Parivartan Sansthan India- जयपुर में राष्ट्रीय अधिवेशन: जातिवाद और शोषण के खिलाफ परिवर्तन संस्था भारत की बड़ी पहल!

Parivartan Sansthan India- Dalit-Bahujan Unity-

Parivartan Sansthan India- Dalit-Bahujan Unity- जयपुर, राजस्थान: परिवर्तन संस्था भारत के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन जयपुर के अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। इस ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी ने की, जबकि संचालन मदनपाल सहदेव द्वारा किया गया। इस भव्य आयोजन में संस्था प्रमुख चौधरी विनोद अंबेडकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

जातिवाद और सामाजिक अन्याय के खिलाफ बुलंद हुई आवाज़

Parivartan Sansthan India- Dalit-Bahujan Unity-  चौधरी विनोद अंबेडकर ने अपने ओजस्वी भाषण में समाज में व्याप्त जातिवाद, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “आज़ादी के दशकों बाद भी दलित-बहुजन समाज अन्याय और शोषण का शिकार बना हुआ है।” उन्होंने समाज को जागरूक करते हुए कहा कि यदि हमें अत्याचार, शोषण और अन्याय से मुक्ति पानी है, तो हमें पहले इसके पीछे के कारणों को समझना होगा।

“जातिगत भेदभाव से बाहर निकलना ही असली क्रांति”

अपने संबोधन में चौधरी विनोद अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि समाज की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण जातिगत विभाजन और राजनीतिक असंगठितता है। उन्होंने कहा, “जब तक हम जातिगत पहचान के छोटे-छोटे संगठनों में बंटे रहेंगे, तब तक हमारी ताकत बिखरी रहेगी।”

उन्होंने राष्ट्रीय परिवर्तन संस्था को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि “एकमात्र संगठित होकर ही हम अपने अधिकार प्राप्त कर सकते हैं।” उन्होंने राष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि जातिवादी मानसिकता को त्यागकर, अनुशासन और एकता के साथ काम करने की जरूरत है।

RSS की तरह अनुशासन और संगठन शक्ति का विकास

अपने विचार साझा करते हुए चौधरी विनोद अंबेडकर ने एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि “RSS में कोई जाति नहीं पूछता, वे अनुशासन, त्याग, बलिदान, परिश्रम और एक नेतृत्व में विश्वास करते हैं।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “परिवर्तन संस्था भारत” को भी उसी तर्ज पर विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि संगठन पिछले 30 वर्षों से निस्वार्थ भाव से दलित-बहुजन समाज को एकजुट करने में लगा है और अब यह संस्था पूरे भारत में फैल चुकी है।

जातिवाद और पूंजीवाद के दोहरे हमले से कैसे बचें?

उन्होंने कहा कि वर्तमान में दलित-बहुजन समाज जातिवाद और पूंजीवाद दोनों के चक्रव्यूह में फंसा हुआ है। शिक्षा और रोजगार में पिछड़ने का मुख्य कारण यही है। उन्होंने लोगों से शिक्षा और आर्थिक मजबूती पर ध्यान देने की अपील की और कहा कि “जब तक हम शिक्षा और अर्थव्यवस्था में मजबूत नहीं होंगे, तब तक हमें हमारे अधिकार नहीं मिलेंगे।”

अधिवेशन में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

इस अवसर पर मध्यप्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात से कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में रामचंद्र चौहान (मध्यप्रदेश कोऑर्डिनेटर), जसविंद्र सिंह (पंजाब अध्यक्ष), अशोक गौतम (उत्तराखंड अध्यक्ष), सूरज डागर (केंद्रीय कोषाध्यक्ष), दिलीप कुमार (राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष) सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

अधिवेशन का संदेश: संगठित होइए, अपने अधिकार पाइए!

अधिवेशन का मुख्य संदेश यही रहा कि यदि हमें शोषण, अन्याय और जातिवादी मानसिकता से छुटकारा पाना है, तो हमें संगठित होकर एक राष्ट्रीय पहचान बनानी होगी

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