State Capital Expenditure: 20 राज्यों ने दो महीने में खर्च किया सिर्फ 5.86% बजट! ₹10 लाख करोड़ का विकास फंड पड़ा सुस्त, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
CAG के विश्लेषण में बड़ा खुलासा, करोड़ों के विकास कार्यों की रफ्तार धीमी, कई बड़े राज्य भी खर्च के मामले में पिछड़े

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State Capital Expenditure: 20 राज्यों का पूंजीगत व्यय 2026 CAG रिपोर्ट, State Capital Expenditure News Hindi
State Capital Expenditure: देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में राज्यों का पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल, सिंचाई, बिजली और अन्य आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए राज्यों द्वारा किया जाने वाला पूंजीगत खर्च विकास की रीढ़ माना जाता है। लेकिन चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों के आंकड़ों ने सरकारों की विकास गति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के मासिक खातों के विश्लेषण के अनुसार, देश के 20 राज्यों ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में अपने कुल पूंजीगत बजट का केवल 5.86 प्रतिशत ही खर्च किया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 6.21 प्रतिशत खर्च से भी कम है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्यों में विकास परियोजनाओं की शुरुआत अपेक्षा से धीमी रही है।
₹10 लाख करोड़ के बजट में से खर्च हुए सिर्फ ₹58,636 करोड़
रिपोर्ट के मुताबिक इन 20 राज्यों ने कुल मिलाकर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय बजट रखा था। लेकिन अप्रैल और मई मिलाकर केवल 58,636 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। यानी कुल बजट का महज 5.86 प्रतिशत।
हालांकि बजट का आकार पिछले वर्ष के 9.29 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये हो गया है, लेकिन वास्तविक खर्च में केवल लगभग 1.7 प्रतिशत की ही वृद्धि दर्ज हुई है। इसका मतलब है कि बजट बढ़ने के बावजूद जमीन पर विकास कार्य उसी अनुपात में आगे नहीं बढ़ पाए।
मई महीने में दिखे सुधार के संकेत
हालांकि अप्रैल की तुलना में मई में स्थिति कुछ बेहतर नजर आई।
राज्यों ने मई महीने में सामूहिक रूप से लगभग 39,267 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि पिछले वर्ष मई में यह आंकड़ा लगभग 35,864 करोड़ रुपये था। यानी मई में लगभग 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में यही गति बनी रहती है तो वर्ष के अंत तक पूंजीगत व्यय में सुधार देखने को मिल सकता है।
अप्रैल में सबसे ज्यादा रही सुस्ती
वित्त वर्ष की शुरुआत अप्रैल महीने से होती है लेकिन इस बार अप्रैल में राज्यों का खर्च बेहद कमजोर रहा।
असल आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में पूंजीगत व्यय पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 11 प्रतिशत कम रहा। इसी कारण पहले दो महीनों का औसत भी नीचे चला गया।
इन राज्यों ने किया सबसे बेहतर प्रदर्शन
पूंजीगत व्यय के मामले में कुछ राज्यों ने शानदार प्रदर्शन किया।
केरल ने अपने कुल पूंजीगत बजट का 29.35 प्रतिशत खर्च करके पहला स्थान हासिल किया।
इसके बाद—
- हरियाणा – 22.46%
- आंध्र प्रदेश – 11.38%
- हिमाचल प्रदेश – 10.25%
इन राज्यों ने शुरुआती दो महीनों में विकास परियोजनाओं पर अपेक्षाकृत तेज गति से काम किया।
कई बड़े राज्य रहे पीछे
देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कई बड़े राज्य पूंजीगत व्यय के मामले में काफी पीछे रहे।
- उत्तर प्रदेश – 2.98%
- तमिलनाडु – 3.92%
- कर्नाटक – 3.96%
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, जिसका पूंजीगत व्यय बजट लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये है, उसने शुरुआती दो महीनों में अपने वार्षिक बजट का 3 प्रतिशत से भी कम खर्च किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में यदि खर्च की रफ्तार नहीं बढ़ती तो कई विकास परियोजनाएं निर्धारित समय से पीछे जा सकती हैं।
झारखंड सबसे कमजोर प्रदर्शन वाला राज्य
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू झारखंड रहा।
झारखंड ऐसा एकमात्र राज्य रहा जिसने दो महीने बाद भी शुद्ध-नकारात्मक पूंजीगत व्यय दर्ज किया। इसका उपयोग स्तर केवल 0.05 प्रतिशत रहा।
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इसके अलावा—
- त्रिपुरा – 0.34%
- मेघालय – 1.55%
- उत्तराखंड – 1.67%
- महाराष्ट्र – 1.85%
ये राज्य भी सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे।
महाराष्ट्र और ओडिशा ने मई में की वापसी
अप्रैल में महाराष्ट्र और ओडिशा दोनों ने शुद्ध-नकारात्मक पूंजीगत व्यय दर्ज किया था।
लेकिन मई में दोनों राज्यों ने सुधार किया।
- महाराष्ट्र ने लगभग 2,530 करोड़ रुपये
- ओडिशा ने लगभग 2,425 करोड़ रुपये
का पूंजीगत व्यय दर्ज किया। इससे अप्रैल की कमी की काफी हद तक भरपाई हो गई।
राजस्व व्यय की रफ्तार रही तेज
जहां पूंजीगत व्यय धीमा रहा, वहीं राजस्व व्यय में अच्छी तेजी देखने को मिली।
20 राज्यों ने वित्त वर्ष 2026-27 के कुल 48.99 लाख करोड़ रुपये के राजस्व व्यय बजट में से पहले दो महीनों में 5.70 लाख करोड़ रुपये, यानी 11.64 प्रतिशत खर्च कर दिए।
राजस्व व्यय में सबसे आगे रहे—
- हिमाचल प्रदेश – 16.42%
- आंध्र प्रदेश – 15.86%
- तेलंगाना – 14.28%
- केरल – 14.21%
- राजस्थान – 13.21%
वहीं सबसे धीमी गति वाले राज्यों में—
- झारखंड – 5.54%
- बिहार – 9.07%
- मेघालय – 9.22%
- महाराष्ट्र – 9.36%
शामिल रहे।
पूंजीगत व्यय क्यों होता है महत्वपूर्ण?
पूंजीगत व्यय का सीधा संबंध विकास से होता है।
इसी खर्च से—
- नई सड़कें बनती हैं।
- पुल और फ्लाईओवर तैयार होते हैं।
- अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनते हैं।
- स्कूल और विश्वविद्यालय विकसित होते हैं।
- सिंचाई परियोजनाएं शुरू होती हैं।
- औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विस्तार होता है।
जब पूंजीगत व्यय धीमा रहता है तो रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास की गति पर भी असर पड़ता है।
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विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में कई बार प्रशासनिक प्रक्रियाओं, निविदाओं और परियोजनाओं की मंजूरी में समय लगता है। इसी कारण शुरुआती महीनों में खर्च कम दिखाई देता है।
हालांकि यदि जून के बाद भी खर्च की गति तेज नहीं होती तो इसका असर राज्य की विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों और स्थानीय रोजगार पर पड़ सकता है।

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State Capital Expenditure: निष्कर्ष
CAG के आंकड़े बताते हैं कि 20 राज्यों में पूंजीगत व्यय की शुरुआत अपेक्षा से धीमी रही है। हालांकि मई में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अभी भी अधिकांश राज्यों को विकास परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है।
यदि आने वाले महीनों में पूंजीगत व्यय तेजी पकड़ता है तो इससे न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा बल्कि रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।








