धरा प्रलय को झेलती है। सौंदर्य-रूप कहो कब स्वप्न में मैले हुए हो? दे रही आमन्त्रण और व्योम तक फैले हुए हो। प्रीत से ज्योति बनी है
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सृजन के क्षण | ऑनलाइन बुलेटिन
©सुरेंद्र प्रजापति, गया, बिहार परिचय- शिक्षा- मैट्रिक पास, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं एवं कहानियों का प्रकाशन. रात्रि सुख…
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