IPS वाई. पूर्ण कुमार केस में चंडीगढ़ पुलिस पर सवाल, एक साल बाद भी जांच नहीं हुई पूरी

चंडीगढ़
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या को सात अक्टूबर को एक साल पूरा हो जाएगा, लेकिन मामले की जांच अभी तक अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंची है।
चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने के बाद कई स्तर पर जांच की, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। यहां तक कि पुलिस ने एफआइआर में किसी अधिकारी का नाम भी नहीं लिखा था।
ऐसे में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सात अक्टूबर 2025 को 2001 बैच के 52 वर्षीय आईपीएस अधिकारी पूरण कुमार ने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित आवास के बेसमेंट में अपनी सर्विस रिवाॅल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
अधिकारियों पर लगाए थे गंभीर आरोप
घटना के बाद पुलिस को मौके से उनका अंतिम नोट मिला था। अंतिम नोट में पूर्ण कुमार ने हरियाणा के कई वरिष्ठ व सेवानिवृत्त पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, प्रताड़ना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
उनकी पत्नी अमनीत पी. कुमार भी भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उन्हीं की शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने नौ अक्टूबर को आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज की।
बाद में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) भी जोड़ी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी।
आत्महत्या के बाद हुए थे कई विरोध प्रदर्शन
वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या के बाद चंडीगढ़ समेत हरियाणा और पंजाब में कई विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके परिवार, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों से जुड़े लोगों ने आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
चंडीगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। कई जगहों पर प्रदर्शन के दौरान पूर्ण कुमार के अंतिम नोट में लगाए गए आरोपों का मुद्दा उठाया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मामले में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि अभी तक पुलिस ने किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की।












