बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान से स्पेस में गईं सुनीता विलियम्स की वापसी का समय बढ़ गया है। स्पेसक्राफ्ट में खराबी के कारण वह स्पेस में फंसी हुई हैं। उनकी वापसी हालांकि मुश्किल नहीं मानी जा रही है, क्योंकि नासा इससे भी मुश्किल हालात में अंतरिक्षयात्रियों को वापस धरती पर लाया है।(Nasa Sunita Williams News)

स्पेस में गईं सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष यान बोइंग स्टारलाइनर में खराबी के कारण फंस गई हैं। 13 जून को उन्हें वापस आना था। उनकी वापसी को लेकर नासा और बोइंग काम कर रहे हैं। सुनीता विलियम्स इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में मौजूद हैं। वह पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन सवाल उठता है कि क्या सुनीता विलियम्स की घर वापसी हो सकेगी। नासा चाहता है कि बोइंग स्टारलाइनर को ठीक कर उसके जरिए उन्हें वापस लाया जाए। स्टारलाइनर के अलावा भी नासा के पास अन्य विकल्प हैं। लेकिन नासा ने पहले इससे बड़ी समस्या का सामना किया है। नासा को एक मिशन में ऐसी समस्या आई थी, जो किसी हॉलीवुड फिल्म की तरह थी। लेकिन तब भी नासा अपने अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर ले आया था।आज से 54 साल पहले एक अंतरिक्ष यान में विस्फोट के कारण तीन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से 3.30 लाख किमी दूर चंद्रमा के चारों ओर घूमते रहे। ये मिशन था अपोलो 13 जिसे 1970 में लॉन्च किया गया था। यह नासा का चंद्रमा पर तीसरा इंसानी मिशन था, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के क्रेटर फ्रा माउरो के पास उतरना था। अपोलो 13 से रेडियो के जरिए एक मैसेज आया, ‘ह्यूस्टन हमें एक दिक्कत है’। यह मैसेज पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गया। हालांकि सुनीता विलियम्स के मामले में यह एकदम अलग है। लेकिन दोनों ही मिशन के बीच में गड़बड़ी हुई है। (Nasa Sunita Williams News)

अंतरिक्ष में हुआ धमाका

 

तीन अंतरिक्ष यात्री जो अंतरिक्ष में फंसे थे उनका नाम जिम लोवेल (हैंक्स), फ्रेड हाइज (पैक्सटन), और जैक स्विगर्ट (बेकन) है। कमांडर जिम लोवेल और चंद्र मॉड्यूल पायलट फ्रेड हाइज को 15 अप्रैल को चंद्र मॉड्यूल से उतरना था। यहां वह 33 घंटों तक रहते। कमांड मॉड्यूल पायलट स्विगर्ट को कमांड मॉड्यूल ओडिसी में ही रहना था। 21 अप्रैल को चालक दल को पृथ्वी पर लौटना था। लेकिन अंतरिक्ष यान में विस्फोट के कारण वह चार दिन पहले ही धरती पर लौट आए। (Nasa Sunita Williams News)

अंतरिक्ष यान में हुआ धमाका

 

अंतरिक्ष यान तीन हिस्सों में बना था। कमांड मॉड्यूल जहां अंतरिक्ष यात्री थे, चंद्र मॉड्यूल जिससे चंद्रमा पर जाना था और मुख्य इंजन और ऑक्सीजन टैंक का हिस्सा। नासा के मुताबिक लॉन्चिंग के 5-6 मिनट बाद उन्हें वाइब्रेशन महसूस हुआ। मिशन के दो दिनों के बाद अपोलो 13 के चालक दल ने टीवी पर लाइव प्रसारण किया। इसी दौरान मिशन कंट्रोल ने स्विगर्ट को ऑक्सीजन टैंक में एक रूटीन हलचल करने का निर्देश दिया। इसके करते ही अंतरिक्ष यान हिल गया। 9 मिनट बाद स्पेसक्राफ्ट में एक धमाका हुआ। ऑक्सीजन टैंक में यह विस्फोट हुआ था। धमाके से एक हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि बाद में पता चला कि लॉन्चिंग से पहले ही ऑक्सीजन टैंक क्षतिग्रस्त था। इसीलिए इसे टाइम बम कहा गया। (Nasa Sunita Williams News)

धरती पर लौटे अंतरिक्ष यात्री

 

कमांड मॉड्यूल का इलेक्ट्रिकल सिस्टम धीरे-धीरे मर रहा था। नासा ने कहा धरती से इतनी दूर इन अंतरिक्ष यात्रियों के पास बिजली पानी और रोशनी नहीं थी। भोजन और पानी की कमी के अलावा इस दौरान और भी असुविधाएं थीं। ठंड के कारण नींद भी असंभव थी, क्योंकि तापमान 3 डिग्री तक पहुंच गया था। लूनर मॉड्यूल जिसे चंद्रमा पर उतरना था वह इन अंतरिक्ष यात्रियों की लाइफ बोट बन गया। वापसी के लिए तीनों इसमें चले गए। टैंक के विस्फोट के कारण यह अपनी ट्रेजेक्टरी से हट गया था। बाद में ग्राउंड स्टेशन ने उनके वापसी के रास्ते को ठीक किया। 17 अप्रैल 1979 को अपोलो 13 ने पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश किया और प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से गिर गया। अपोलो 13 अंतरिक्ष यान ‘पांच दिन, 22 घंटे, 54 मिनट, 41 सेकंड’ तक अंतरिक्ष में घूमता रहा।(Nasa Sunita Williams News)

 

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