Punjab Congress की नई रणनीति, 2027 चुनाव में Gen-Z को साधने पर खास जोर

चंडीगढ़.

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी इस बार चुनावी घोषणापत्र को केवल वादों का दस्तावेज बनाने के बजाय जनता की राय और विभिन्न वर्गों की जरूरतों के आधार पर तैयार करने की योजना बना रही है। इसके लिए पार्टी की घोषणापत्र समिति पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों से सुझाव लेगी।

खास तौर पर नई पीढ़ी और पहली बार मतदान करने वाले Gen-Z की चिंताओं को घोषणापत्र में प्रमुख स्थान देने की तैयारी है। घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष एवं सांसद अमर सिंह ने बताया कि शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार आज के समय में युवाओं के सबसे बड़े मुद्दों में शामिल हैं। पार्टी विश्वविद्यालयों और स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों और युवाओं से बातचीत करेगी। उनका कहना है कि आज के विद्यार्थी अपनी शिक्षा और भविष्य को लेकर काफी महत्वाकांक्षी हैं। इसलिए उनके विचारों को समझना और उन्हें घोषणापत्र में शामिल करना जरूरी है।

Gen-Z की मांगों पर रहेगा विशेष जोर
कांग्रेस के अनुसार पंजाब के शिक्षित युवाओं के सामने रोजगार की समस्या बड़ी चुनौती बनी हुई है। बेहतर अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों या विदेशों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी यह समझने का प्रयास करेगी कि युवाओं को पंजाब में ही बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए किस तरह की नीतियों की जरूरत है। समिति केवल बड़े संगठनों और प्रभावशाली लोगों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके सदस्य किसानों, उद्योग प्रतिनिधियों, व्यापारियों, कर्मचारी संगठनों, शिक्षकों, प्रोफेसरों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और अन्य वर्गों से भी बातचीत करेंगे।

किसानों से भी मांगे जाएंगे सुझाव
अमर सिंह ने कहा कि समिति जिला स्तर पर सुझाव लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। पंजाब की खेती और उद्योग से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को भी घोषणापत्र में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा। इसके अलावा रिक्शा चलाने वालों और रेहड़ी-पटरी पर काम वाले लोगों जैसे छोटे कामगारों की समस्याओं को भी सुना जाएगा। पार्टी का उद्देश्य ऐसा घोषणा पत्र तैयार करना है, जिस पर लोग भरोसा कर सकें और जिसे जमीन पर लागू किया जा सके। कांग्रेस का कहना है कि घोषणापत्र केवल चुनाव के दौरान किए जाने वाले वादों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों से मिले सुझावों के आधार पर व्यावहारिक नीतियों का दस्तावेज होना चाहिए।

गुटबाजी के बीच घोषणापत्र समिति की चुनौती
पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच घोषणापत्र समिति की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो गई है। पार्टी ने चुनाव से जुड़े अलग-अलग दायित्वों के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इसके बावजूद समिति का काम राजनीतिक मतभेदों से अलग रखते हुए आगे बढ़ाने की बात कही गई है। अमर सिंह ने कहा कि पार्टी के भीतर चाहे जो राजनीतिक समीकरण हों, घोषणापत्र जरूरी दस्तावेज है और इसे तैयार करने का काम जारी रहेगा। उनका कहना है कि जनता से मिलने वाले सुझावों के आधार पर सकारात्मक और व्यावहारिक दस्तावेज तैयार किया जाएगा। कांग्रेस की योजना है कि व्यापक जनसंपर्क के जरिए अलग-अलग वर्गों की प्राथमिकताओं को समझा जाए। इससे पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने मुद्दे तय करने में मदद मिलेगी। खासकर युवाओं, रोजगार, शिक्षा, किसानों और उद्योग से जुड़े विषयों को घोषणापत्र में किस तरह शामिल किया जाता है, इस पर अब राजनीतिक नजरें रहेंगी।


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