हरियाणा के सबसे पुराने भूमि विवाद में फिर से होगी जांच, 2 महीने में नया फैसला देने के निर्देश

पंचकूला
 पंचकूला जिले की 1394 एकड़ भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में अंबाला मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कमिश्नर ने 26 मई 2026 को दिए फैसले में मामले को दोबारा सुनवाई के लिए कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के पास भेजते हुए निर्देश दिया है कि सभी पक्षों को सुनकर दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय लिया जाए।

यह मामला दिवंगत बड़े भू-स्वामी सरदार भगवंत सिंह की भूमि से जुड़ा है। रिकार्ड के अनुसार सरदार भगवंत सिंह के पास पंचकूला क्षेत्र के सात गांवों बरवाला, संगराना, फतेहपुर विरान, भराली, जलौली, बीर बाबूपुर और बीर फिरोजारी में 1396 एकड़ भूमि थी। उनके निधन के बाद भूमि के अधिशेष (सरप्लस) क्षेत्र को लेकर कानूनी लड़ाई दशकों से चली आ रही है। यह भूमि आइटीबीपी के पास जीटी रोड के आसपास पड़ती है।

अंबाला के मंडलायुक्त संजीव वर्मा के आदेश में उल्लेख है कि भूमि अधिशेष से संबंधित कार्यवाही 1960 के दशक से लंबित है। इस दौरान मामला कई बार कलेक्टर, कमिश्नर, वित्तायुक्त राजस्व तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने 24 फरवरी 2023 को भी निर्देश दिया था कि अधिशेष भूमि का मामला पुनर्निर्धारण के सिद्धांत के आधार पर एक वर्ष के भीतर तय किया जाए।

राजस्व रिकॉर्ड में सुधारों को रद करने के निर्देश
देहरादून निवासी आशा सिंह ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के चार जनवरी 2024 के आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि कलेक्टर ने 11 अप्रैल 2023 के अपने पूर्व आदेश को वापस लेकर राजस्व रिकार्ड में किए गए सुधारों को रद करने का निर्देश दिया था, जबकि यह कदम उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं था।

सुनवाई के दौरान भूमि खरीदने वाले पक्षों ने दावा किया कि वे वर्षों से भूमि के वैध खरीददार हैं और उनके नाम राजस्व रिकार्ड में करीब दो दशक से दर्ज हैं। उनका तर्क था कि ऐसे मामलों में केवल सिविल कोर्ट ही जमाबंदी की प्रविष्टियों में बदलाव कर सकता है।

दूसरी ओर अपीलकर्ता पक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुसार पूरे भूमि होल्डिंग को मूल भू-स्वामी सरदार भगवंत सिंह के नाम से देखते हुए अधिशेष भूमि का निर्धारण किया जाना चाहिए और उनके कानूनी वारिसों को कानून के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाने चाहिएं।

सरकारी रिकार्ड में 583 एकड़ पहले से दर्ज
राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार कुल भूमि में से 583 एकड़ तीन कनाल 16 मरला भूमि पहले ही राज्य सरकार के नाम दर्ज हो चुकी है, जबकि लगभग 810 एकड़ पांच कनाल सात मरला भूमि निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज है।

मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध रिकार्ड और न्यायालयों के पूर्व निर्णयों के आधार पर अधिशेष भूमि का मामला पूरे होल्डिंग को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया कि शेष 811 एकड़ भूमि को भी राज्य सरकार के नाम दर्ज किए जाने का प्रश्न पुनः विचारणीय है।

दो माह में देना होगा नया फैसला
अंतिम आदेश में कमिश्नर ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला को निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर मामले का दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय करें। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई कि हाईकोर्ट के समयबद्ध निर्देशों के बावजूद मामला अनावश्यक रूप से लंबे समय से लंबित है।

इस आदेश के बाद हरियाणा के सबसे पुराने और बड़े भूमि विवादों में से एक माने जाने वाले इस मामले में फिर से व्यापक सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।


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