Gaurela_Pendra_Marwahi में शिक्षा की क्रांति! अजाक्स संघ गरीब बच्चों को निःशुल्क कोचिंग देकर बना रहा अधिकारी कर्मचारी
गौरेला_पेंड्रा_मरवाही
गौरेला पेंड्रा मरगही में अजाक्स छत्तीसगढ़ का शिक्षा दान महाअभियान तीसरे साल जारी, अब तक 450 से अधिक गरीब बच्चों को अंतिम कोचिंग से उद्यमिता बनाने का मौका।
शिक्षा का महादान: जब अधिकारी और कर्मचारी बने बच्चों के गुरु!
गौरेला_पेंड्रा_मरवाही – छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में शिक्षा को लेकर एक अनोखी क्रांति चल रही है। यह कोई सरकारी योजना नहीं है, बल्कि जनजाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) छत्तीसगढ़ की एक प्रेरणादायक पहल है। “शिक्षा दान महाअभियान” नाम के इस अभियान ने अब तक 450 से अधिक गरीब और वर्ग के बच्चों की जिंदगी संवार दी है। और यह लगातार तीसरे साल भी पूरे जोश और दावत के साथ चल रहा है।
जब शिक्षा बनी बदलाव की चाबी
गांव-गांव के बच्चे, माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और जो एक किताब की किताब में भी सक्षम नहीं हैं, आज शिक्षक, नर्स और सरकारी कर्मचारी बनने का सपना देख रहे हैं – और वो भी बिल्कुल मुफ्त कोचिंग के माध्यम से।
पेंड्रा में आयोजित इस कोचिंग में अब तक दो बैच पूरे हो चुके हैं, जिसमें से लगभग 100 छात्रों का चयन सरकारी भंडार जैसे सहायक शिक्षक, कॉलेज और अन्य वैली कॉलेजों में किया गया है।
तीसरे बालक का अनावरण, फिर जगी नई उम्मीद
गौरेला_पेंड्रा_मरवाही – दिनांक 8 अप्रैल 2025 को पेंड्रा में इस कोचिंग के तीसरे बच्चे का उद्घाटन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में अजाक्स के प्रांताध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण भारती उपस्थित थे, जिन्होंने छात्रों को ‘एकलव्य’ की तरह अपने लक्ष्य को केंद्र में रखकर मेहनत करने की प्रेरणा दी।
इस साल 150 नए छात्रों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है, जो सीजी टीईटी, सीटीईटी, पीएटी, पीईटी, बी.एड, डी.एल.एड, प्री-नर्सिंग जैसे कॉलेजों की तैयारी कर रहे हैं।
कौन हैं ये नायक जो मुफ़्त में पढ़ रहे हैं?
इस कोचिंग सेंटर की खास बात यह है कि यहां के शिक्षक और समर्पित सहयोगी स्वयं अधिकारी और कर्मचारी हैं, जो अपने समय और पैसे से इस अभियान को चला रहे हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित कुछ प्रमुख नाम:
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डॉ अमित मिरी (प्रांतीय सचिव)
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श्री जे.पी. पुष्प (प्राचार्य एवं महासचिव)
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श्री अध्यापिका पाटले (संगठन सचिव)
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श्री जे.पी. पैकारा (जिला प्रमुख, जीपीएम)
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श्री अजय चौधरी (शिक्षक व संचालक)
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साथ ही कर्मचारी सहयोगी कर्मचारी आर्थिक और बौद्धिक योगदान दिया।
गरीबी नहीं रही बाधा, अब हर बच्चा देख सकता है सपना
इन बच्चों की एक ही विशेषता है – गरीबी । वे सभी बीपीएल कार्डधारी हैं, उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर बनकर किसी तरह जीवन-यापन कर रहे हैं। लेकिन अब ये बच्चा भी बड़े-बल्लेबाजों की तैयारी कर रहा है और अपनी आंखों में आईएएस, टीचर, नर्स और सरकारी सेवा का सपना देख रहा है।
प्रेरणादायक प्रवचनों ने भरा जोश
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डॉ. अमित मिरी ने कहा: “काम में भी बड़ा सपना देखा जा सकता है।”
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प्रोफेसर पाटले ने डॉ. कलाम के कोटेशन में कहा,
“सपने वो नहीं जो नींद में आए, सपने वो हैं जो नींद में आए नहीं।” -
जे.पी. पुष्प ने बताया कि कैसे एक छोटी सी घटना ने इस कोचिंग सेंटर को शुरू करने की प्रेरणा दी और अब यह आंदोलन चुकाया गया है।

जनता और सोशल मीडिया में क्या शामिल है?
इस पहली की खबर जब सोशल मीडिया पर आई, तो सिक्स ने कहा:
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“सच्चे मायनों में शिक्षा का महादान यही है।”
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“सरकार को ऐसे प्रयास से सीखना चाहिए।”
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“अगर हर जिले में ऐसा केंद्र हो जाए, तो देश बदल जाएगा।”
अंत में… यह सिर्फ कोचिंग नहीं, क्रांति है
जब समाज के अधिकारी और कर्मचारी खुद आगे बढ़कर बच्चों के लिए पढ़ाई का ज़रिया बनाते हैं, तो यह सिर्फ एक कोचिंग क्लास नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति बन जाती है। अजाक्स का यह कार्य सिद्ध करता है कि “असली विविधताओं से नहीं, नियत से आता है।”
? आप भी क्या चाहते हैं इस ब्याज का हिस्सा?
तो जुड़ें अजाक्स के इस शिक्षा महाअभियान से, जहां हर योगदान – समय का हो या धन का – किसी भी बच्चे के भविष्य को बहाल किया जा सकता है।

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शिक्षा फैलाओ, बदलाव लाओ! ?










