धीरे-धीरे पिघलने लगती है। मानों कुछ बून्द
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चॉकलेट दिवस l ऑनलाइन बुलेटिन
©नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़, मुंबई तुम….. हाँ ….. तुम….., चॉकलेट की तरह हो, जो मुँह में आते ही, पिघलने लगता…
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©नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़, मुंबई तुम….. हाँ ….. तुम….., चॉकलेट की तरह हो, जो मुँह में आते ही, पिघलने लगता…
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