सुप्रीम कोर्ट सख्त, सोनम रघुवंशी की जमानत निरस्त, तीन सप्ताह के भीतर करना होगा सरेंडर

इंदौर /नईदिल्ली
इंदौर के राजा रघुवंशी मर्डर मामले में सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने उसकी जमानत रद्द करते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया. दरअसल इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले मे आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने याचिका दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले का ट्रायल 6 महीने में पूरा हो. अगर 6 महीने में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो सोनम फिर से बेल याचिका दाखिल कर सकती है. इसके साथ ही कोर्ट ने उसे तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है।
हाई कोर्ट ने सोनम की जमानत को रखा था बरकारर
बता दें कि मेघालय हाईकोर्ट ने 30 जून को राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखते हुए मेघालय सरकार की चुनौती को खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने माना था कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में खामियां थीं. इस फैसले के खिलाफ मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
कोर्ट ने सोनम के वकील को दिए थे दो विकल्प
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील को दो विकल्प देते हुए पूछा था कि क्या सोनम रघुवंशी सरेंडर करेगी या कोर्ट उसकी जमानत रद्द करने पर फैसला दे. जबकि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में आरोपी सोनम रघुवंशी ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है. उसके खिलाफ अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता है।
SG तुषार मेहता ने कहा- फरार हो सकती है सोनम
जबकि मेघालय सरकार की ओर से पेश हुए SG तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि दस्तावेज में केवल एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में गलती हुई थी. इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए. तुषार मेहता ने ये भी कहा कि जमानत बरकरार रहने की सूरत में सोनम के फरार होने की आशंका है।
अदालत में मेघालय सरकार की दलील
मेघालय सरकार की तरफ से पेश SG तुषार मेहता ने दलील दी कि प्रतिवादी की शादी एक शख्स से हुई थी. शादी के तुरंत बाद वे हनीमून के लिए मेघालय गए. उसने अपने पति को पहाड़ियों में एक सुनसान जगह पर ले जाने के लिए बहलाया. इस दौरान उसके प्रेमी द्वारा हायर तीन लोग भी उसका पीछा कर रहे थे. आखिरकार पति की हत्या कर दी गई, इसमें पत्नी भी शामिल थी. शव को खाई में फेंक दिया. उसकी मौत खाई में फेंके जाने से नहीं हुई थी. पहले उसकी हत्या की गई और फिर उसे फेंका गया, जांच से यही पता चलता है. फिर रेस्पॉन्डेंट भाग गई।
धारा 103 के बजाय धारा 403 का जिक्र हुआ
जाचं में पता चला कि जिन तीन लोगों ने सोनम की मदद की थी, वे एक खास जगह पर थे. इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. अब रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है कि प्रेमी ने सोनम को सलाह दी थी कि अब उसके लिए सरेंडर करना ज़्यादा सुरक्षित होगा. तब वह गाजीपुर में थी. उसने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि कृपया गिरफ्तारी का मेमो देखें. उसने अपने भाई का नाम उस व्यक्ति के तौर पर बताया जिससे संपर्क हो सके. टाइपिंग की गलती देखें. हत्या के अपराध के बारे में जानने और सरेंडर करने वाले शख्स के मामले में, धारा 103 के बजाय धारा 403 का जिक्र किया गया था।
– मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सोंनम के वकील को दो विकल्प दिया था और पूछा था कि क्या सोनम रघुवंशी सरेंडर करेगी या कोर्ट उनकी जमानत रद्द करने पर फैसला दे जबकि सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल अपने जवाब में आरोपी सोनम रघुवंशी ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा है कि उसे इस मामले में उसे झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता है।
जबकि राज्य सरकार की ओर से SG तुषार मेहता ने SC से कहा था कि दस्तावेज़ में केवल एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में गलती हुई थी- इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए. तुषार मेहता ने कहा कि ज़मानत बरकरार रहने की सूरत में सोनम के फरार होने की आशंका है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए थे दो विकल्प
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के वकील के सामने दो विकल्प रखे थे. अदालत ने पूछा था कि क्या सोनम स्वेच्छा से सरेंडर करेंगी या फिर अदालत उनकी जमानत रद्द करने पर फैसला सुनाए. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करते हुए सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दे दिया।
सोनम की ओर से क्या दलील दी गई
सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी के वकील ने जमानत बनाए रखने की मांग करते हुए कई तर्क रखे. उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले में कुल 94 गवाह बनाए गए हैं, लेकिन अब तक केवल चार गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और सोनम को कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिली थी. बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि सोनम सभी शर्तों का पालन कर रही हैं और उनके फरार होने की कोई आशंका नहीं है।
'सरेंडर नहीं किया, गिरफ्तार किया गया था'
सोनम के वकील ने एक और महत्वपूर्ण दलील दी. उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि सोनम ने आत्मसमर्पण किया था. बचाव पक्ष के अनुसार, सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था. इसलिए यह कहना कि उन्होंने स्वयं सरेंडर किया था, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
मेघालय सरकार ने क्या कहा
राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दलील का विरोध किया. उन्होंने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी के आधार (Ground of Arrest) को लेकर उठाई गई आपत्ति का कोई ठोस आधार नहीं है. उनका कहना था कि रिकॉर्ड और चार्जशीट में यह दर्ज है कि आरोपी ने सरेंडर किया था. साथ ही उन्होंने दोहराया कि तकनीकी त्रुटि के आधार पर मिली जमानत को जारी नहीं रखा जाना चाहिए।
सोनम ने खुद को बताया बेगुनाह
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में सोनम रघुवंशी ने खुद को निर्दोष बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) पर आधारित है. उनका कहना था कि केवल आरोप लगाए जाने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
देशभर में चर्चा में रहा था मामला
राजा रघुवंशी हत्याकांड अपनी शुरुआत से ही देशभर में चर्चा का विषय रहा है. हनीमून के दौरान हुई हत्या और उसके बाद जांच में सामने आए घटनाक्रम ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में है. अदालत के आदेश के अनुसार सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा. फिलहाल मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी है. अभियोजन पक्ष गवाहों के बयान दर्ज करा रहा है, जबकि बचाव पक्ष लगातार अपनी दलीलें अदालत के सामने रख रहा है. मामले में अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने और अदालत द्वारा सभी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही आएगा।











