गुमशुदा बच्चों की तलाश तेज, बिहार में हर महीने 1200 बच्चों की रिकवरी

पटना
 गुमशुदा बच्चों एवं मानव तस्करी पर शनिवार को पटना के बापू सभागार में पूर्वी जोन कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। गृह विभाग की ओर से आयोजित कांफ्रेंस में बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा एवं मानव तस्करी की रोकथाम के लिए बिहार सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। 'सहयोग शिविर' के माध्यम से मामलों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

12 सौ से ज्यादा लापता बच्चों की बरामदगी
अब तक लगभग 1,200 से अधिक लापता बच्चों की बरामदगी हुई है। 'नया सवेरा 3.0' के माध्यम से पीड़ितों की बरामदगी के साथ उनके पुनर्वास, कौशल विकास एवं सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मानव तस्करी की रोकथाम के लिए रोजगार एवं कौशल विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है। बच्चों का गायब होना सरकार के लिए चिंता का विषय।

बच्चों या बड़ों के गायब होने पर पुलिस को तुरंत एक्टिव होकर कार्रवाई करनी है। एक माह में औसत 1200 बच्चों की रिकवरी हो रही है। उन्होंने कहा कि गुमशुदगी का मामला पलायन से भी जुड़ा है।

सरकार पलायन रोकने को कर रही काम
उद्योग-निवेश आएगा तभी पलायन रुकेगा। सरकार पलायन रोकने के लिए काम कर रही है। बिहार के केवल छह लाख लोग अभी देश के बाहर राशन उठा रहे हैं।

सीएम ने कहा कि जल्द अमीर बनने के प्रयास में कुछ लोग शराब और अपराध के रास्ते पर चले जाते हैं। इससे उनका जीवन और खराब हो जाता है।

ऐसे में प्रयास करना होगा कि उसे न्याय कैसे दे सकते हैं। न्याय के साथ उनके जीवन में बदलाव का प्रयास कैसे कर सकते हैं, इसपर हमें काम करना होगा।

 


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