Parivartan Sangstha- “समाज की जागृति का बिगुल बजा: गंगापुर में नौवां जिला अधिवेशन बना एकता और बदलाव की ऐतिहासिक मिसाल!”
Parivartan Sangstha-

Parivartan Sangstha- राजस्थान के गंगापुर सिटी स्थित आदर्श नगर के गौरव होटल में परिवर्तन संस्था द्वारा आयोजित नौवें जिला अधिवेशन ने समाज की नींव को हिलाने वाला ऐतिहासिक संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी ने की और संचालन किया प्रदेश अध्यक्ष दिलीप कुमार ने। इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई संस्था प्रमुख चौ. विनोद अंबेडकर ने, जो बतौर मुख्य अतिथि मंच पर उपस्थित रहे।
? समारोह की शुरुआत
Parivartan Sangstha- कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ महात्मा फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर और संस्था के समूहगान से। यह न सिर्फ एक कार्यक्रम था, बल्कि एक चेतना थी, जो समाज को अंदर तक झकझोरने आई थी।
? विनोद अंबेडकर का प्रहार: ’70 बस्तियां, 72 नेता – समाज को कौन दिशा देगा?’
मुख्य वक्तव्य में चौधरी विनोद अंबेडकर ने बहुत कड़े और सच्चे शब्दों में समाज की वास्तविकता पर चोट की। उन्होंने कहा:
“कोई समाज चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, अगर वह शिक्षित, संगठित और अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है, तो वह हमेशा शोषण और अत्याचार का शिकार रहेगा।”
उन्होंने साफ कहा कि आज SC/ST समाज जातियों, क्षेत्रवाद और स्वार्थी नेताओं में बंटा हुआ है। हर बस्ती में एक नेता, हर नेता के पीछे एक संगठन – इससे समाज की असली शक्ति खो गई है।
“समाज बिक रहा है, बिकवाने वाले अपने ही हैं। अगर हम एक राष्ट्रीय विचार, एक संगठन और एक नेतृत्व को स्वीकार नहीं करेंगे, तो समाज की ताकत सिर्फ वोट बैंक बनकर रह जाएगी।”
? वेदवीर सिंह आदिवासी का मार्गदर्शन
केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया कि डॉ. फुले, बाबासाहेब अंबेडकर और कांशीराम द्वारा शुरू की गई सामाजिक क्रांति को स्वार्थी और बेबुद्धि नेताओं ने कमजोर किया।
लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि चौ. विनोद अंबेडकर जैसे त्यागी, निस्वार्थ और संघर्षशील नेता समाज को फिर से एक नई दिशा दे सकते हैं।
“30 वर्षों से बिना रुके, बिना बिके, बिना थके चौ. विनोद अंबेडकर इस सामाजिक आंदोलन को चला रहे हैं। यही नेतृत्व समाज को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित कर सकता है।”
? विशिष्ट सहभागिता
इस ऐतिहासिक अधिवेशन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से स्त्री-पुरुषों की भागीदारी रही। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
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सूरज डागर, अजय विश्वास, अनूप कुमार, विशाल धामोंनिया, विक्की जादौन, अमर डागर, मनीष नकवाल
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करीना नरवाल, काजल सुनैना, गरिमा चौधरी, नीलम बागड़ी, ललिता बैरवा, सिद्धार्थ नागवंशी
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कैलाश नकवाल, अजय धामोनीया, मोनू नकवाल, रानू गेचंद, सोनू तमौली, दीपक बैरवा, मुकुट गेचंद
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और अन्य प्रेरणादायक सामाजिक कार्यकर्ता

? मूल विचार: एकता ही शक्ति है
अधिवेशन से निकला स्पष्ट संदेश है:
? अगर समाज एक विचार, एक नेतृत्व और एक संगठन के नीचे नहीं जुड़ता, तो हर क्षेत्रीय और जातीय संगठन समाज को कमजोर ही करेगा।
? जब तक समाज राजनीतिक लालच और जातीय सोच से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक उसका उत्थान असंभव है।
? शिक्षा, संगठन और जागरूकता – यही तीन स्तंभ हैं जिस पर समाज का विकास संभव है।
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✅ निष्कर्ष (Conclusion):
परिवर्तन संस्था का यह अधिवेशन कोई साधारण कार्यक्रम नहीं था। यह समाज को आईना दिखाने और उसे नई दिशा देने का प्रयास था। यह संदेश केवल गंगापुर तक सीमित नहीं रहना चाहिए – बल्कि हर गांव, हर शहर, हर बस्ती तक पहुंचना चाहिए।

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“अब समय है जातियों में बंटने का नहीं, एकजुट होकर समाज की ताकत को पहचानने का।”
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