Om Prakash Valmiki : पांचवां ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मारक साहित्य पुरस्कार 2024 आयोजित….

Om Prakash Valmiki सहारनपुर | [उत्तर प्रदेश] | ऑनलाइन बुलेटिन:  साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की 74वीं जयंती के अवसर पर साहित्य चेतना मंच द्वारा पांचवें ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान समारोह और सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुजीत कुमार और अमित तेजी के प्रार्थना गीत से हुई। साहित्य चेतना मंच के उपाध्यक्ष डॉ. दीपक मेवाती ने अपने स्वागत भाषण में साहित्य चेतना मंच का परिचय दिया और सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।

 

Om Prakash Valmiki वर्तमान में ओमप्रकाश वाल्मीकि के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर किरोड़ीमल कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली) के हिंदी विभाग के मुख्य अतिथि प्रो. नामदेव कहते हैं-“ओमप्रकाश वाल्मीकि कभी भी उदारवादी नहीं थे, उनके लेखन में साहस था। उनके साहित्य में वंचित समाज का दर्द है। उनका साहित्य वास्तविक है। उनकी चिंताएँ आज भी समाज में प्रासंगिक हैं।मुख्य अतिथि प्रो. राजेश पाल ने अपने संबोधन में कहा, “ओमप्रकाश वाल्मीकि का जीवन और साहित्य संघर्ष और प्रतिरोध का रहा है। सामाजिक व्यवस्था में उनके लिए कोई बीच का रास्ता नहीं है। उनका जीवन और कार्य हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।’

 

Om Prakash Valmiki पांचवें ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मारक साहित्य पुरस्कार-2024 से दलित लेखक संघ के अध्यक्ष और राजधानी कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में हिंदी विभाग के प्रमुख प्रो. महेंद्र सिंह बेनीवाल को साहित्य चेतना मंच के पदाधिकारियों, डॉ. नरेंद्र वाल्मीकि, उपाध्यक्ष डॉ. दीपक मेवाती, महासचिव श्याम निर्मोही, कोषाध्यक्ष जे. एम. सहदेव सोनू, सचिव रमन टाकिया और प्रवेश कुमार द्वारा प्रशस्ति पत्र, शॉल, साहित्यिक उपहार और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

“” “वर्तमान में ओमप्रकाश वाल्मीकि के विचारों की प्रासंगिकता” “विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने कहा,” “दलितों की संसाधनों में हिस्सेदारी नहीं है, मीडिया में उनकी उचित हिस्सेदारी नहीं है, ये विचार ओमप्रकाश वाल्मीकि के साहित्य में आए और आज भी प्रासंगिक हैं।” “” “” स्कूलों में दलित छात्रों के साथ अभी भी ओमप्रकाश वाल्मीकि जैसा व्यवहार किया जाता है। आज भी गाँव में जातिगत आतंक है।’

एक विशिष्ट वक्ता के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ दलित साहित्यकार डॉ. एन. सिंह ने कहा, “ब्राह्मणवाद की बात का समर्थन करने वाला दलित लेखक दलित साहित्यकार नहीं है। तमाम परेशानियों से गुजरने के बावजूद दलितों के व्यवहार में कोई कड़वाहट नहीं होनी चाहिए। यह हमें ओम प्रकाश वाल्मीकि से सीखना चाहिए।’

ओमप्रकाश वाल्मीकि के करीबी मित्र लेखक शिवबाबू मिश्रा ने अपने संबोधन में उनके साथ बिताए पलों को साझा किया। उन्होंने अपने जीवन के कुछ अनदेखे पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “ओमप्रकाश वाल्मीकि के साहित्य और जीवन में सत्य का समर्थन रहा है। देहरादून में कई मौकों पर ओमप्रकाश वाल्मीकि की उपेक्षा की गई। उनमें सच बोलने का साहस था। वे एक मानवतावादी व्यक्ति थे।’

साहित्य चेतना मंच की रचनात्मक प्रस्तुति के तीसरे संस्करण “घर-घर ओमप्रकाश वाल्मीकि” स्मारिका (2024) श्याम निर्मोही का दूसरा कविता संग्रह “मन के कबीर” और डॉ. नरेंद्र वाल्मीकि का कविता संग्रह “उजाले की ओर” का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी में मदन पाल तेश्वर ने कहा, “उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति की बात बहुत गर्मजोशी से सुनी। सभी वक्ताओं ने ओमप्रकाश वाल्मीकि के साहित्य को बारीकी से पढ़ा है और इस पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। सबके बयानों का सारांश देते हुए उन्होंने कहा, “ओम प्रकाश वाल्मीकि ने दलित साहित्य के माध्यम से समाज में जागरूकता लाने का महत्वपूर्ण काम किया है। यह जागरूकता हर घर तक पहुंचनी चाहिए।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में मदनपाल तेश्वर ने बताया कि- ‘उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को बड़ी ही तन्मयता से सुना। सभी वक्ताओं ने ओमप्रकाश वाल्मीकि जी के साहित्य को बारीकी से पढ़ा है और उस पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। सभी के वक्तव्यों को संक्षेप में सार रूप में बताते हुए उन्होंने कहा कि- ‘ओमप्रकाश वाल्मीकि ने दलित साहित्य के माध्यम से समाज में चेतना लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया हैं। यह चेतना घर-घर तक पहुॅंचनी चाहिए।

इनके अतिरिक्त भारत भूषण, डॉ. सुभाष प्रज्ञ, जे.पी. सिंह, धनपाल तेश्वर्, महेश कुनवाल आदि ने अपनी बात रखी और ओमप्रकाश वाल्मीकि को याद करके श्रद्धांजलि दी। समारोह में सामाजिक कार्यकर्ता रमेश भंगी, अंकिता अग्रवाल, मेहरचन्द चांवरिया, ओ.पी. शुक्ला, प्रो. धर्मवीर, प्रो.‌ अनिल कुमार, डॉ. प्रवीन कुमार, डॉ. रोबिन सिंह, गौरव चौहान, अनिल बिड़लान, राहुल वाल्मीकि‌ आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही। आये हुए अतिथियों का मंच की ओर से साहित्यिक उपहार भेंट करके अभिनन्दन किया गया।

साहित्य चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र वाल्मीकि ने प्रतिभागियों को हृदय से धन्यवाद दिया और अपने नए कविता संग्रह ‘उजाले की ओरे’ से ‘ओमप्रकाश’ नामक कविता का पाठ किया। मंच का संचालन बीकानेर से मंच के महासचिव श्याम निर्मोही ने कुशलता से किया।


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