दाग पुरानी गुलामी का धोया। माटी ने जब -जब पुकारा रे ! ये तिरंगा हमारा। एकता की गंगा बहाया रे ! ये तिरंगा हमारा। लहर – लहर लहराया रे ! ये तिरंगा हमारा। जवान -किसान का सबका दुलारा
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तिरंगा | ऑनलाइन बुलेटिन
©रामकेश एम यादव, मुंबई मेरी आन तिरंगा है, मेरी शान तिरंगा है, कोई दुश्मन देखे इसे, दहलाता तिरंगा है।…
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